32 हजार करोड़ रुपये में बिकी Yahoo कंपनी, Verizon के साथ डील कंफर्म
Updated at : 25 Jul 2016 5:29 PM (IST)
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-बिजनेस डेस्क- इंटरनेट की दुनिया की अग्रणी कंपनी वेरिजॉन ने पुष्टि करते हुए कहा कि याहू का 4.83 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण कर लिया गया है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत 32,000 करोड़ रुपये है. इस डील के बाद से याहू का नाम बदलकर AOL मर्जर हो जायेगा.इंटरनेट के शुरुआती दिनों में याहू की गिनती […]
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-बिजनेस डेस्क-
इंटरनेट की दुनिया की अग्रणी कंपनी वेरिजॉन ने पुष्टि करते हुए कहा कि याहू का 4.83 बिलियन डॉलर में अधिग्रहण कर लिया गया है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत 32,000 करोड़ रुपये है. इस डील के बाद से याहू का नाम बदलकर AOL मर्जर हो जायेगा.इंटरनेट के शुरुआती दिनों में याहू की गिनती चर्चित कंपनी के रूप में होती थी. हालांकि अब भी यह एक बड़ी कंपनी है, लेकिन पिछले कुछ सालों से कमाई के मामले में कंपनी पिछड़ रही थी.
अलीबाबा के शेयर को डील में शामिल नहीं किया गया है. याहू के जापान के शेयर भी इस डील में शामिल नहीं होंगे. इंटेलक्चुअल प्रोपर्टी एसेट्स को अलग से बेचा जायेगा.वेरिजोन ने याहू के विज्ञापन, कंटेट, सर्च और मोबाइल एक्टिवीटी को खरीदा है. वेरिजोन के सीइओ ने कहा कि इस अधिग्रहण के साथ ही वेरिजोन अपने प्रतिस्पर्धी कंपनियों के मुकाबले खुद को मजबूत स्थिति में पायेगा.फरवरी में याहू कंपनी ने घोषणा की थी कि कोर इंटरनेट बिजनेस के लिए वह रणनीतिक विकल्प खोज रहा है. विश्लेषकों की मानें तो याहू खुद को प्रासंगिक बनाये रखने में नाकामयाब साबित रही.इस डील के बाद से याहू चाइनीज कंपनी अली बाबा से अपनी पूंजी को अलग करने में सक्षम हो पायेगा. वेरिजोन इंटरनेट की दुनिया में तेजी से बढ़ने वाली कंपनी है. इसके दो वेंचर टेकक्रेंच और हफिंगन पोस्ट पहले से ही काफी लोकप्रिय है.
याहू को करना पड़ा था घाटे का सामना
कंपनी को 2015 के तिमाही में 4.4 बिलीयन डॉलर का लॉस हुआ था. खबर यह भी थी कि कंपनी अपने 1700 कर्मचारियों को निकाल सकती है. यही नहीं याहू के टॉप एक्जक्यूटिव कंपनी छोड़कर चले गये थे. वहीं वेराजॉन का मार्केट कैप 15.5 लाख करोड़ रुपये है.
1994 में शुरू हुई थी कंपनी
याहू की शुरुआत साल 1994 में हुई. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो इलेक्ट्रिकल इंजनीयरिंग के विद्यार्थी जेरी यांग और डेविड फिलो ने इस कपंनी की नींव डाली. शुरुआत में इसका नाम "जेरी एंड डेविड गाइड टू वर्ल्ड वाइड वेब " रखा गया था लेकिन मार्च में इसका नाम बदलकर याहू कर दिया गया. उसी साल मार्च महीने में याहू को कंपनी के तौर पर इसका गठन किया गया. इसी साल कंपनी ने रायटर्स न्यूज एजेंसी के साथ गठजोड़ किया. साल 1996 में याहू ने आइपीओ लाया और देखते ही देखते इंटरनेट की दुनिया में राज करने वाली कंपनी बन गयी.
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