ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की पत्नी जिंदा हैं, सरकारी मीडिया ने दी जानकारी

इमेज में पूर्व सुप्रीम लीडर खमेनेई की पत्नी मंसूर खोस्तेह बागेरजादेह.
Khamenei Wife Mansoureh Bagherzadeh Alive: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की पत्नी मंसूर खोस्तेह बागेरजादेह को लेकर दुनियाभर में चल रही अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है.
Khamenei Wife Mansoureh Bagherzadeh Alive: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स न्यूज’ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मंसूर खोस्तेह बागेरजादेह जीवित हैं. एजेंसी ने उन खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है जिनमें दावा किया गया था कि 28 फरवरी को हुए हवाई हमलों में उनकी मौत हो गई है. इन्हीं हमलों में उनके पति अली खामेनेई की मृत्यु हुई थी.
नए सुप्रीम लीडर के बयान से मिली मजबूती
मंसूर खोस्तेह के जीवित होने की पुष्टि तब और मजबूत हुई जब ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अपना पहला बड़ा लिखित बयान जारी किया. इस बयान में मुजतबा ने देश में सैन्य प्रतिरोध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद रखने की बात तो की, लेकिन अपनी मां के निधन का कोई जिक्र नहीं किया. आम तौर पर परिवार में किसी की मौत होने पर शोक व्यक्त किया जाता है, लेकिन ऐसा न होने से यह संकेत मिला कि वह जीवित हैं.
कैसे फैली थी भ्रम की स्थिति?
2 मार्च को तस्नीम और बीबीसी फारसी सहित कई मीडिया आउटलेट्स ने यह रिपोर्ट दी थी कि अस्पताल में भर्ती मंसूर खोस्तेह का निधन हो गया है. इन खबरों के बाद दुनिया भर के कई समाचार संस्थानों और विकिपीडिया तक ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी थी. अब सरकारी दावों के अनुसार, 28 फरवरी के हमलों के दौरान मंसूर खोस्तेह गंभीर रूप से घायल जरूर हुई थीं, लेकिन उनकी मृत्यु नहीं हुई है और वह मेडिकल देखरेख में हैं.
कौन हैं मंसूर खोस्तेह बागेरजादेह?
1947 में जन्मी मंसूर खोस्तेह बागेरजादेह 1964 में अली खमेनेई के साथ विवाह के बंधन में बंधी थीं. उन्होंने अपने चार दशक से अधिक के सार्वजनिक जीवन में खुद को हमेशा पर्दे के पीछे रखा और बहुत कम ही राजनीतिक कार्यक्रमों में नजर आईं. वह ईरान के सत्ताधारी कुलीन वर्ग की सबसे निजी शख्सियतों में से एक रही हैं.
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शुरू हुए इस युद्ध के बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खमेनेई ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि ईरान अपने नागरिकों की मौत का बदला लेगा. इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया गया है, जो दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए एक बेहद संवेदनशील रास्ता है. ईरान का कहना है कि अब समुद्री जहाजों को वहां से गुजरने के लिए ईरानी नौसेना से तालमेल बिठाना होगा.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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