Bihar MLC Chunav: कुर्सी जाने का काउंटडाउन शुरू? जानें कब तक मंत्री बने रह सकते हैं दीपक प्रकाश

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 08 Jun 2026 4:51 PM

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दीपक प्रकाश

Bihar MLC Chunav: बिहार एमएलसी चुनाव की फाइनल लिस्ट आते ही पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी का काउंटडाउन शुरू हो गया है. एनडीए के सभी उम्मीदवारों के पर्चा भरने के बाद दीपक प्रकाश रेस से बाहर हो गए हैं.

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Bihar MLC Chunav: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए के सभी 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिया है. इसके बाद बिहार की राजनीति में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बार उन्हें एनडीए की ओर से एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया गया. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या वह आगे भी मंत्री पद पर बने रह पाएंगे या नहीं.

मंत्री पद को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रह चुके उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. वह इस समय बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं. लेकिन फिलहाल वह न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. ऐसे में संवैधानिक नियमों को लेकर उनकी स्थिति पर चर्चा शुरू हो गई है.

संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है. यदि तय समय के अंदर सदस्यता नहीं मिलती है तो मंत्री पद छोड़ना पड़ता है.

मई में दोबारा मिली थी मंत्री पद की जिम्मेदारी

दीपक प्रकाश ने पहले भी मंत्री पद की शपथ ली थी. उस कार्यकाल के समाप्त होने के बाद मई महीने में बने नए मंत्रिमंडल में उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया. इसी वजह से छह महीने की नई समयसीमा की गणना मई से मानी जा रही है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में वह नवंबर तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं. लेकिन इसके बाद उनके सामने संवैधानिक चुनौती खड़ी हो सकती है.

एमएलसी चुनाव में नहीं मिला मौका

विधान परिषद की जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, वहां एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के नाम पहले ही तय कर दिए हैं. भाजपा ने चार उम्मीदवार उतारे हैं. जदयू ने भी चार नेताओं को मैदान में भेजा है. एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रा) के हिस्से में गई है.

ऐसे में एनडीए की ओर से सभी नौ सीटों पर उम्मीदवार तय हो चुके हैं. दीपक प्रकाश का नाम इनमें शामिल नहीं है. यही कारण है कि उनके लिए फिलहाल विधान परिषद पहुंचने का रास्ता बंद नजर आ रहा है.

दूसरी तरफ दसवीं सीट पर राजद ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक हलकों में अब दीपक प्रकाश की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा बढ़ गई है.

नवंबर के बाद क्या हो सकता है?

राजनीतिक और संवैधानिक जानकारों का मानना है कि यदि नवंबर तक दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो उनके लिए मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं होगा. नियमों के तहत उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है.

फिलहाल निकट भविष्य में विधान परिषद की कोई नई सीट खाली होती भी नहीं दिख रही है. ऐसे में उनके सामने सदस्य बनने के ऑप्शन कम नजर आ रहे हैं.

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इस्तीफे की चर्चा भी तेज

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि यदि समय रहते कोई रास्ता नहीं निकलता है तो दीपक प्रकाश नैतिक आधार पर स्वयं भी मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. अभी तक इस तरह की किसी संभावना पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. सरकार, एनडीए या राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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