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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यूनिटेक के MD संजय चंद्रा को 750 करोड़ रुपये जमा कराने पर ही मिलेगी जमानत

Updated at : 30 Oct 2017 6:02 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यूनिटेक के MD संजय चंद्रा को 750 करोड़ रुपये जमा कराने पर ही मिलेगी जमानत

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा की जमानत याचिका पर तभी विचार किया जायेगा जब उसकी रियल एस्टेट फर्म दिसंबर के अंत तक 750 करोड़ रुपये जमा करा देगी. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की तीन […]

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नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा की जमानत याचिका पर तभी विचार किया जायेगा जब उसकी रियल एस्टेट फर्म दिसंबर के अंत तक 750 करोड़ रुपये जमा करा देगी. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत की रजिस्टरी में जमा करायी जाने वाली यह धनराशि मकान के उन खरीदारों को दी जायेगी जो अपना धन वापस चाहते हैं.

पीठ ने तिहाड़ जेल प्राधिकारियों से कहा कि संजय चंद्रा की अपनी कंपनी के अधिकारियों, फाइनेंसरों और वकीलों से मुलाकात की सुविधा मुहैया करायें ताकि वह मकान खरीदारों को पैसा लौटाने और निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिये धन की व्यवस्था कर सकें. इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वकील पवन श्री अग्रवाल ने पीठ से कहा कि रियल एस्टेट फर्म को मकान खरीदारों को पैसा लौटाने और निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा करने के लिये करीब दो हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है.

संजय चंद्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने पीठ से कहा कि उन्होंने पैसा लौटाने और परियोजनाओं को पूरा करने के बारे में एक योजना दी है और इसके लिये उन्हें समय चाहिए. शीर्ष अदालत ने इस मामले को जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिये सूचीबद्ध करते हुये चंद्रा को न्यायालय की रजिस्टरी में 750 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद इसका उल्लेख करने की छूट प्रदान की.

शीर्ष अदालत ने 23 अक्तूबर को तिहाड़ जेल में बंद संजय चंद्रा से कहा था कि वह धन वापस चाहने वाले परेशानहाल मकान खरीदारों को धन लौटाने के लिये 1865 करोड़ रुपये में से एक हजार रुपये न्यायालय की रजिस्टरी में जमा करायें. न्यायालय ने रियल एस्टेट फर्म से यह भी जानना चाहा था कि वह खरीदारों को धन लौटाने और अपनी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिये अपनी संपत्तियों की नीलामी क्यों नहीं करता है.

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