AI Health Screening India: गांव-गांव पहुंचेगा डिजिटल डॉक्टर! 30 सेकेंड में हार्ट-डायबिटीज का खतरा पकड़ लेगा एआई

एआई हेल्थ स्क्रीनिंग AI image
AI health screening India: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने की दिशा में AI आधारित नया सिस्टम चर्चा में है, जो सिर्फ 30 सेकेंड में हार्ट, BP और डायबिटीज जैसे जोखिमों की शुरुआती जांच कर रिपोर्ट देता है. यह डिजिटल डॉक्टर मरीज से सवाल-जवाब कर आगे की सलाह भी देता है. खासकर ग्रामीण इलाकों में यह तकनीक तेज, सस्ती और सुलभ इलाज की राह खोल सकती है.
AI Health Screening India: भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को तेज, सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में जियो आरोग्य की एआइ-इनेबल प्राइमरी केयर पहल चर्चा में है. इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए महज 30 सेकेंड में स्वास्थ्य जांच का परिणाम उपलब्ध कराया जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित यह सिस्टम मरीज के ‘फेस रिकॉग्नाइजेशन’ करके विभिन्न स्वास्थ्य संकेतकों का त्वरित विश्लेषण कर संभावित जोखिमों की पहचान करता है और प्राथमिक सलाह भी देता है. एआइ समिट में आयोजित एक स्वास्थ्य तकनीक प्रदर्शनी में जियो आरोग्य के डेमो में देखा गया कि स्क्रीन पर ‘स्वास्थ्य परिक्षण’ के तहत हार्ट एज, वेलनेस स्कोर और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर तत्काल प्रदर्शित हो रहे थे. सिस्टम ने 30 सेकेंड के भीतर पल्स रेट, ब्लड प्रेशर, वैस्कुलर रिगिडिटी, हार्ट रेट वेरिएबिलिटी और हेमोग्लोबिन ए1सी जैसे संकेतकों का विश्लेषण कर रिपोर्ट जारी की.
एक रिपोर्ट का यह रहा विश्लेषण
एक रिपोर्ट में जहां पल्स रेट 102 बीपीएम को ‘रैपिड’ दिखाया गया, वहीं ब्लड प्रेशर 115/72 mmHg को ‘नॉर्मल’ श्रेणी में रखा गया. इसी तरह हार्ट रेट वेरिएबिलिटी 64 ms और HbA1c 5.7 प्रतिशत को सामान्य बताया गया. हालांकि लिपिड प्रोफाइल में टोटल कोलेस्ट्रॉल (5.3 mmol/L), ट्राइग्लिसराइड्स (1.7 mmol/L) और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (3.1 mmol/L) को ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में दिखाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि एआइ सिस्टम संभावित हृदय जोखिमों को तुरंत चिन्हित कर सकता है.
कैसे काम करता है सिस्टम
जियो आरोग्य का एआइ प्लेटफॉर्म बायोमेट्रिक सेंसर और एल्गोरिदम के जरिये शरीर से प्राप्त डाटा का विश्लेषण करता है. यह तकनीक मशीन लर्निंग मॉडल पर आधारित है, जो बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य डाटा से प्रशिक्षित है. सिस्टम न केवल वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करता है, बल्कि ‘हार्ट एज’ जैसी अवधारणा के जरिए व्यक्ति की जैविक उम्र और हृदय स्वास्थ्य का तुलनात्मक विश्लेषण भी प्रस्तुत करता है. रिपोर्ट के साथ ही स्क्रीन पर ‘रिकमेंडेशन’ सेक्शन में परामर्श भी दिया जाता है. यदि किसी पैरामीटर में जोखिम पाया जाता है, तो सामान्य चिकित्सक से विस्तृत जांच कराने की सलाह दी जाती है. यह रिपोर्ट आगे जियो-डॉक्टर के पास चला जाता है.
ग्रामीण भारत के लिए वरदान
एआइ समिट में जियो आरोग्य टीम के सदस्य देवांशु कुमार सिंह कहते हैं कि इस तरह की एआइ-आधारित प्राथमिक जांच प्रणाली ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है. 30 सेकेंड में मिलने वाली प्रारंभिक रिपोर्ट से मरीजों की स्क्रीनिंग आसान होगी और गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा. 30 सेकेंड में प्रारंभिक जांच के बाद जियो डॉक्टर, जो एआइ आधारित मशीन है, जो डॉक्टर के तरह बात करता है. इससे पहले ही प्रारंभिक रिपोर्ट डॉक्टर के पास चली जाती है. इसका जवाब एआइ देता है. कुछ सवाल-जवाब भी मरीजों से होता है. इसके बाद कुछ अलग जांच की सलाह भी दी जायेगी. जांच के सभी महत्वपूर्ण उपकरण मौजूद रहेंगे. इसके बाद जांच रिपोर्ट में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर के पास चली जायेगी. इसके बाद जांच के आधार पर बिमारियों का इलाज शुरू हो जायेगा. मरीज पांच मिनट में अपना इलाज करा लेगा. केंद्र सरकार जल्द ही इस एआइ-आरोग्य की घोषणा करेगी. इसमें आशा वर्कर्स के साथ पारा मेडिकल स्टाफ को भी इस सिस्टम के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा.
किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा की दिशा में कदम
भारत में हृदय रोग, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए त्वरित स्क्रीनिंग अत्यंत महत्वपूर्ण है. जियो आरोग्य की यह पहल डिजिटल हेल्थ मिशन और ‘टेक्नोलॉजी फॉर ऑल’के लक्ष्य को मजबूती देती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एआइ आधारित प्राथमिक जांच अंतिम निदान का विकल्प नहीं है, बल्कि यह एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग टूल है, जो समय और संसाधन दोनों की बचत करता है. सही समय पर चेतावनी और डॉक्टर से परामर्श की सलाह देकर यह प्रणाली स्वास्थ्य जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है. जियो टीम में मौजूद डॉक्टर की टीम का कहना है कि जियो आरोग्य का एआइ-इनेबल प्राइमरी केयर मॉडल भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक अहम कदम है, जो ‘स्मार्ट हेल्थकेयर’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की क्षमता रखता है.
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लेखक के बारे में
By Saurabh Poddar
मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.
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