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आर्थिक सर्वे 2015-16 : 2016-17 में विकास दर 7 से 7.75% रहने का अनुमान, कुछ सालों में 8% से ज्यादा

Updated at : 26 Feb 2016 12:36 PM (IST)
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आर्थिक सर्वे 2015-16 : 2016-17 में विकास दर 7 से 7.75% रहने का अनुमान, कुछ सालों में 8% से ज्यादा

नयी दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार का आम बजट सोमवार को प्रस्तुत किया जायेगा. इससे पूर्ववित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज वर्ष 2015-16 कीआर्थिक समीक्षा लोकसभा में पेश किया.इस सर्वे में अनुमान जताया गया है कि 2016-17 में आर्थिक विकास दर 7 से 7.75 फीसदी रहेगा.जारी वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान […]

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नयी दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार का आम बजट सोमवार को प्रस्तुत किया जायेगा. इससे पूर्ववित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज वर्ष 2015-16 कीआर्थिक समीक्षा लोकसभा में पेश किया.इस सर्वे में अनुमान जताया गया है कि 2016-17 में आर्थिक विकास दर 7 से 7.75 फीसदी रहेगा.जारी वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है. आर्थिक समीक्षा में भविष्य में भारत के तेज विकास दर हासिल करने की उम्मीद भी प्रकट की गयी है.सर्वे में आने वाले वर्ष में महंगाई दर बढ़ने की संभावना से इनकार किया गयाहै. 2016-17 में महंगाई दर 4 से 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है. आर्थिक सर्वे पेश करते हुए अरुण जेटली ने कहा कि आने वाले वर्ष में रोजगार के अवसर सृजित होंगे. युवाओं को रोजगार मिलेगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि महंगाई नहीं बढ़ेगी. उन्‍होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बावजूद महंगाई बढने का खतरा नहीं है. जेटली ने कहा कि खराब मौसम का ज्‍यादा असर नहीं होगा. उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से रोजगार बढ़ेगा. आर्थिक सर्वेक्षणदेश की आर्थिक सेहत व उसकी दिशा कालेखाजोखा होता है. इसका आने वाले बजट पर प्रभाव पड़ता है.

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में भारत की राजकोषीय स्थिति पर सातवें पे कमीशन व ओआरओपी का बोझ पड़ेगा. समीक्षा में कहा गया है कि मार्च 2017 तक पांच प्रतिशत मुद्रास्फीति के लक्ष्य को आरबीआइ हासिल कर लेगा. आरबीआइ की करंट पॉलिसी न्यूट्रल रहने की बात कही गयी है. आर्थिक सर्वे में यह उम्मीद जतायी गयी है कि भारत अगले कुछ सालों में आठ प्रतिशत से अधिक की विकास दर को हासिल कर लेगा. वित्तीय वर्ष 2016-17 में सीपीआइ इन्फ्लेशन के चार से पांच प्रतिशत के बीच होने की बात कही गयी है.यह भी संकेत है कि देश में रोजगार के अवसर बढेंगे. जारी वित्तीय वर्ष में जीडीपी ग्रोथ 7.6 रहने का अनुमान है.

जेटली द्वारा आज संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2015-16 देश के लिए मजबूत मैक्रो-आर्थिक दृष्टिकोण की पुष्टि करती है. समीक्षा यह दर्शाती है कि कम वैश्विक उपभोक्ता मूल्यों में कमी और आवधिक अशांति वाली कुछ बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में कुछ बढ़ोत्तरी होने से 2015-16 में वाह्य क्षेत्र वातावरण पर प्रभाव पड़ा है. समीक्षा के अनुसार चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी) के दौरान भारत की निर्यात में बढ़ोत्तरी दर वर्ष घटकर 17.6 प्रतिशत रह गई है और यह 217.7 बिलियन अमरीकी डॉलर पर आ गयी है. पेट्रोलियम तेल लुब्रीकेंट्स (पीओएल) का आयात कम होने का मुख्य कारण इस वर्ष अभी तक कुल आयात में कमी होना है. इसके परिणाम स्वरूप 2015-16 के दौरान (अप्रैल-जनवरी) व्यापार घाटा जो वर्ष 2014-15 की इसी अवधि के दौरान 119.6 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा था घटकर 106.8 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा है.

जीएसटी होगा सुधार का असाधारण उपाय

आर्थिक समीक्षा 2015-16 में प्रस्‍तावित वस्‍तु और सेवा कर (जीएसटी) को आधुनिक वैश्विक कर इतिहास में सुधार का असाधारण उपाय बताया गया है. राजनीतिक सहमति के बाद संवैधानिक संशोधन के लिए लंबित जीएसटी केंद्र, 28 राज्‍यों और 7 केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा. समीक्षा में कहा गया है कि अनुमानित दो से दो दशमलव पांच मिलियन उत्‍पाद शुल्‍क और सेवा कर देने वालों को प्रभावित करने वाले जीएसटी से भारतीय कर प्रणाली में नाटकीय बदलाव आएगा. इक्‍कीसवीं सदी के लिए राजकोषीय क्षमता का खाका रखते हुए समीक्षा में निजी करदाताओं के आधार को बढ़ाने के लिए कहा गया है. 1980 के मध्‍य के बाद से अधिक संख्‍या में कर चुकाए जाने के बावजूद करीबन 85 प्रतिशत अर्थव्‍यवस्‍था कर दायरे से बाहर है. इसमें कहा गया है कि करदाताओं के करीब चार प्रतिशत और मतदाताओं के अनुपात को देखें तो यह अनुपात अनुमानित 23 प्रतिशत तक बढ़ना चाहिए.

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