ईरान के उपराष्ट्रपति रजा आरिफ की दो टूक- अमेरिका प्राथमिकता तय करे, ‘इजरायल फर्स्ट’ पर नहीं होगी डील

Author Govind jee
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तस्वीर में ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ.

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Iran-US Peace Deal: इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच निर्णायक बातचीत शुरू हो गई है. ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका केवल इजरायल के हितों को आगे रखेगा, तो समझौता संभव नहीं है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शहबाज शरीफ इस समिट की मेजबानी कर रहे हैं.

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Iran-US Peace Deal: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच मीटिंग शुरू हो गई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बातचीत को ‘मेक और ब्रेक’ यानी ‘बनो या बिगड़ो’ वाली स्थिति बताया है. 8 अप्रैल को हुए सीजफायर (युद्धविराम) के बाद पूरी दुनिया की नजरें इस समिट पर टिकी हैं कि क्या मिडिल ईस्ट में शांति होगी या फिर से जंग छिड़ेगी.

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‘अमेरिका फर्स्ट’ या ‘इजरायल फर्स्ट’: ईरान की सीधी शर्त

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बड़ी बात कही है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर इस्लामाबाद में बातचीत ‘अमेरिका फर्स्ट’ (अमेरिका की प्राथमिकता) को ध्यान में रखकर होती है, तो समझौता होना मुमकिन है. इससे दोनों देशों और दुनिया का फायदा होगा. लेकिन, अगर अमेरिकी डेलिगेशन ‘इजरायल फर्स्ट’ की सोच के साथ बात करेगा, तो कोई डील नहीं होगी. आरिफ ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में ईरान और भी मजबूती से अपना बचाव करेगा, जिसका हर्जाना पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा.

कौन-कौन पहुंचा इस्लामाबाद?

ईरान का डेलिगेशन शनिवार सुबह अपनी रिहाइश से प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए रवाना हुआ. मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने भी एक्स पर इसकी जानकारी दी है. ईरान की टीम को लीड करने के लिए संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ आधी रात को इस्लामाबाद पहुंचे. सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि जब ईरानी विमान ने पाकिस्तानी हवाई सीमा में एंट्री की, तो उसे AWACS (अर्ली वार्निंग सिस्टम) और लड़ाकू विमानों के घेरे में सुरक्षित लैंड कराया गया.

वहीं, अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर अपनी टीम के साथ पहुंचे हैं. इतनी हाई-प्रोफाइल मौजूदगी बताती है कि यह मीटिंग कितनी गंभीर है.

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48 घंटे बेहद हैं महत्वपूर्ण

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम शहबाज शरीफ ने इस बातचीत को निर्णायक बताया है. ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के अनुसार, बातचीत के लिए केवल 15 दिनों का समय तय किया गया है. अगले 48 घंटे यह तय कर देंगे कि दुनिया में शांति रहेगी या संघर्ष और बढ़ेगा. फिलहाल पूरी दुनिया की सांसें इस मीटिंग के नतीजों पर अटकी हुई हैं.

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