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मंदी का असर भारत में नहीं, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत: अरुण जेटली

Updated at : 06 Sep 2015 5:03 PM (IST)
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मंदी का असर भारत में नहीं, हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत: अरुण जेटली

अंकारा (तुर्की): वित्त मंत्री अरण जेटली ने चीन की मुद्रा यूआन के हाल के अवमूल्यन और अमेरिका में नीतिगत ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की बातों को ‘क्षणिक’ प्रभाव वाली बातें बताते हुए कहा कि भारतीय मुद्रा की विनिमय दर में उतार..चढाव और भारत के बाजारों की स्थिति उसकी वास्तविक अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर निर्भर […]

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अंकारा (तुर्की): वित्त मंत्री अरण जेटली ने चीन की मुद्रा यूआन के हाल के अवमूल्यन और अमेरिका में नीतिगत ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की बातों को ‘क्षणिक’ प्रभाव वाली बातें बताते हुए कहा कि भारतीय मुद्रा की विनिमय दर में उतार..चढाव और भारत के बाजारों की स्थिति उसकी वास्तविक अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा कि भारत ‘‘मजबूत स्थिति” में है और देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी आनी शुरु हो गई है और सरकार वास्तविक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगी हुई है और उसके निर्णय, बाजार के उतार चढाव से प्रभावित नहीं हैं.

वित्त मंत्री ने यहां जी..20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की के सम्मेलन के दौरान बातचीत में कहा, ‘‘ इस समय लोगों को अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और शेयर बाजार व घरेलू मुद्रा पर (चीन की) मुद्रा अवमूल्यन के तात्कालिक प्रभाव के बीच फर्क समझना चाहिए. अंतत: तात्कालिक प्रभाव का यह दौर जब समाप्त हो जाएगा तो वास्तविक अर्थव्यवस्था ही मायने रखेगी.” उन्होंने कहा, ‘‘ यह (अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति) वह बात है जो मुद्रा की विनिमय दर और शेयर बाजार की स्थिति को तय करेगी.”
जी..20 सम्मेलन कल यहां समाप्त हो गया. गौरतलब है कि हाल ही में चीन द्वारा यूआन की विनिमय दर में किए गए अवमूल्यन से भारत सहित विश्व के प्रमुख शेयर बाजार भारी बिकवाली का शिकार हुए तथा विभिन्न देशों की मुद्राओं पर भी इसका दबाव पडा.यहां सम्मेलन के बाद कल रात जारी घोषणा पत्र में विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने अपनी मुद्राओं के अवमूल्यन की होड में न पडने की प्रतिबद्धता जाहिर की है. जी..20 की अर्थव्यवस्थाओं ने बाजार द्वारा निर्धारित विनिमय दर की दिशा में बढने का संकल्प किया है.
जेटली ने विनिमय दरों में भारी उतार..चढाव की स्थिति से निपटने लिए विश्व स्तर पर एक सुरक्षा तंत्र बनाए जाने की जरुरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा तंत्र अच्छी तरह से डिजाइन किया गया हो और इसमें पर्याप्त कोष हो तथा इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के तत्वावधान में बनाया जाय जो उतार..चढाव के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए विदेशी विनिमय की बहुपक्षीय अदला..बदली की सुविधा प्रदान करे.
उन्होंने कहा, ‘‘ दुनिया के अन्य देशों के साथ तुलना करें तो हम :भारत: मजबूत स्थिति में हैं. दूसरे जो सकारात्मक संकेत हैं वे अमेरिका से हैं जहां दूसरी तिमाही की आर्थिक वृद्धि के आंकडे अच्छे रहे हैं और बेरोजगारी घटी है.”जेटली ने कहा कि बैठक में नेताओं ने अपनी ओर से स्थितियों की व्याख्या की. जहां तक भारत का संबंध है, निश्चित तौर पर पिछला एक महीना उठापटक भरा रहा है जिसमें शेयर बाजारों में गिरावट रही. इसके पीछे बाहरी कारण रहे हैं. इसी संदर्भ में वित्त मंत्री ने कहा ‘‘हमें वास्तविक अर्थव्यवस्था और तात्कालिक कारकों के बीच अंतर समझने की जरुरत है.” इस सवाल पर कि क्या जी..20 की बैठक में चीन की मुद्रा के अवमूल्यन एवं अमेरिका में ब्याज दर की संभावित वृद्धि की बात उठी थी, उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभिन्न पक्षों की ओर से टिप्पणियां जरुर की गईं.
उन्होंने कहा, ‘‘ अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढाने का मामला जरुर है जिस पर इस महीने के अंत तक फैसला किया जाना है. लेकिन मेरी राय में जो भी स्थिति बने, वह तात्कालिक होगी, इसलिए हमारी प्रतिक्रिया है कि हमें अपनी वास्तविक अर्थव्यवस्था के मानकों को मजबूत करना है.”जेटली ने कहा कि इस समय ज्यादातर अर्थव्यवस्थाएं कठिनाई में हैं. उनकी वृद्धि दर घट रही है और मुद्राओं की विनिमय दर में उतार..चढाव चल रहा है. हमने इसे अवसर के रुप में लिया है और हम अपनी नीतिगत व्यवस्था और वास्तविक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगे हुए हैं.वित्त मंत्री ने तुर्की के उद्यमियों के साथ बैठक में कहा, ‘‘ भारतीय अर्थव्यवस्था बडे पैमाने पर खुली हुई है और पहले से अधिक संख्या में उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए खोल दिया गया है.” जेटली ने कहा, ‘‘ विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में हमारी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर आठ प्रतिशत से ज्यादा चल रही है.
कृषि की वजह से कुल मिलाकर वृद्धि दर कम हो रही है.” उन्होंने कहा, जहां तक कृषि का संबंध है, जून और जुलाई में हमारा काम अच्छा चल रहा था, लेकिन अगस्त और सितंबर में मानसून की स्थिति ज्यादा उत्साहजनक नहीं रही जिसको लेकर कुछ चिंता जरुर है. ‘‘ लेकिन विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की स्थिति में सुधार को देखकर लगता है कि भारत एक बहुत सम्मानजनक वृद्धि दर हासिल कर लेगा.”
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