ALERT: हेडफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल करनेवालों के लिए जरूरी खबर, पढ़ें नयी रिसर्च की रिपोर्ट

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 18 Nov 2022 8:15 PM

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एक नये शोध से पता चला है कि हेडफोन और ईयरबड के इस्तेमाल और तेज म्यूजिक सुनने से 1 अरब से ज्यादा किशोर और युवा बहरेपन के खतरे की जद में हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दुनियाभर में 43 करोड़ से अधिक लोग बहरेपन की शिकायतों से पीड़ित हैं.

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New Research on Deafness : हमने अपनी मॉडर्न लाइफस्टाइल में कुछ ऐसी चीजों को जगह दे डाली है, जिनके बिना मानो हमारी जिंदगी की गाड़ी ही रुक जाए. इन्हीं में से एक है हेडफोन और ईयरबड. आजकल इनपर हजारों रुपये आसानी से खर्च कर दिये जा रहे हैं. लेकिन नये रिसर्च ने इसे लेकर खतरे की घंटी बजायी है. हाल ही सामने आये एक नये शोध से पता चला है कि हेडफोन और ईयरबड के इस्तेमाल और तेज म्यूजिक सुनने से 1 अरब से ज्यादा किशोर और युवा बहरेपन के खतरे की जद में हैं.

WHO के आंकड़े कहते हैं…

विश्व स्वास्थ्य संगठन, यानी डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि दुनियाभर में 43 करोड़ से अधिक लोग बहरेपन की शिकायतों से पीड़ित हैं. ऐसे में नये शोध के मद्देनजर शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खतरे को देखते हुए, सुरक्षित सुनने की प्रथाओं को बढ़ावा देकर वैश्विक बहरापन रोकथाम को प्राथमिकता देने के लिए सरकारों, उद्योग और नागरिक समाज की तत्काल आवश्यकता है.

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पार्टी का लाउड म्यूजिक लेवल खतरनाक

बीएमजे ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, खराब नियामक प्रवर्तन के बीच स्मार्टफोन, हेडफोन और ईयरबड्स जैसे व्यक्तिगत सुनने वाले उपकरणों (पीएलडी) के उपयोग के साथ-साथ तेज संगीत वाले स्थानों पर उपस्थिति के कारण युवाओं पर खास तौर पर खतरा ज्यादा है.

कितना वॉल्यूम आपके कानों के लिए घातक?

पहले प्रकाशित शोध के मुताबिक, पीएलडी उपयोगकर्ता अक्सर 105 डीबी तक की उच्च मात्रा का चयन करते हैं, जबकि मनोरंजन स्थलों पर औसत साउंड लेवल 104 से 112 डीबी, जो स्वीकार्य स्तर (वयस्कों के लिए 80 डीबी, बच्चों के लिए 75 डीबी) से अधिक होता है. रिसर्च के अनुसार, डेटा के एक विश्लेषण में पीएलडी का उपयोग और जोरदार मनोरंजन स्थलों पर उपस्थिति दुनियाभर में किशोरों और युवाओं में क्रमश: 24 प्रतिशत और 48 प्रतिशत असुरक्षित श्रवण प्रथाओं से जुड़ी हुई है.

दुनिया भर में कितने यूथ और टीनेजर्स को खतरा

इन आंकड़ों के आधार पर, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दुनियाभर में क्रमश: 0.67 और 1.35 अरब किशोर और युवा वयस्क हैं, जिन्हें सुनने की क्षमता कम होने का खतरा हो सकता है. इस रिसर्च टीम में अमेरिका के साउथ कैरोलाइना मेडिकल विश्वविद्यालय के शोधकर्ता शामिल थे. इस शोध में 33 अध्ययनों का इस्तेमाल किया गया था. रिसर्च में 12 से 35 साल के 19,046 लोगों ने हिस्सा लिया.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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