स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने चली चाल, कुछ देशों को दी एंट्री; युद्ध रोकने के लिए रखी ये शर्त

Author Govind jee
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की एआई से बनाई गई इमेज.

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Strait Of Hormuz: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग अब समंदर के रास्ते दुनिया की टेंशन बढ़ा रही है. ईरानी डिप्टी विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने साफ कर दिया है कि ईरान रणनीतिक रूप से बेहद खास ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) से कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को गुजरने की परमिशन दे रहा है.

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Strait Of Hormuz: डिप्टी विदेश मंत्री ने उन देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन यह जरूर कहा कि जिन देशों ने ईरान पर हमले में साथ दिया है, उन्हें इस रास्ते से ‘सेफ पैसेज’ का फायदा नहीं मिलने दिया जाएगा. डिप्टी विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था.

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जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 28 माइन-बिछाने वाले जहाजों (mine-laying vessels) को तबाह कर दिया है. तख्त-रवांची के मुताबिक, यह पूरी तरह झूठ है. उन्होंने एएफपी से बातचीत में कहा कि ईरान अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए केवल सावधानी बरत रहा है और अपनी जमीन की रक्षा के लिए तैयार है.

युद्ध रोकने के लिए ईरान की शर्त, कहा- बार-बार नहीं सहेंगे हमला

ईरानी मंत्री ने पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले साल जून में युद्ध शुरू होने के 12 दिन बाद ही लड़ाई रुक गई थी, लेकिन 8-9 महीने बाद अमेरिका और इजरायल ने फिर से हमला कर दिया. मेहर न्यूज एजेंसी (Mehr) के मुताबिक, ईरान अब ऐसी गारंटी चाहता है कि उन पर दोबारा युद्ध न थोपा जाए. उन्होंने पड़ोसी देशों को पहले ही आगाह कर दिया था कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो ईरान की नजर में क्षेत्र के सभी अमेरिकी बेस और संपत्तियां जायज टारगेट होंगी.

मोजतबा खामेनेई के बयान पर दी सफाई

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा ईरान के लिए सबसे ऊपर है. उन्होंने कहा कि जहाजों को यहां से गुजरने के लिए ईरानी नौसेना के साथ तालमेल (कॉर्डिनेट) करना ही होगा. वहीं, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के उस बयान पर सफाई दी, जिसमें उन्होंने होर्मुज को ब्लॉक करने को एक ‘लीवर’ की तरह इस्तेमाल करने की बात कही थी. इरावानी ने 12 मार्च 2026 को साफ किया कि ईरान इस रास्ते को बंद नहीं करेगा, लेकिन अपनी सुरक्षा करना उनका बुनियादी हक है.

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दुनिया भर में तेल का संकट

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, इस तनाव ने इतिहास का सबसे बड़ा तेल सप्लाई शॉक पैदा कर दिया है. दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसके चलते तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्काई न्यूज से कहा कि अमेरिकी नेवी जरूरत पड़ने पर जहाजों को एस्कॉर्ट करेगी, जिस पर ईरान ने अब तक कोई सीधा जवाब नहीं दिया है.

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