ईरान में पहली बार किसी महिला को मौत की सजा: जानिए कौन हैं बीता हेमाती और क्या हैं उन पर आरोप

Author Govind jee
Updated:
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तस्वीर में बीता हेमाती अपने पति के साथ.

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Bita Hemmati: सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाली बीता हेमाती को ईरान में पहली बार किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई है. उन पर सुरक्षा बलों पर हमले और विदेशी ताकतों की मदद करने जैसे गंभीर आरोप हैं. मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को गलत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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Bita Hemmati: बीता हेमाती ईरान की राजधानी तेहरान में रहने वाली एक महिला हैं. उन्हें जनवरी 2026 में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के मामले में गिरफ्तार किया गया था. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान की एक कोर्ट ने बीता सहित चार लोगों को मौत की सजा सुनाई है. बीता इन प्रदर्शनों से जुड़ी ऐसी पहली महिला बन गई हैं, जिन्हें फांसी की सजा मिली है.

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 बीता हेमाती के साथ उनके पति मोहम्मद रजा मजीद-असल को भी मौत की सजा दी गई है. इसके अलावा, उसी बिल्डिंग में रहने वाले दो पड़ोसियों, बहरो जमानीनेजाद और कुरुश जमानीनेजाद को भी फांसी की सजा सुनाई गई है. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, इन सभी को एक साथ गिरफ्तार किया गया था. वहीं, उनके एक रिश्तेदार आमिर हेमाती को 5 साल जेल की सजा मिली है.

क्या हैं उन पर लगे आरोप?

ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि बीता और उनके साथियों ने 8 और 9 जनवरी को हिंसा फैलाई थी. कोर्ट के मुताबिक, इन लोगों ने छतों से सुरक्षा बलों पर कंक्रीट के ब्लॉक और जलने वाली चीजें फेंकीं. उन पर ‘अमेरिका जैसे दुश्मन देश’ के लिए काम करने और सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने का भी आरोप है. कोर्ट ने उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया है.

जबरन कबूलनामे और टॉर्चर का दावा

मानवाधिकार संगठनों ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. ‘अब्दुर्रहमान बोरूमैंड सेंटर’ का कहना है कि बीता का एक वीडियो सरकारी टीवी पर दिखाया गया था, जिसमें वे पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर रही थीं. संगठन का दावा है कि ये कबूलनामा दबाव और टॉर्चर के जरिए लिया गया है. एक्टिविस्ट्स का मानना है कि इतनी सख्त सजा सिर्फ लोगों को डराने के लिए दी जा रही है.

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ईरान में फांसी के डराने वाले आंकड़े

नॉर्वे स्थित ‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHR) और ‘टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी’ (ECPM) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ईरान में कम से कम 1639 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें 48 महिलाएं थीं. जनवरी 2026 के प्रदर्शनों के मामले में अब तक 7 लोगों को फांसी दी जा चुकी है और 26 अन्य लोग अभी भी मौत की सजा की कतार में हैं. ‘सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान’ का आरोप है कि ये सभी ट्रायल बिना वकील और बिना निष्पक्ष जांच के जल्दबाजी में पूरे किए गए हैं.

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