भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खुशियों का बुधवार
Updated at : 05 Nov 2014 6:09 PM (IST)
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नयी दिल्ली/मुंबई : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह बुधवार ऐतिहासिक है. पहली बार सेंसेक्स 28 हजार को पार कर गया और निफ्टी भी नयी उंचाई पर पहुंचा. सेंसेक्स के इस नयी हाइ पर पहुंचने को शुभ संकेत माना जा रहा है. बाजार के जानकारों का मानना है कि सेंसेक्स दिसंबर अंत तक 30 हजार और […]
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नयी दिल्ली/मुंबई : भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह बुधवार ऐतिहासिक है. पहली बार सेंसेक्स 28 हजार को पार कर गया और निफ्टी भी नयी उंचाई पर पहुंचा. सेंसेक्स के इस नयी हाइ पर पहुंचने को शुभ संकेत माना जा रहा है. बाजार के जानकारों का मानना है कि सेंसेक्स दिसंबर अंत तक 30 हजार और निफ्टी नौ हजार को पार कर जायेगा. इस साल के शुरुआत से अबतक बाजार में 32 प्रतिशत तक की बढत आ चुकी है. जानकारों का मानना है कि 2015 के अंत तक सेंसेक्स 35000 को पार कर जायेगा. हालांकि कुछ जानकार मान रहे है कि साल के बीच तक भी इस संख्या को बाजार छू सकता है. भारतीय अर्थव्यवस्था में यह बढत घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण आ रही है. इससे घरेलू और बाहरी दोनों स्तर के निवेशक अपना निवेश आगामी दिनों में बढायेंगे.
वहीं, केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सीआइआइ में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सम्मेलन में ठोस लहजे में कहा कि भारत आर्थिक सुधारों की दिशा में तेजी से आगे बढेगा. उन्होंने सुधारों के कई सूत्र भी बताये, जिस पर सरकार मजबूती से काम करने जा रही है. जेटली के मुताबिक निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था में वापस लौट रहा है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार, बीमार पीएसयू के निजीकरण, खनन सेक्टर में सुधार, प्राकृतिक संसाधनों के लिए रिफॉर्म पॉलिसी लाने, बीमा सेक्टर में विदेशी निवेश बढाने जैसे कदमें उठायेगी. उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार का कोई भी एक गलत कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है.
वहीं, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में सार्वजनिक उद्यमों की स्थायी सभा के पुरस्कार वितरण से संबंधित कार्यक्रम में कहा कि सरकार की नीतिगत पहल से देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही सात से आठ प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि दर को हासिल कर लेगी. मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज की तारीफ करते हुए कहा निवेश में फिर तेजी लाने, वृहद आर्थिक स्थायित्व को मजबूत करने और ढांचागत सुविधाओं को उन्नत बनाने के लिए उठाये जा रहे कदमों से भारत एक बार फिर सात से आठ प्रतिशत की उच्च आर्थिक वृद्धि दर के दायरे में पहुंच जायेगा.
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ही आर्थिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत पर पहुंच जाने के साथ ही अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं. राष्ट्रपति के ये बयान इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि वे लंबे समय तक देश के वित्तमंत्री पद पर रहे हैं और उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था की गहरी समझ है. उन्होंने नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान का भी जिक्र किया और कहा, मेरा मानना है कि इस अभियान को वास्तविकता में बदलने में सार्वजनिक उपक्रमों की अहम भूमिका है.
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