अमेरिका-ईरान जंग पर हुआ सीजफायर, क्यों अगले 14 दिन पिछले 39 से ज्यादा अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की तस्वीर.
US-Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच 39 दिनों से चल रही जंग पर फिलहाल 14 दिनों के लिए ब्रेक लग गया है. मंगलवार देर रात हुए इस सीजफायर समझौते के बाद सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोल दिया गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मेडिएशन से हुए इस समझौते ने डूबती ग्लोबल इकोनॉमी को संजीवनी दी है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि पिछले 39 दिनों के मुकाबले आने वाले 14 दिन दुनिया के लिए कहीं ज्यादा अहम होने वाले हैं.
US-Iran Ceasefire: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमलों को 2 हफ्ते के लिए रोकने का फैसला किया है, लेकिन शर्त यह है कि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह सुरक्षित रखेगा. पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ट्रंप ने अपनी डेडलाइन बढ़ाई और बदले में ईरान ने इस समुद्री रास्ते को खोलने का वादा किया.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अब ईरानी सेना की देखरेख में यहां से जहाज गुजर सकेंगे. इस बीच शुक्रवार से इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू होगी, जिसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं.
क्यों खास है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का रास्ता?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया का 25% समुद्री तेल और 20% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से होकर गुजरता है. 2025 में यहां से हर दिन औसतन 2 करोड़ बैरल तेल निकलता था. 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से यह रास्ता बंद था, जिससे करीब 1,500 जहाज ओमान और यूएई के तट पर फंस गए थे. इसी वजह से मार्च के बीच में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो पिछले साल के मुकाबले 50% ज्यादा थी.
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें कहा गया है कि वह ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ट्रैफिक जाम की समस्या सुलझाने में मदद करेंगे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा किया गया ट्वीट.
With the greatest humility, I am pleased to announce that the Islamic Republic of Iran and the United States of America, along with their allies, have agreed to an immediate ceasefire everywhere including Lebanon and elsewhere, EFFECTIVE IMMEDIATELY.
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) April 7, 2026
I warmly welcome the…
अगले 14 दिन क्यों हैं सबसे बड़े चैलेंज?
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल बुसैदी और यूरोपीय संघ की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे ‘नाजुक’ बताया है. ईरान ने अपनी 10 शर्तों में अमेरिका से सारे प्रतिबंध हटाने, अपनी फ्रीज संपत्ति वापस पाने और इलाके से अमेरिकी फौज हटाने की मांग की है. उधर, समझौते के बाद भी कुछ मिसाइलें दागी गई हैं, जिससे तनाव बना हुआ है. अगर इन 14 दिनों में बातचीत बेनतीजा रही, तो दुनिया फिर से बड़े संकट में फंस सकती है.
Iran's 10-point conditions that the US is fundamentally committed to: pic.twitter.com/JjzGtz3lwa
— Iran Embassy In Malaysia (@iraninmalaysia) April 8, 2026
तेल की कीमतों में गिरावट
सीबीएस न्यूज के मुताबिक, सीजफायर की खबर आते ही कच्चे तेल की कीमतों में 9% की भारी गिरावट आई और यह 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. शेयर बाजार में भी तेजी दिखी है. हालांकि, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब हर गुजरने वाले जहाज से 20 लाख डॉलर (करीब 18 करोड़ रुपये) की फीस वसूलने की तैयारी में है, जिसे वह ओमान के साथ बांटेगा. यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते पर एक नया ‘टोल टैक्स’ जैसा होगा.
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किसे मिला फायदा और किसे हुआ नुकसान?
ट्रंप ने इसे अमेरिका की ‘बड़ी जीत’ बताया है और दावा किया कि चीन ने भी ईरान को बातचीत के लिए मनाया. IEA के मुताबिक, चीन और भारत को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी क्योंकि होर्मुज से होने वाले कुल निर्यात का 44% हिस्सा इन्हीं दो देशों में आता है. दूसरी ओर इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों को भारी नुकसान हुआ है क्योंकि उनके पास तेल भेजने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था. फिलीपींस, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ी है. वहीं, इजराइल और सऊदी अरब जैसे देश इस डील से पूरी तरह खुश नहीं हैं.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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