गुमला के गिरजा टंगराटोली में पानी और आंगनबाड़ी की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी को निर्देश

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झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.

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Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला के गिरजा टंगराटोली गांव में खराब जलापूर्ति व्यवस्था और जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. अदालत ने उपायुक्त को तीन माह में सोलर जल टैंक दुरुस्त कराने और डीडीसी को आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत पर निर्णय लेने को कहा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला जिले के पालकोट प्रखंड स्थित गिरजा टंगराटोली गांव में पेयजल आपूर्ति और आंगनबाड़ी केंद्र की जर्जर स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने उपायुक्त, गुमला को सोलर आधारित जलापूर्ति प्रणाली की जांच कर उसे तीन माह के भीतर दुरुस्त कराने का निर्देश दिया है.

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जनहित याचिका में उठाए गए थे दो प्रमुख मुद्दे

जयंती मिंज की ओर से दायर जनहित याचिका में मुख्य रूप से दो मांगें रखी गई थीं. पहली मांग गिरजा टंगराटोली गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र भवन की मरम्मत और वहां स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की थी. दूसरी मांग गांव के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए खराब पड़ी जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने और अन्य वैकल्पिक स्रोत विकसित करने से संबंधित थी. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश पोद्दार और शशांक शेखर ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से एसी टू एजी पीयूष चित्रेश ने अदालत में दलीलें पेश कीं.

सोलर टैंक पहले से मौजूद, लेकिन बारिश से हुई क्षति

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गांव में पेयजल संकट को दूर करने के लिए पहले ही सोलर आधारित जल टैंक का निर्माण किया जा चुका है. हालांकि हाल में हुई बारिश और तेज आंधी के कारण सोलर प्लेटें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे जलापूर्ति ठप हो गई है. इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सोलर टैंक पहले से मौजूद है, तो उसकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है.

उपायुक्त को तीन महीने में मरम्मत सुनिश्चित करने का निर्देश

खंडपीठ ने गुमला के उपायुक्त को निर्देश दिया कि वे संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं की टीम को मौके पर भेजकर सोलर टैंक और उसकी कार्यप्रणाली की जांच कराएं. यदि यह पाया जाता है कि सोलर पैनल या अन्य कारणों से जलापूर्ति बाधित है, तो आवश्यक मरम्मत कराते हुए पेयजल आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल किया जाए. अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को तीन माह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है.

डीडीसी को आवेदन देने की छूट

आंगनबाड़ी केंद्र भवन की जर्जर स्थिति और वहां स्वच्छता सुविधाओं की कमी को लेकर अदालत ने याचिकाकर्ता को उप विकास आयुक्त (डीडीसी), गुमला के समक्ष आवेदन देने की स्वतंत्रता प्रदान की है. अदालत ने कहा कि यदि ऐसा आवेदन दिया जाता है, तो डीडीसी स्वयं गिरजा टंगराटोली स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण करेंगे और भवन की मरम्मत तथा आवश्यक स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में उचित समय के भीतर निर्णय लेंगे.

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निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निपटारा

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ता की पात्रता या अन्य पहलुओं पर विचार किए बिना केवल जनहित से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखते हुए निर्देश जारी किए जा रहे हैं. इन्हीं निर्देशों के साथ मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका संख्या 7431/2025 का निपटारा कर दिया. कभी-कभी अदालतों को यह याद दिलाना पड़ता है कि पानी और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाएं कोई विलासिता नहीं, बल्कि नागरिकों का अधिकार हैं.

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