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ईरान पर US-इजरायल ने खुलकर किया हमला, सऊदी ने पर्दे के पीछे से किया खेल, एमबीएस ने क्या किया?

Updated at : 01 Mar 2026 12:55 PM (IST)
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Saudi Arabia pushed US Israel Attack on Iran Report reveals MBS ideas

सऊदी अरब ने US इजरायल पर ईरान पर हमला करने के लिए दबाव डाला.

Saudi Arabia pushed US Israel Attack Iran: ईरान के ऊपर यूएस और इजरायल द्वारा हमला करने में सऊदी अरब का भी बड़ा हाथ है. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप के ऊपर दबाव डाला. उन्होंने कहा कि ईरान ताकतवर होता है, तो क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ेगी.

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Saudi Arabia pushed US Israel Attack Iran: ईरान के ऊपर हमला कैसे हुआ? जाहिर है सामने दिख रहा मंजर और शोर मचा रहे दो देश. इजरायल और अमेरिका. लेकिन पर्दे के पीछे से भी खेल हुआ.  शनिवार को ईरान पर किया गया हमला अमेरिका का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल का ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ हितों के एक दुर्लभ संगम का नतीजा बताया जा रहा है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के पीछे इजरायल और सऊदी अरब की लॉबिंग का बेजोड़ असर रहा.

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर संयुक्त हमले के लिए अमेरिका पर दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप ईरान पर हमला हुआ. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इस मामले से परिचित चार लोगों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हाल के हफ्तों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निजी तौर पर कई बार फोन किया, जबकि सार्वजनिक रूप से वे इस मुद्दे के समाधान के लिए ‘कूटनीतिक समर्थन’ की बात करते रहे. इसी दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका से ईरान पर हमले की मांग को लेकर अपनी लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक मुहिम जारी रखते रहे. इसे वे अपने देश के लिए अस्तित्वगत खतरा मानते हैं.

कई वर्षों तक ये दोनों क्षेत्रीय ताकतें ईरान के बढ़ते प्रभाव की छाया में ‘फ्रेनमीज’ (दोस्त भी, प्रतिद्वंद्वी भी) की तरह काम करती रहीं. इस पूरे घटनाक्रम का फ्रेम रहा: ‘दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त.’ रिपोर्ट में बताया गया है कि सऊदी अरब और इजरायल के संयुक्त प्रभाव ने ट्रंप को ईरान के नेतृत्व और सैन्य ढांचे के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई अभियान का आदेश देने में अहम भूमिका निभाई.  कुछ समय से दोनों देशों के बीच नजदीकी बढ़ रही थी, जिसमें चीन की बड़ी भूमिका थी, लेकिन सऊदी अरब हमेशा ईरान को अपना दुश्मन मानता रहा.

शनिवार को तेहरान में इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद धुआँ उठता हुआ. फोटो- ani

पिछले साल के अंत में सऊदी क्राउन प्रिंस अमेरिका भी गए थे, जहां उन्होंने ट्रंप से मुलाकात की थी. वहीं ट्रंप के दामाद और दोस्त जेरेड कुश्नर से भी एमबीएस ने मुलाकात की. हाल ही में इन दोनों की मुलाकात ईरान के सर्वोच्च नेताओं से भी जिनेवा में हुई, ऐसा लगा कि शायद बात बन जाएगी, लेकिन इस मुलाकात के 2 दिन के अंदर ही इजरायल और अमेरिका ने हमला कर दिया. एमबीएस ने ट्रंप प्रशासन को यह भरोसा दिलाया कि ईरान की बढ़ती ताकत अमेरिका और मिडिल ईस्ट के लिए खतरा है, जबकि यूएस का एसेसमेंट यह मानता था कि ईरान तात्कालिक खतरा नहीं है. 

वाशिंगटन पोस्ट का दावा है कि अमेरिका इसका एक डिप्लोमैटिक हल निकालना चाहता था, लेकिन एमबीएस ईरान पर हमला करने को लेकर अड़े रहे. उन्होंने इसके लिए इजरायल से भी बात की. नेतन्याहू ने भी ट्रंप पर प्रेशर बनाया. सऊदी अरब ने अमेरिका से यह वादा किया कि ईरान के जवाबी हमले की स्थिति में वह तेल की सप्लाई (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो सकता है) पर असर नहीं पड़ने देगा.  आखिरकार इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान के ऊपर 200 हवाई जहाजों से सैकड़ों टन विस्फोटकों से भरी मिसाइलें बरसा दीं. 

अयातोल्लाह अली खामेनेई. फोटो- एक्स.

अमेरिकी हमले में ईरानी नेतृत्व समाप्त

अमेरिका और इजरायल के इस अभियान के पहले ही घंटे में खामेनेई समेत कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की मौत हो गई. अमेरिका और इजरायल ने ईरान के नेतृत्व और सेना को निशाना बनाते हुए व्यापक हवाई अभियान चलाया, जिसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों, इजरायल और अन्य लक्ष्यों पर मिसाइल हमले किए. हालात अभी भी तेजी से बदल रहे हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह हमला ईरान की ओर से मौजूद ‘तत्काल खतरे’ को रोकने के लिए जरूरी था. ‘कार्रवाई से ताकत’ के जनादेश के साथ व्हाइट हाउस लौटे ट्रंप ने 37 साल पुराने खतरे को समाप्त करने का दावा किया.  

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खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है. देशभर में शोक और विरोध की खबरें सामने आ रही हैं. सर्वोच्च नेता के कार्यालय ने राष्ट्रीय शोक की अवधि घोषित की है; झंडे आधे झुके हैं और श्रद्धांजलि सभाओं की योजना बनाई जा रही है. देशभर में, लेकिन खासतौर पर तेहरान जैसे बड़े शहरों में अशांति रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

खामेनेई ने 1979 की इस्लामिक क्रांति के संस्थापक रूहोल्लाह खोमैनी के बाद सत्ता संभाली थी. वह 1989 से पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ अडिग रुख के साथ ईरान का नेतृत्व करते रहे. 86 वर्षीय अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य व राजनीतिक नेताओं की मौत को प्रभावी रूप से ‘दूसरी क्रांति’ के अंत के रूप में देखा जा रहा है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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