सुनील सिंह को टिकट देने पर राजद में बवाल, शिवचंद्र राम ने दिया राष्ट्रीय पद से इस्तीफा
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 08 Jun 2026 6:08 PM
पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम
Bihar MLC Chunav: बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद द्वारा सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने SC/ST प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
Bihar MLC Chunav: राजद के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने पार्टी के अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. बिहार विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया.
बिहार विधान परिषद की सीटों के लिए राजद ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. सोमवार को सुनील सिंह ने पार्टी की ओर से नामांकन भी दाखिल कर दिया. इसके बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी खुलकर सामने आ गई. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि यह फैसला उन्होंने भारी मन से लिया है.
पार्टी से नहीं, पद से दिया इस्तीफा
शिवचंद्र राम ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं. उनका इस्तीफा केवल संगठन के पद से दिया है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की विचारधारा और राजद के प्रति उनका विश्वास पहले की तरह बना हुआ है. लेकिन अपने समाज की भावनाओं और कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को देखते हुए अब इस पद पर बने रहना उनके लिए संभव नहीं रह है.
उन्होंने कहा कि वर्षों से वह पार्टी और सामाजिक न्याय की सोच के साथ जुड़े रहे हैं. राजनीति को उन्होंने कभी पद पाने का जरिया नहीं माना, बल्कि समाज के अधिकार और सम्मान की लड़ाई का माध्यम समझा.
समाज के बीच जाकर किया पार्टी का काम- राम
अपने पत्र में शिवचंद्र राम ने लिखा कि उन्होंने गांव से लेकर जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया. विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने दलित, वंचित और रविदास समाज के लोगों के बीच जाकर पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि हजारों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत कर पार्टी को मजबूत बनाया. समाज के लोगों को उम्मीद थी कि उनकी भागीदारी और योगदान का सम्मान किया जाएगा.
आहत हैं शिवचंद्र राम
शिवचंद्र राम ने कहा कि हाल के घटनाक्रम ने उन्हें अंदर तक दुखी कर दिया है. जहां भी वह जाते हैं, लोग उनसे सवाल पूछते हैं. समाज के लोगों की नाराजगी और निराशा देखकर उन्हें काफी पीड़ा होती है. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी पद का मोह नहीं है. पद मिले या न मिले, इससे उनके जीवन का उद्देश्य नहीं बदलता. लेकिन जिस समाज ने उन पर भरोसा किया, उसकी भावनाओं को अनदेखा करना उनके लिए आसान नहीं है.
चार दिनों से नहीं सो पाए
शिवचंद्र राम ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से वह मानसिक रूप से परेशान हैं. उन्होंने कहा कि पिछले चार रात से वह ठीक से सो भी नहीं पाए हैं. समाज की उम्मीदों और लोगों के सवालों ने उन्हें भीतर तक परेशान कर दिया है. उनका कहना है कि वह लगातार सोच रहे हैं कि उन लोगों को क्या जवाब दें जिन्होंने उन पर भरोसा किया था और बेहतर प्रतिनिधित्व की उम्मीद लगाई थी.
प्रतिनिधित्व को लेकर उठाया सवाल
अपने इस्तीफे में शिवचंद्र राम ने राजद नेतृत्व से मांग की है कि विधान परिषद और राज्यसभा जैसी संस्थाओं में दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल नारे या समर्थन तक सीमित नहीं होना चाहिए. समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व भी मिलना चाहिए.
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लालू-राबड़ी के प्रति जताया सम्मान
शिवचंद्र राम ने अपने पत्र में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पार्टी नेतृत्व का आभार भी जताया. उन्होंने कहा कि संगठन में काम करने का अवसर देने के लिए वह नेतृत्व के प्रति सम्मान रखते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई नाराजगी या कटुता नहीं है. उनका फैसला पूरी तरह समाज की भावनाओं और अपने नैतिक दायित्व को देखते हुए लिया गया है.
शिवचंद्र राम ने कहा कि सामाजिक न्याय, सम्मान और बराबरी की लड़ाई उनके जीवन का उद्देश्य रही है और आगे भी बनी रहेगी. वह पद छोड़ सकते हैं, लेकिन समाज के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष करना नहीं छोड़ेंगे.
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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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