Bihar MLC Chunav: कुर्सी जाने का काउंटडाउन शुरू? जानें कब तक मंत्री बने रह सकते हैं दीपक प्रकाश

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दीपक प्रकाश

Bihar MLC Chunav: बिहार एमएलसी चुनाव की फाइनल लिस्ट आते ही पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी का काउंटडाउन शुरू हो गया है. एनडीए के सभी उम्मीदवारों के पर्चा भरने के बाद दीपक प्रकाश रेस से बाहर हो गए हैं.

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Bihar MLC Chunav: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए के सभी 9 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिया है. इसके बाद बिहार की राजनीति में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बार उन्हें एनडीए की ओर से एमएलसी उम्मीदवार नहीं बनाया गया. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या वह आगे भी मंत्री पद पर बने रह पाएंगे या नहीं.

मंत्री पद को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रह चुके उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. वह इस समय बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं. लेकिन फिलहाल वह न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. ऐसे में संवैधानिक नियमों को लेकर उनकी स्थिति पर चर्चा शुरू हो गई है.

संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है. यदि तय समय के अंदर सदस्यता नहीं मिलती है तो मंत्री पद छोड़ना पड़ता है.

मई में दोबारा मिली थी मंत्री पद की जिम्मेदारी

दीपक प्रकाश ने पहले भी मंत्री पद की शपथ ली थी. उस कार्यकाल के समाप्त होने के बाद मई महीने में बने नए मंत्रिमंडल में उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया. इसी वजह से छह महीने की नई समयसीमा की गणना मई से मानी जा रही है.

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में वह नवंबर तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं. लेकिन इसके बाद उनके सामने संवैधानिक चुनौती खड़ी हो सकती है.

एमएलसी चुनाव में नहीं मिला मौका

विधान परिषद की जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है, वहां एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के नाम पहले ही तय कर दिए हैं. भाजपा ने चार उम्मीदवार उतारे हैं. जदयू ने भी चार नेताओं को मैदान में भेजा है. एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रा) के हिस्से में गई है.

ऐसे में एनडीए की ओर से सभी नौ सीटों पर उम्मीदवार तय हो चुके हैं. दीपक प्रकाश का नाम इनमें शामिल नहीं है. यही कारण है कि उनके लिए फिलहाल विधान परिषद पहुंचने का रास्ता बंद नजर आ रहा है.

दूसरी तरफ दसवीं सीट पर राजद ने सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है. नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राजनीतिक हलकों में अब दीपक प्रकाश की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा बढ़ गई है.

नवंबर के बाद क्या हो सकता है?

राजनीतिक और संवैधानिक जानकारों का मानना है कि यदि नवंबर तक दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो उनके लिए मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं होगा. नियमों के तहत उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है.

फिलहाल निकट भविष्य में विधान परिषद की कोई नई सीट खाली होती भी नहीं दिख रही है. ऐसे में उनके सामने सदस्य बनने के ऑप्शन कम नजर आ रहे हैं.

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इस्तीफे की चर्चा भी तेज

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि यदि समय रहते कोई रास्ता नहीं निकलता है तो दीपक प्रकाश नैतिक आधार पर स्वयं भी मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. अभी तक इस तरह की किसी संभावना पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है. सरकार, एनडीए या राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से भी इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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परितोष शाही

लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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