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पत्ते और चारा खा रहे नवजात, मासूमों की मौत से कराह रही गाजा की जमीन

Updated at : 01 Aug 2025 1:07 PM (IST)
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Gaza Babies Dying Hunger Milk Crisis/ Image Taken Social Media

गाजा में दूध संकट के कारण भूख से मर रहे बच्चे/सोशल मीडिया से ली गई तस्वीर

Gaza Babies Dying: गाजा में युद्ध और नाकेबंदी के चलते नवजात बच्चे भूख से तड़प रहे हैं. मां के स्तनों में दूध नहीं, बाजार में बेबी फॉर्मूला 100 डॉलर से ऊपर. जानिए गाजा के बच्चों की दर्दनाक हालत और मानवीय संकट की पूरी कहानी.

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Gaza Babies Dying: काश ये नवजात कुछ कह पाती… शायद मुझसे सवाल करती – क्यों लाई मुझे ऐसी दुनिया में जहां दूध नहीं, बस दर्द है? यह सिर्फ एक मासूम की बेबसी नहीं, गाजा के हर घर की कहानी है. युद्ध से तबाह इस इलाके में माताएं कुपोषण की शिकार हैं, स्तन में दूध नहीं है, और बाजारों में बेबी फार्मूला मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है.

तीन महीने की मुंताहा, अपनी दादी की गोद में तड़पती है. उसकी मां गर्भावस्था के दौरान ही गोलीबारी में घायल हो गई थी और जन्म के कुछ हफ्तों बाद चल बसी. अब दादी काबुली चना पीसकर सिरिंज से मुंताहा को खिला रही हैं, यह जानते हुए कि बच्ची इसे पचाने में असमर्थ है. मुंताहा का वजन सिर्फ 3.5 किलोग्राम है, जबकि उसकी उम्र के बच्चे आमतौर पर 6–7 किलो के होते हैं.

गाजा में हालत इतनी बदतर हो गई है कि परिवार जानवरों का चारा, पत्ते, रेत मिलाकर बनी रोटी और उबली हुई चाय बच्चों को खिला रहे हैं. छह महीने से कम उम्र के बच्चों को ठोस आहार देना डॉक्टरों के मुताबिक घातक है. इससे दम घुटने, डायरिया, पेट खराब जैसे खतरे बढ़ जाते हैं.

Gaza Babies Dying Hunger Milk Crisis: दूध की जगह तिल और चाय

31 वर्षीय अजहर इमाद अपनी चार महीने की बेटी जौरी को दूध की जगह ताहिनी (तिल का गाढ़ा पेस्ट) पानी में घोलकर पिला रही हैं. वह जानती हैं कि यह पर्याप्त नहीं है, लेकिन “कुछ नहीं” से तो बेहतर है. यूनिसेफ प्रवक्ता सलीम ओवेस बताते हैं कि यह पूरी तरह एक “हताशा भरा समाधान” है, जो बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल रहा है. अल-अक्सा शहीद अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों तक में बेबी फॉर्मूला की सप्लाई लगभग खत्म हो चुकी है.

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बेबी फॉर्मूला 100 डॉलर

गाजा में फार्मूला दूध की कीमत 100 डॉलर (करीब 8700) तक पहुंच गई है. मुंताहा जैसे परिवारों के लिए यह खरीदना असंभव है. उसके पिता का फलाफेल बिज़नेस युद्ध के बाद बंद हो गया और वह खुद भी अब बेरोजगार हैं. विस्थापन और बेरोजगारी ने लाखों परिवारों को असहाय बना दिया है.

भूख से अब तक 89 बच्चों की मौत

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक भूख और कुपोषण से 154 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 89 बच्चे शामिल हैं. यूनाइटेड नेशंस और अन्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि गाजा में “अकाल जैसे हालात” बन चुके हैं और अगर तुरंत हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो हालात और भी भयावह हो जाएंगे. हाल ही में इजराइल ने खानी की आवाजाही की अनुमति देने के लिए 10 दिन का युद्धविराम घोषित किया है लेकिन सम्सया इतनी भयावह है कि इसे स्थिर होने में समय लग सकता है।

इजरायल और अमेरिका का आरोप है कि हमास मानवीय सहायता चुरा रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि उसे इस दावे के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं. हमास का आरोप है कि इजरायल जानबूझकर सहायता को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. रॉयटर्स, एएफपी, यूनिसेफ, यूएनडब्ल्यूएफपी, डब्ल्यूएचओ से जानकरी ली गई है. 

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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