पुतिन के मंत्री ने जिनपिंग से मिलाया हाथ; बोले- खाड़ी देशों का संकट सुलझना मुश्किल, पश्चिमी देशों पर बरसे

Published by :Govind Jee
Published at :15 Apr 2026 12:14 PM (IST)
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Lavrov Xi Jinping Meeting

तस्वीर में बाएं से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

Lavrov Xi Jinping Meeting: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक बेहद खास मुलाकात की है. इस मीटिंग के बाद लावरोव ने मिडिल ईस्ट और खाड़ी देशों के हालातों पर बड़ी बात कही. उन्होंने साफ कर दिया कि रूस और चीन इस इलाके के मामलों में पीछे नहीं हटेंगे और अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे.

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Lavrov Xi Jinping Meeting: लावरोव ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र का संकट कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी उलझी हुई गांठ है जिसे खोलना बहुत मुश्किल होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इस संकट को जबरदस्ती खत्म करने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी.

गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे पर रूस-चीन एक साथ

लावरोव ने जोर देकर कहा कि दुनिया का ध्यान गाजा, फिलिस्तीन और वेस्ट बैंक से नहीं हटना चाहिए. उनके मुताबिक, इन मुद्दों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर रूस और चीन की सोच एक जैसी है और दोनों देश मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि इन क्षेत्रों की समस्याओं को हाशिए पर न धकेला जाए.

पश्चिमी देशों की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल

रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका और यूरोप की जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश आज भी अपनी पुरानी सोच के साथ दुनिया पर राज करना चाहते हैं. लावरोव के अनुसार, पिछले 500 सालों से दुनिया को अपने हिसाब से चलाने वाले ये देश अब भी नए तरीकों से दूसरों का फायदा उठाकर खुद आगे बढ़ना चाहते हैं. उन्होंने इसे आधुनिक गुलामी जैसा बताते हुए कहा कि रूस, चीन और दुनिया के ज्यादातर देश पश्चिमी देशों की इस मनमानी को स्वीकार नहीं करेंगे.

यूरोप और एशिया में बढ़ता तनाव

मीटिंग के दौरान लावरोव ने बताया कि नाटो (NATO) की वजह से यूरोप में तनाव के नए केंद्र बन रहे हैं. उन्होंने यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की कोशिशों और यूरोपीय संघ के सैन्यीकरण पर भी सवाल उठाए. लावरोव के मुताबिक, वाशिंगटन और यूरोपीय देशों के बीच आपसी मतभेद बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, उन्होंने सेंट्रल एशिया, साउथ काकेशस और दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे ताइवान जलडमरूमध्य और उत्तर कोरिया) में बढ़ते तनाव के लिए भी पश्चिमी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया.

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रूस-चीन संबंध दुनिया के लिए स्थिरता का जरिया

लावरोव ने अपने बयान में कहा कि रूस और चीन के बीच के मजबूत रिश्ते अंतरराष्ट्रीय हालातों को स्थिर रखने का काम करते हैं. उन्होंने बताया कि यूक्रेन से लेकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक जो भी तनाव बढ़ रहा है, उसका सीधा असर देशों के आपसी संबंधों पर पड़ता है.

ऐसे समय में रूस, चीन, ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों की भूमिका दुनिया के लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है. लावरोव ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि उनके और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत से यह साफ है कि दोनों देश वैश्विक राजनीति में मजबूती से खड़े हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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