Bihar: बिहार में सीएम की कोई वैकेंसी नहीं, अपार बहुमत से लौटेगा एनडीए, प्रभात खबर से बोले धर्मेंद्र प्रधान

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 01 Nov 2025 8:42 PM

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धर्मेंद्र प्रधान

Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने प्रभात खबर से कहा कि इस बार मुकाबला सीधा एनडीए और महागठबंधन के बीच है. उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता एनडीए सरकार के काम से संतुष्ट है और अपार बहुमत से सत्ता में वापसी करने जा रही है.

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Bihar: बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि बिहार में कई लोग (प्रशांत किशोर का जिक्र होने पर) चुनाव लड़ रहे हैं. चुनाव है. कोई भी लड़ सकता है. पर असल मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच है. हम यह कह सकने की स्थिति में हैं कि हम अपार बहुमत से सत्ता में लौट रहे हैं. बिहार के लोग हमारे काम के प्रति अपने भारी समर्थन का इजहार करने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री के सवाल पर प्रधान का तर्क था कि जब यहां इस पद की वैकेंसी ही नहीं है, तब इस सवाल का सवाल नहीं उठता. राजनीतिक संपादक मिथिलेश और डिजिटल बिहार हेड सुमन केशव सिंह से बातचीत के संपादित अंश.

सवाल : पिछले चुनावों की तरह सीएम फेस पर आपलोग क्यों बच रहे?

मुख्यमंत्री पद को लेकर एनडीए के भीतर कोई दुविधा नहीं है. यह कोई मुद्दा ही नहीं है. एनडीए में मुख्यमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है. मुल मुद्दा नया बिहार बनाने का है. पचास से अधिक विधानसभा क्षेत्रों का मैंने स्वयं भ्रमण किया है. मैं कोई ज्योतिषी तो नहीं हूं पर मतदाताओं की आंखें और मन को पढ़ लेता हूं. हम बड़ी बहुमत की ओर बढ़ रहे हैं. भाजपा एनडीए को लेकर आगे बढ़ रही है. यहां कोई अगलग्गू या पिछलग्गू नहीं है. हम कांग्रेस के खिलाफ वैकल्पिक शासन खड़ा कर रहे हैं.

सवाल : क्या कारण है कि बिहार भाजपा का कोई चेहरा स्थापित नहीं हो पाया आजतक?

पहली बात की बिहार में भाजपा में कई ऐसे दक्ष चेहरे हैं, जिन्हें कोई भी जिम्मेवारी दी जाये, तो वे उसे बखूबी संभाल सकते हैं. भाजपा कैडर आधारित पार्टी है. लोगों की पसंद है. हम एकजुटता के साथ विपक्ष के गठबंधन से लड़ रहे हैं. भाजपा के पास लाखों कार्यकर्ता और नेता हैं. तभी तो हमारी पार्टी चल रही है. कुशल लोग भरे पड़े हैं.

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सवाल: प्रशांत किशोर ने आपके नेताओं और जदयू के नेताओं पर गंभीर किस्म के आरोप लगाये. आपके पास बचाव में क्या कहना है?

प्रशांत किशोर खुद एक पार्टी हैं. हमारे विरोधी. वे हमारे या हमारे गठबंधन के नेताओं के बारे में क्या कहेंगे? वह राजनैतिक प्रतिस्पर्द्धा में ऐसे आरोप लगा रहे हैं. कोई प्रमाण नहीं. कोई सबूत नहीं. बस, राजनीति में आये हैं तो कुछ बोल दिया. हालांकि मेरा मानना है कि इतनी सतही बातें नहीं होनी चाहिए. आप कोई बात कहें तो उसका लॉजिक (तर्क) भी होना चाहिए.

सवाल : 20 साल पहले के शासन को ‘जंगलराज’ बताते हैं एनडीए के नेता. क्या बिहार को लेकर कोई और मुद्दा नहीं है आपके पास?

यह बात सही है कि 2005 से एनडीए की सरकार है. लेकिन हमारा दायित्व है कि हम जंगलराज के बारे में नागरिकों को सचेत भी करते रहें. बड़े जतन से बिहार को वहां से निकाल कर यहां तक एनडीए की सरकार ने लाया है. जंगलराज बताकर हम लोगों को आगाह करते हैं कि बिहार को आगे बढ़ना है तो जंलराज वाला राज नहीं लाना है. लोगों को सचेत करने में बुराई क्या है? अब देखिए जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर को किसने मारा था? सब लोग जानते हैं. अब उसी मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे के चुनाव प्रचार में क्या दीपंकर भट्टाचार्य जाएंगे? यह तो बिहार के लोगों को बताना पड़ेगा. उनमें इतनी हिम्मत है कि कहें कि चंद्रशेखर की हत्या शहाबुद्दीन ने नहीं की थी?

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सवाल : चुनाव में एनडीए खास कर भाजपा की लड़ाई किससे है?

लड़ाई गठबंधन से है. खास कर राजद से है. कांग्रेस भी उसी गठबंधन की हिस्सा है. हम जनता के आदेश से सत्ता में बैठे हैं. गांधी परिवार की खैरात के दम पर नहीं. हम एकजुट होकर मैदान में हैं. एक साथ प्रचार हो रहा, साझा चुनाव घोषणा पत्र जारी हुआ. सामूहिक रणनीति बन रही. जबकि, विपक्ष में पहले सीट और नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है. आधा दर्जन भर सीटों पर उनके बीच आपसी लड़ाई है.

सवाल : बिहार में मुसलमानों की आबादी 17 प्रतिशत है. आपके 101 में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया?

भाजपा ने चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. हम चुनाव लड़ते हैं तो यही देखा जाता है कि फलां उम्मीदवार जीतने की स्थिति में रहेगा या नहीं? जहां तक मुसलमानों की बात है तो हमारी पार्टी में सैयद शाहनवाज हुसैन हैं. वह हमारे बड़े नेता हैं. जाति या धर्म के आधार पर टिकट नहीं बांटे गये.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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