पहलगाम हमले का पाकिस्तान कनेक्शन; आतंकियों से मिले फोन, 4 साल रहे बंद; हमले से पहले हुए एक्टिव; रिपोर्ट
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 01 Jun 2026 11:20 AM
पहलगाम आतंकी हमले के बाद जांच करते आर्मी जवान. फोटो- PTI.
Pahalgam Terror Attack Pakistan Connection: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच में सामने आया है कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन पाकिस्तान में आयात की गई खेप से जुड़े थे. ये फोन 2021 से बंद पड़े था और हमले से ठीक पहले सक्रिय किए गए.
Pahalgam Terror Attack Pakistan Connection: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को एक अहम सुराग मिला है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन पाकिस्तान में आयात की गई खेप का हिस्सा थे. जांच में यह भी सामने आया है कि इनमें से एक फोन 2021 में पाकिस्तान पहुंचा था, लेकिन उसे हमले से पहले कभी चालू नहीं किया गया. इस नए खुलासे से एक बार फिर पाकिस्तान की काली करतूतों का कच्चा चिट्ठा खुलने लगा है.
मुठभेड़ के बाद मिले थे दोनों मोबाइल
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन इलाके में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने हमले में शामिल आतंकियों की तलाश शुरू की. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के दाचीगाम जंगल क्षेत्र स्थित मुलनार महादेव इलाके में हुई मुठभेड़ में फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी मारे गए. मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो शाओमी रेडमी सीरीज के मोबाइल फोन बरामद हुए. जांच में पता चला कि इनमें एक नारंगी रंग का रेडमी 9टी और दूसरा काले रंग का रेडमी नोट 12 था.
2021 में पाकिस्तान पहुंचा था पहला फोन
जांच एजेंसियों ने जब शाओमी ग्लोबल से फोन की जानकारी मांगी तो पता चला कि रेडमी 9टी पाकिस्तान की कंपनी टेक सिरात प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इंपोर्ट की गई एक खेप का हिस्सा था. दस्तावेजों के अनुसार, यह खेप 1 जनवरी 2021 को पाकिस्तान पहुंची थी. सिरत नाम की यह कंपनी कराची के क्लिफ्टन इलाके से रजिस्टर्ड है. यह वही स्थान है, जहां दाऊद इब्राहिम के ठिकानों का पता चला था.
डिलीवरी का पता कराची स्थित फैसल बैंक के मुख्यालय का बताया गया. इंपोर्ट से जुड़े रिकॉर्ड में फैसल बैंक का नाम लॉजिस्टिक और वित्तीय सहयोगी के रूप में दर्ज था. जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि बड़े आयातों में बैंक द्वारा वित्तीय गारंटी या लेटर ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराना सामान्य प्रक्रिया होती है.
हालांकि, दस्तावेजों से यह संकेत मिला कि फोन उसी खेप का हिस्सा था, जहां से बाद में उसे अलग कर आतंकी संगठन तक पहुंचाया गया. फिलहाल यह साफ नहीं है कि इसे चुराकर आतंकियों तक पहुंचाया गया, या फिर जानबूझकर किया गया.
चार साल तक बंद रहा मोबाइल
जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि 2021 में पाकिस्तान पहुंचने के बाद यह मोबाइल कभी सक्रिय नहीं हुआ था. अधिकारियों के अनुसार, फोन पहली बार पहलगाम हमले की तैयारी के दौरान चालू किया गया. एक जांच अधिकारी के मुताबिक, परिस्थितियां इस ओर इशारा करती हैं कि फोन को शुरुआत से ही किसी विशेष उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखकर रखा गया था और बाद में आतंकियों को सौंपा गया.
दूसरे फोन का भी मिला पाकिस्तान से संबंध
आतंकियों के पास मिला दूसरा मोबाइल रेडमी नोट 12 था. जांच में पता चला कि यह फोन पाकिस्तान की एयर लिंक कम्युनिकेशंस लिमिटेड द्वारा आयात किया गया था, जिसका कार्यालय लाहौर के न्यू गार्डन टाउन इलाके में स्थित है. यह फोन भी लंबे समय तक बंद रहा और हमले से पहले ही पहली बार सक्रिय किया गया था.
फोन से क्या मिला?
जांचकर्ताओं को इन मोबाइल फोन से कोई कॉल रिकॉर्ड या संदेश नहीं मिले. अधिकारियों के अनुसार, आतंकी लंबी दूरी की रेडियो संचार तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट पर निर्भर हुए बिना संपर्क किया जा सकता है.
हालांकि दोनों फोन से कुछ तस्वीरें और नक्शे बरामद किए गए हैं. इनमें पहलगाम के बैसरन मैदान और आसपास के इलाकों के नक्शे शामिल हैं. जांच के दौरान एक तस्वीर भी मिली, जिसमें 30 मार्च 2025 को लगाया गया एक टेंट दिखाई देता है. तस्वीर से संकेत मिलता है कि आतंकी हमले से कई सप्ताह पहले इलाके में डेरा डाल चुके थे. टेंट के पास एक स्टोव भी नजर आया, जबकि उसका स्थान ऐसी ऊंचाई पर था जहां से सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता था.
फैसल बैंक का नाम पहले भी आया था चर्चा में
जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे फैसल बैंक को सीधे तौर पर पहलगाम हमले से जोड़ा जा सके. हालांकि अतीत में बैंक का नाम कुछ आतंकी गतिविधियों की फाइनेंसिंग संबंधी जांचों में सामने आ चुका है.
2007 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि लश्कर-ए-तैयबा और लजनत-अल-दावा (कुवैत का मुखौटा एनजीओ) के खाते फैसल बैंक में मौजूद थे. हालांकि बैंक प्रबंधन ने उस समय किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया था और कहा था कि प्रतिबंधित घोषित होते ही संबंधित खातों को फ्रीज कर दिया गया था. इसके अलावा अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद, 2002 में पाकिस्तान की फेडरल जांच एजेंसी द्वारा विभिन्न आतंकी संगठनों के बैंक खातों की जांच के दौरान भी फैसल बैंक का नाम अन्य बैंकों के साथ सामने आया था.
ये भी पढ़ें:- कौन हैं सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त पांच नए जज? 4 हाईकोर्ट से पहुंचे, एक एडवोकेट को मिली जिम्मेदारी; जानें वी. मोहना के बारे में
ये भी पढ़ें:- सोनारपुर हमला अभिषेक बनर्जी की अग्नि परीक्षा, जन-आक्रोश को ममता की तरह सहानुभूति में बदल पायेंगे ‘भाईपो’?
जांच में खुल रहे हैं नए पहलू
एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. मोबाइल फोन की उत्पत्ति, उनके वर्षों तक निष्क्रिय रहने और फिर हमले से ठीक पहले सक्रिय होने जैसी जानकारियों ने जांच को नई दिशा दी है. सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये उपकरण पाकिस्तान से निकलकर आतंकियों तक कैसे पहुंचे और हमले की साजिश में उनकी क्या भूमिका रही.
पॉज हुआ है ऑपरेशन सिंदूर; एंड नहीं
वहीं भारत ने पहलगाम में मारे गए निर्दोषों का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर 6-7 मई 2025 की दरम्यानी रात शुरू किया था. 10 मई तक पाकिस्तान की हालत खस्ता होने पर उसने सीजफायर की गुहार लगाई, जिसके बाद भारत ने अपने हमलों को रोका. हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी रोका गया है, इसे बंद नहीं किया गया है. ऐसे में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और पाकिस्तान की भूमिका सामने आती है, तो भारत उसी हिसाब से एक्शन ले सकता है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










