Khaleda Zia: खालिदा जिया की रिहाई, शेख हसीना की हैं पक्की दुश्मन

Edited by Amitabh Kumar
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Khaleda Zia: बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद खालिदा जिया की रिहाई हो चुकी है जो शेख हसीना की पक्की दुश्मन हैं. जानें उनके बारे में खास बातें

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Khaleda Zia: बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद कई तरह की खबरें आ रहीं हैं. इसमें से एक खालिदा जिया को लेकर है. बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने कहा है कि प्रधानमंत्री पद से शेख हसीना का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा करने का भी आदेश जारी कर दिया. वह कई मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद से घर में नजरबंद थीं. शहाबुद्दीन ने संसद को भंग करने के बाद एक अंतरिम सरकार का गठन करने करने की भी घोषणा की है. जानें खालिदा जिया के जेल से बाहर आने के क्या मायने हैं.

शेख हसीना और खालिदा जिया हैं एंटी

1996 के आम चुनाव पर गौर करें तो इसके अगले दौर में, अवामी लीग सत्ता में आई. हालांकि, 2001 में खालिदा जिया की पार्टी ने फिर वापसी करने में सफलता पाई और सरकार बना ली. खालिदा जिया 1991, 1996 के अलावा 2001 के आम चुनावों में 5 अलग-अलग संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी गईं. 1980 के दशक से ही, जिया की मुख्य प्रतिद्वंद्वी अवामी लीग की नेता शेख हसीना रही हैं जो भारत के प्रति नरम रुख रखतीं हैं. 1991 के बाद से, खालिदा जिया और शेख हसीना बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने वालीं दो नेता रहीं हैं.

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शेख हसीना की कट्टर दुश्मन मानीं जाने वाली 78 वर्षीय खालिदा जिया मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की प्रमुख हैं. साल 1991 में खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. उनके पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उनका राजनीतिक जीवन का उदय हुआ. खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के एक मामले में 17 साल की सजा सुनाई गई थी. इसके बाद 2018 में जेल भेज दिया गया था. फिलहाल खालिदा अस्वस्थ हैं. उनके अस्पताल में इलाज कराने की खबर है.

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया रिहा

सेना की ओर से कहा गया है कि बांग्लादेश की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को रिहा कर दिया गया है. इसके बाद यहां शांति व्यवस्था को बहाल करने का प्रयास जारी है. पीएम शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश में अराजकता का माहौल है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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