DSP बने आकाश दीप और मुकेश कुमार को मिलेगी इतनी सैलरी, बिना BPSC परीक्षा खिलाड़ियों को कैसे मिलती है नौकरी? जानिए पूरा नियम

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आकाश दीप और मुकेश कुमार को नियुक्ति पत्र देते सीएम सम्राट

आकाश दीप और मुकेश कुमार को नियुक्ति पत्र देते सीएम सम्राट

Bihar DSP Salary: भारतीय क्रिकेटर आकाश दीप और मुकेश कुमार को बिहार सरकार ने DSP नियुक्त किया है. इसके बाद युवाओं के मन में सवाल उठ रहा है कि खिलाड़ियों को बिना BPSC परीक्षा दिए सरकारी नौकरी कैसे मिलती है और उन्हें कितनी सैलरी मिलती है. आइए आसान भाषा में पूरा नियम समझते हैं.

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Bihar DSP Salary: भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज आकाश दीप और मुकेश कुमार को बिहार सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया है. दोनों खिलाड़ियों को विशेष समारोह में नियुक्ति पत्र भी सौंप दिया गया.

इसके बाद युवाओं के मन में कई सवाल उठने लगे हैं. क्या हर खिलाड़ी सीधे DSP बन सकता है? क्या इसके लिए BPSC की परीक्षा देनी होती है? खेल कोटा क्या है? आइए आसान भाषा में पूरी बात समझते हैं.

आकाश दीप और मुकेश कुमार को DSP क्यों बनाया गया?

दोनों खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए बिहार का नाम भी रोशन किया.

बिहार सरकार की खेल नीति के तहत ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान है, जिन्होंने खेल के माध्यम से राज्य और देश का गौरव बढ़ाया हो. इसी नीति के तहत दोनों को DSP बनाया गया है.

क्या हर खिलाड़ी सीधे DSP बन सकता है?

नहीं, सिर्फ किसी खेल में हिस्सा लेने या जिला स्तर पर खेलने से DSP की नौकरी नहीं मिलती. यह सुविधा केवल उन खिलाड़ियों को मिलती है, जिन्होंने राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो. सरकार खिलाड़ियों की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने के बाद ही नियुक्ति का फैसला करती है.

क्या है 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना?

बिहार सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए 'मेडल लाओ, नौकरी पाओ' योजना चला रही है. इस योजना के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता दी जाती है. सरकार पिछले दो वर्षों में करीब 180 खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में नौकरी दे चुकी है.

खेल कोटा क्या होता है?

खेल कोटा एक विशेष व्यवस्था है. इसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी नौकरियों, शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाओं में प्राथमिकता दी जाती है. आकाश दीप और मुकेश कुमार की नियुक्ति भी इसी खेल कोटा के तहत हुई है.

खिलाड़ी DSP कैसे बन सकता है?

अगर कोई खिलाड़ी भविष्य में DSP जैसी नौकरी पाना चाहता है, तो उसे लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

इसके लिए उसे जिला स्तर से शुरुआत करनी होगी. राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनानी होगी. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना होगा. मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन और पदक हासिल करने होंगे. जितनी बड़ी उपलब्धि होगी, सरकारी नौकरी मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी.

क्या BPSC परीक्षा देनी पड़ती है?

सामान्य तौर पर बिहार में DSP बनने के लिए BPSC की परीक्षा पास करनी पड़ती है. इसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू शामिल होते हैं. लेकिन खेल कोटा से नियुक्त खिलाड़ियों को इस सामान्य भर्ती प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता. उनकी नियुक्ति उनकी खेल उपलब्धियों के आधार पर की जाती है.

पढ़ाई कितनी जरूरी है?

खेल कोटा से नियुक्ति होने के बावजूद निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करना जरूरी होता है. आमतौर पर DSP स्तर के पद के लिए स्नातक (Graduation) की डिग्री आवश्यक मानी जाती है. नियुक्ति संबंधित विभाग के नियमों के अनुसार होती है.

सरकार खिलाड़ियों का चयन कैसे करती है?

सरकार सबसे पहले खिलाड़ी की उपलब्धियों की जांच करती है. यह देखा जाता है कि खिलाड़ी ने किस स्तर की प्रतियोगिता खेली है, कौन-कौन से पदक जीते हैं और क्या उसने भारत या बिहार का प्रतिनिधित्व किया है.

इसके बाद खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण सूची तैयार करते हैं. दस्तावेजों की जांच और मंजूरी के बाद नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है.

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DSP बनने पर कितनी मिलती है सैलरी?

बिहार पुलिस में DSP गजटेड अधिकारी का पद होता है.

सातवें वेतन आयोग के अनुसार शुरुआती मूल वेतन लगभग 53,100 रुपये प्रतिमाह होता है. महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य सुविधाएं अलग से मिलती हैं. कुल मिलाकर शुरुआती मासिक आय 80 हजार से 1 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है.

क्या नियुक्ति के बाद ट्रेनिंग भी होती है?

हां, खेल कोटा से नियुक्त खिलाड़ियों को भी पुलिस विभाग के सभी नियमों का पालन करना होता है. उन्हें पुलिस प्रशिक्षण, मेडिकल जांच और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं. इसके बाद ही वे नियमित रूप से अपनी जिम्मेदारी संभालते हैं.

खिलाड़ियों को और क्या सुविधाएं मिलती हैं?

सरकार नौकरी के साथ-साथ खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता भी देती है. इस बार 637 खिलाड़ियों को खेल छात्रवृत्ति योजना के तहत चयन पत्र दिए जाएंगे. इन योजनाओं के जरिए प्रशिक्षण, खेल सामग्री, पोषण और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए हर साल 3 लाख से 20 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है.

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अभिनंदन पांडेय

लेखक के बारे में

By अभिनंदन पांडेय

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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