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इमरान खान ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के डीजी को ललकारा, भारत की विदेश नीति का लगाया जयकारा

Updated at : 28 Oct 2022 8:03 PM (IST)
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इमरान खान ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के डीजी को ललकारा, भारत की विदेश नीति का लगाया जयकारा

इमरान खान और पार्टी के अन्य सदस्यों ने लाहौर के लिबर्टी चौक से इस्लामाबाद तक बहुप्रतीक्षित 'हकीकी आजादी लॉन्ग मार्च' शुरू की. पाकिस्तान की सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही इमरान खान और आईएसआई के बीच की खटास बढ़ गई है.

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लाहौर : पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान ने एक बार फिर खुफिया एजेंसी आईएसआई के महानिदेशक (डीजी) नदीम अंजुम को चेतावनी दी है. शुक्रवार को लाहौर में आयोजित एक रैली में पीटीआई के अध्यक्ष इमरान खान ने कहा कि आईएसआई के डीजी (आईएसआई महानिदेशक नदीम अंजुम) कान खोलकर सुन लो. मैं बहुत कुछ जानता हूं, लेकिन मैं केवल इसलिए चुप हूं, क्योंकि मैं अपने देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता. मैं बेहतरी के लिए सकारात्मक आलोचना करता हैं, अन्यथा मैं जब पदासीन था, तो बहुत कुछ कह सकता था.

लाहौर से इस्लामाबाद तक हकीकी आजादी रैली

इमरान खान और पार्टी के अन्य सदस्यों ने लाहौर के लिबर्टी चौक से इस्लामाबाद तक बहुप्रतीक्षित ‘हकीकी आजादी लॉन्ग मार्च’ शुरू की. पाकिस्तान की सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही इमरान खान और आईएसआई के बीच की खटास बढ़ गई है. इससे पहले भी इमरान खान ने कहा था कि तत्कालीन विपक्षी गठबंधन को ‘डर’ था कि वह पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को सेना के अगले प्रमुख के रूप में नियुक्त करेंगे. पीटीआई के अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें डर था कि मैं लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नियुक्त करना चाहता हूं. उन्हें डर था कि अगर ऐसा हो गया, तो इससे उनका भविष्य खराब हो जाएगा.

इमरान ने की भारतीय विदेश नीति की जय-जय

अपने रुख पर सफाई देते हुए इमरान खान ने कहा कि मैंने कभी किसी को सेना प्रमुख नियुक्त करने के बारे में नहीं सोचा. मैंने कभी ऐसा फैसला नहीं लिया, जो योग्यता के आधार पर न हो. इमरान खान ने एक बार फिर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और नई दिल्ली द्वारा यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रूसी तेल की खरीद की सराहना की. अपने पहले भाषण के दौरान, पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान ने कहा कि भारत अपनी इच्छा से रूस से तेल आयात करने में सक्षम है. हालांकि, पाकिस्तानी एक गुलाम हैं, जो अपने देश के लोगों के कल्याण के लिए निर्णय लेने में नाकाम रहे.

इमरान ने पहले भी की है भारत की तारीफ

हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब इमरान खान ने भारत की तारीफ की है. इससे पहले, इमरान खान ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के लिए भारत की सराहना की, क्योंकि नेता ने पश्चिमी देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए भारत की आलोचना करने के लिए नारा दिया. अप्रैल में सत्ता से बेदखल होने के बाद से इमरान खान ने उनके खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाली विदेशी साजिश की निंदा की है. जो बाइडेन प्रशासन की आलोचना करते हुए इमरान खान ने कई मौकों पर भारत की सराहना की कि उसने पश्चिम की मांग को नहीं माना और अमेरिका के रणनीतिक सहयोगी होने के बावजूद रूसी तेल खरीदना जारी रखा.

मैं पाकिस्तान को आजाद कराना चाहता हूं : इमरान खान

इमरान खान ने कहा कि इस देश के फैसले देश के अंदर होने चाहिए. अगर रूस सस्ता तेल दे रहा है और अगर मेरे पास अपने देशवासियों को बचाने का विकल्प है, तो हमें किसी से पूछना नहीं चाहिए. कोई हमें बताने में सक्षम नहीं होना चाहिए. भारत रूस से तेल ले सकता है, लेकिन गुलाम पाकिस्तानियों को इसकी अनुमति नहीं है. मैं एक स्वतंत्र देश देखना चाहता हूं. लोगों के साथ न्याय होना चाहिए और लोगों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए. 26 साल के राजनीतिक संघर्ष में इमरान खान ने कहा कि यह सबसे महत्वपूर्ण यात्रा है, जो वह शुरू कर रहे हैं. मेरा उद्देश्य केवल एक है कि एक समय हमें अंग्रेजों से आजादी मिली थी और यह समय है कि हम हकीकी आजादी शुरू करें. यह सभी पाकिस्तानियों के लिए मेरा संदेश है. यह रैली राजनीति के लिए नहीं है और न ही चुनाव या धर्म के लिए है. इस रैली का केवल एक ही मकसद है कि मैं पाकिस्तान को आजाद कराना चाहता हूं.

पीड़ित है आम पाकिस्तानी

उन्होंने जोर देकर कहा कि आम पाकिस्तानी पीड़ित है. उन्होंने चेतावनी दी कि देश को बचाने के लिए लोग अपना सब कुछ कुर्बान कर देंगे. इसे ध्यान से सुनो. लोग ड्रामा देख रहे हैं. महंगाई ने देश को अपनी चपेट में ले लिया है. आयातित चोरों ने महंगाई बढ़ाई है, लेकिन वे (सत्तारूढ़ दल के सदस्य) 11 करोड़ रुपये के घोटाले से बरी हो गए हैं. उनके आका अगर वे मानते हैं, तो वे स्वीकार किया जाएगा. ध्यान से सुनो, यह देश कुछ भी त्याग करने में सक्षम होगा.

रैली में भारत के विदेश मंत्री की चलाई वीडियो क्लिप

इससे पहले लाहौर में एक विशाल सभा के दौरान इमरान खान की पीटीआई पार्टी ने जून में आयोजित ब्रातिस्लावा फोरम से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की एक वीडियो क्लिप चलाई, जहां भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली वह करेगी, जो उनके लोगों के लिए सबसे अच्छा होगा. इमरान खान ने कहा कि जब भारतीय विदेश मंत्री को रूसी तेल नहीं खरीदने के लिए कहा गया. उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति को तय करने वाले वे कौन होते हैं. यूरोप रूस का तेल खरीद रहा है और लोगों को इसकी जरूरत है. उन्होंने कहा कि वे इसे खरीदना जारी रखेंगे. विदेश मंत्री जयशंकर की नीतियों की वजह से यह एक स्वतंत्र राष्ट्र जैसा दिखता है.

Also Read: इमरान खान की संसद सदस्यता छिनने से नाराज पीटीआई कार्यकर्ताओं का बवाल, कई जगहों पर पुलिस से भिड़े
शहबाज सरकार की खिंचाई की

भारत-पाकिस्तान के बीच तुलना करते हुए पीटीआई प्रमुख ने रूसी तेल खरीदने पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के लिए शहबाज सरकार की खिंचाई की. खान ने कहा कि हमने सस्ता तेल खरीदने के बारे में रूस से बात की थी, लेकिन इस सरकार में अमेरिकी दबाव को ना कहने का साहस नहीं है. ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं. मैं इस गुलामी के खिलाफ हूं. इमरान ने कहा कि भारत को भी पाकिस्तान के साथ ही आजादी मिली और अगर नई दिल्ली अपने लोगों की जरूरत के हिसाब से अपनी विदेश नीति पर कड़ा रुख अख्तियार कर सकती है तो वे (शहबाज शरीफ सरकार) कौन हैं, जो उसकी (अमेरिका की) लाइन पर चल रहे हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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