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लोकसभा में कालाधन विधेयक हुआ पास, अरुण जेटली ने मांगा था विपक्ष का समर्थन

Updated at : 11 May 2015 7:21 PM (IST)
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लोकसभा में कालाधन विधेयक हुआ पास, अरुण जेटली ने मांगा था विपक्ष का समर्थन

नयी दिल्ली :लोकसभा ने आज पेश हुए बहुचर्चित काला धन विधेयक को पास कर दिया है. इसके पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज काले धन से संबंधित विधेयक को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश किया किया था. जेटली ने इस बिल के बारे में बोलते हुए सदन को बताया था कि इस विधेयक […]

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नयी दिल्ली :लोकसभा ने आज पेश हुए बहुचर्चित काला धन विधेयक को पास कर दिया है. इसके पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज काले धन से संबंधित विधेयक को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश किया किया था. जेटली ने इस बिल के बारे में बोलते हुए सदन को बताया था कि इस विधेयक में विदेशों में अवैध धन रखने वालों के लिए 10 साल तक की कडी सजा और जुर्माना एवं 120 प्रतिशत तक कर वसूलने का प्रावधान है. लोकसभा में इसके पास हो जाने के बाद सरकार इसे अब राज्य सभा में पेश करेगी. लोकसभा में कांग्रेस जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टी की तरफ से इस बिल को पास करने में कोई बड़ी अड़चन पैदा न करने से सरकार को उम्मीद है कि राज्य सभा में भी ये बिल आसानी से पास हो जायेगा.
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन में ‘अप्रकटित विदेशी आय और आस्ति (कर अधिरोपण) विधेयक, 2015’ को चर्चा के लिए रखते हुए विपक्षी दलों से इसे पारित कराने में सहयोग मांगा.
जेटली ने इसे संसद की स्थायी समिति को भेजने की विपक्षी दलों की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इस कानून को लागू करने में देरी से अज्ञात स्थानों पर विदेशों में धन जमा करने वालों को धन स्थानांतरित करने का मौका मिल जायेगा. जो लोग बेदाग निकलना चाहते हैं उनके लिए जेटली ने कहा कि अघोषित सम्पत्ति के संबंध में दो हिस्से सुझाए गए हैं. एक कि सम्पत्ति की घोषणा करें और फिर 30 प्रतिशत कर एवं 30 प्रतिशत जुर्माना भरें. इस बारे में उदाहरण देते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि विदेशों की सम्पत्ति की घोषणा करने के लिए दो महीने का समय हो सकता है और छह महीने में कर और जुर्माना भरा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि संपत्ति की घोषणा करने वालों को एक रास्ता प्रदान करने की सीमा समाप्त होने के बाद अगर कोई व्यक्ति विदेशों में अघोषित सम्पत्ति के साथ पकडा जाता है तब उसे 30 प्रतिशत कर के साथ 90 प्रतिशत जुर्माना और आपराधिक अभियोग का सामना करना पडेगा.
विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग को खारिज करते हुए जेटली ने कहा, जब हम यह कदम उठा रहे हैं, तब हम इससे पीछे नहीं हट सकते. पिछले 11 महीने से आप पूछ रहे थे कि हम इस विषय पर क्या कर रहे हैं. अब जबकि मैं कदम उठा रहा हूं तब इस विधेयक का समर्थन करें और स्थायी समिति को भेजने की मांग को वापस लें.
लोकसभा में मार्च में पेश इस विधेयक के लागू होने पर इसके प्रावधान एक अप्रैल 2016 से प्रभावी होंगे जिसमें भारत में निवासी और अघोषित विदेशी आय और आस्तियों को रखने वाले सभी व्यक्तियों पर लागू होगा.
जेटली ने कहा कि पहली बार कोई सरकार अज्ञात विदेशी आय पर कर लगाने जा रही है, इसलिए उन्होंने उल्लंघन करने वालों को बेदाग बनने के लिए एक रास्ता प्रदान किया है. इसकी अवधि की अधिसूचना विधेयक को संसद की मंजूरी मिलने के बाद अलग से जारी की जायेगी.
जेटली ने कहा, गैर कानूनी कोषों को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाना काफी तेजी से हो जाता है. एक लैपटाप पर बैठकर कोई भी 120 से 150 देशों को कोष का हस्तांतरण कर सकता है. हमें इसे रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए और इसलिए इस कानून को तत्काल पारित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कानून तत्काल पारित नहीं होता है तब सरकार को चालू वर्ष में कर संबंधी नुकसान होगा. सदन में इस विधेयक को लेकर काफी प्रक्रियागत बहस की स्थिति देखने को मिली.
कांग्रेस के दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि यह वित्त विधेयक है और इसे धन विधेयक के रुप में पेश किया जाना चाहिए. इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजा जाना चाहिए. अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अपनी व्यवस्था में इसे धन विधेयक बताया. अन्नाद्रमुक और बीजद सदस्यों ने इस विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजे जाने की मांग की.
इस पर अध्यक्ष ने कहा कि वित्त मंत्री ने उन्हें 25 अप्रैल को लिखा था, जिसमें इसे स्थायी समिति को नहीं भेजने का आग्रह किया गया था. पत्र का जिक्र करते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा कि विधेयक को पारित किये जाने की जरुरत है ताकि सरकार कालाधन वापस लाने के लिए कार्रवाई कर सके.
इस विधेयक के उद्देश्यों और कारणों संबंधी कथन के अनुसार, इसमें उन व्यक्तियों के लिए सीमित रास्ता खोलने का प्रस्ताव है जिनके पास कोई अप्रकट या अघोषित विदेशी आस्तियां हैं.
विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि ऐसे लोग निर्दिष्ट कर अधिकारी के समक्ष एक निश्चित समयावधि के भीतर घोषणा फाइल कर सकते हैं और उसके पश्चात तीस प्रतिशत की दर पर कर तथा जुर्माने के रुप में उसके बराबर राशि का भुगतान कर सकते हैं. विधेयक में प्रावधान है कि इन शर्तों को पूरा करने पर किसी व्यक्ति के खिलाफ इस प्रस्तावित विधेयक के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.
विधेयक के अनुसार विदेशी संपत्ति के संबंध में आय छिपाने के लिए कर की राशि की तीन गुना राशि के जुर्माने का भी प्रावधान है. इसमें कहा गया है कि यह उन लोगों के लिए महज एक अवसर है कि वे नये विधेयक के कडे प्रावधानों के प्रभावी होने से पहले कर का भुगतान कर दें. विधेयक में विदेशी आय के संबंध में कर चोरी का प्रयास करने पर 3 से 10 साल तक की कैद के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है. दूसरी बार अपराध करने पर 3 से 10 साल तक की कैद के साथ 25 लाख रुपये से लेकर एक करोड रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
विधेयक में कहा गया है कि अभियोग चलाने की प्रक्रिया में यह धारणा बनायी जायेगी कि गलती जान-बूझकर कर की गई है और आरोपी को यह साबित करना है कि उनके मन में गलती करने की भावना नहीं थी. हालांकि, इसमें विदेशी खातों में मामूली रकम रखने वाले लोगों के संरक्षण की बात कही गई है जिसकी सूचना अनजाने में नहीं दी गई.
इसमें कहा गया है कि कानून के तहत कर अधिकारियों को जांच और तलाशी लेने, सम्मन जारी करने, उपस्थिति दर्ज कराने, साक्ष्य पेश करने आदि का अधिकार दिया गया है. करदाताओं के हितों की सुरक्षा की जायेगी और वे आईटीएटी, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकेंगे.
विधेयक के मुताबिक, सरकार को अन्य देशों के साथ समझौता करने या सूचना का आदान प्रदान करने, कर वसूलने और दोहरा कराधान को रोकने की शक्ति प्रदान की गई है. धन शोधन निरोधक अधिनियम 2002 में संशोधन किया जायेगा ताकि कर चोरी के अपराध को अधिनियम के तहत अधिसूचित अपराध के रुप में शामिल किया जाए.
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन कर रही है क्योंकि वह जनता और 15 लाख रुपये के बीच अडंगा डालने की आरोपी नहीं बनना चाहती.
दीपेन्द्र हुड्डा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान किए गए दावे का परोक्ष जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि विदेशों में जमा सारे अवैध धन को यदि देश में वापस लाया जाए तो हर किसी के हिस्से में 15-15 लाख रुपये आएंगे. हालांकि, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भाजपा के सत्ता में आने के बाद इसे कोई खास तव्वजो नहीं देते हुए कहा था कि यह तो केवल एक ‘जुमला’ था.
हुड्डा ने कहा, हमारी पहली आशंका यह है कि यह पूरी तरह प्रभावकारी नहीं है. यह बहुत से करदाताओं, कानून का पालन करने वालों के लिए काफी परेशानियां पैदा करेगा. यह एक मिलाजुला अवसर है. इस विधेयक का कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सत्तारुढ पार्टी उन्हीं कानूनों की वकालत कर रही है जिनका उसने विपक्ष में रहते हुए विरोध किया था. उन्होंने जीएसटी विधेयक और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढाने संबंधी विधेयकों का हवाला दिया.
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सरकार के पास ऐसे विधेयकों को लाने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं था क्योंकि पिछली संप्रग सरकार ने वर्ष 2012 में एक बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिनसे ऐसी अवैध संपत्तियों के खिलाफ कानून बनाना देश की जिम्मेदारी हो गयी थी.
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