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अमेरिका का वो जासूस, जिसकी वजह से मारे गए 10 US एजेंट, 84 की उम्र में जेल में हुई मौत

CIA Agent Aldrich Ames who Sold Information to Soviet Russia: एल्ड्रिक एमेस का विश्वासघात अप्रैल 1985 में शुरू हुआ, जब उन्होंने एफबीआई के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे कुछ केजीबी अधिकारियों के नाम 50,000 डॉलर के बदले सोवियत संघ को सौंपे. इसके बाद अगले नौ वर्षों तक उनकी जासूसी जारी रही. उनके इस ऐक्शन की वजह से पश्चिमी देशों के लगभग 10 एजेंट मारे गए थे. इन्हीं एमेस का 84 साल की उम्र में जेल में मौत हो गई.

CIA Agent Aldrich Ames Sold Info to Soviet Russia: शीत युद्ध के दौर में अमेरिकी खुफिया तंत्र को सबसे बड़ा झटका देने वाले मामलों में शामिल सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के पूर्व अधिकारी एल्ड्रिक एमेस का निधन हो गया है. सोवियत संघ को गोपनीय सूचनाएं बेचने के दोषी एमेस को अमेरिकी इतिहास के सबसे कुख्यात जासूसों में गिना जाता है. 84 वर्षीय एमेस की मौत मैरीलैंड की एक जेल में हुई. अमेरिकी कारागार ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, उनका निधन सोमवार को हुआ. एल्ड्रिक एमेस करीब 31 वर्षों तक सीआईए से जुड़े रहे. बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि 1985 से 1994 के बीच उन्होंने अमेरिकी खुफिया जानकारियां सोवियत संघ और बाद में रूस को सौंपीं, जिसके बदले उन्हें मॉस्को से लगभग 25 लाख डॉलर मिले. 

एमेस को 28 अप्रैल 1994 को जेल भेजा गया था, जब उन्होंने सोवियत संघ और रूस को गोपनीय जानकारियां बेचने की बात कबूल की. पूर्व काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारी एमेस आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और उन्हें पैरोल का कोई अधिकार नहीं था. उनका निधन मैरीलैंड के कंबरलैंड स्थित फेडरल करेक्शनल इंस्टीट्यूशन में हुआ. उन्होंने उन 10 रूसी अधिकारियों और एक पूर्वी यूरोपीय अधिकारी की पहचान उजागर की थी, जो अमेरिका या ब्रिटेन के लिए गुप्त रूप से जासूसी कर रहे थे. 

इसके अलावा उन्होंने उपग्रह निगरानी अभियानों, गोपनीय संवाद प्रणालियों और जासूसी से जुड़े तरीकों की अहम जानकारी भी साझा की. इन सूचनाओं के कारण पश्चिमी देशों के कई खुफिया एजेंटों की जान गई. शीत युद्ध के दौरान इसे सीआईए के लिए एक गंभीर झटके के रूप में देखा गया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, एमेस ने वर्षों तक अमेरिका को अत्यंत महत्वपूर्ण खुफिया सूचनाओं से वंचित रखा.

जांच में सामने आया कि एमेस ने 100 से अधिक गुप्त अभियानों को खतरे में डाला और पश्चिमी देशों के लिए काम कर रहे 30 से ज्यादा एजेंटों की पहचान उजागर की, जिसके चलते कम से कम 10 सीआईए खुफिया स्रोतों की मौत हुई. उनकी गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन सीआईए निदेशक आर. जेम्स वूल्सी ने उन्हें “अपने देश के लिए घातक विश्वासघाती” बताया था. वूल्सी के मुताबिक, एजेंटों की मौत इसलिए हुई क्योंकि “एक हत्यारा गद्दार बड़ा घर और जगुआर कार चाहता था.”

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एल्ड्रिक एमेस. फोटो- एक्स.

एमेस का विश्वासघात अप्रैल 1985 में शुरू हुआ, जब उन्होंने एफबीआई के लिए गुप्त रूप से काम कर रहे कुछ केजीबी अधिकारियों के नाम 50,000 डॉलर के बदले सोवियत संघ को सौंपे. इसके बाद अगले नौ वर्षों तक उनकी जासूसी जारी रही. 21 फरवरी 1994 को उन्हें गिरफ्तार किया गया, जब एक साल पहले शुरू हुई ‘मोल हंट’ जांच उनके बेहद करीब पहुंची. अदालत में एमेस ने अपने कृत्य पर गहरा पछतावा जताते हुए कहा था कि उन्होंने यह सब कर्ज चुकाने के लिए किया. हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने जानबूझकर अमेरिका को गंभीर नुकसान पहुंचाया या सोवियत संघ की सक्रिय मदद की.

एमेस का सीआईए करियर 1962 में शुरू हुआ था, जब कॉलेज छोड़ने के बाद उनके पिता ने उन्हें एजेंसी में नौकरी दिलाने में मदद की. उनके पिता स्वयं सीआईए में विश्लेषक थे. 1969 में उन्होंने सीआईए एजेंट नैन्सी सीगबार्थ से शादी की और इसके बाद तुर्की में काउंटर-इंटेलिजेंस अधिकारी के रूप में तैनात हुए. तीन साल बाद अमेरिका लौटने पर उनकी शराब की लत और वैवाहिक समस्याएं सामने आने लगीं. एक बार वह गोपनीय दस्तावेजों से भरा ब्रीफकेस मेट्रो में भी छोड़ चुके थे. इसके बावजूद 1981 में उन्हें मेक्सिको सिटी भेज दिया गया.

पहली पत्नी से तलाक के बाद उन्होंने मारिया डेल रोसारियो कासास डुपुई से शादी की, जो कोलंबियाई दूतावास में कल्चरल अटैची थीं और सीआईए की एक एसेट भी थीं. बाद में उन्हें एमेस की सहयोगी के रूप में आरोपी बनाया गया. 1983 में अमेरिका लौटने के बाद एमेस को सीआईए के सोवियत काउंटर-इंटेलिजेंस विभाग का प्रमुख बना दिया गया, हालांकि उनकी शराबखोरी को लेकर चिंताएं बनी रहीं.

जहां उनका करियर ऊंचाइयों पर था, वहीं निजी जिंदगी आर्थिक संकट में फंसती चली गई. वह पहली पत्नी को गुजारा भत्ता दे रहे थे और साथ ही रोसारियो की महंगी जीवनशैली का खर्च भी उठा रहे थे. यही बढ़ता कर्ज उन्हें उन गोपनीय जानकारियों को बेचने की ओर ले गया, जिन तक उनकी पहुंच थी. जांच में शामिल एफबीआई एजेंट लेस्ली जी. वाइजर ने 2015 में बीबीसी से कहा था कि एमेस की जासूसी का मकसद सिर्फ पैसा था और इसके पीछे कोई वैचारिक कारण नहीं था.

एफबीआई के अनुसार, एमेस ने सीआईए के लैंगली मुख्यालय में सोवियत और पूर्वी यूरोप मामलों से जुड़े विभाग में रहते हुए पहली बार केजीबी से संपर्क किया. रोम में तैनाती और बाद में वाशिंगटन लौटने के बाद भी उन्होंने सोवियत संघ को गोपनीय सूचनाएं देना जारी रखा. इस दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियां यह समझ नहीं पा रही थीं कि इतने बड़े पैमाने पर उनके एजेंट कैसे बेनकाब हो रहे हैं. एमेस की गिरफ्तारी तक पहुंची जांच में शामिल एफबीआई एजेंट लेस्ली जी. वाइजर ने 2015 में बीबीसी के एक इंटरव्यू में कहा था कि यह सब पैसे के लिए था और उन्हें नहीं लगता कि उसने कभी यह दिखाने की कोशिश की हो कि इसके पीछे कोई और वजह थी.

केजीबी में एमेस को ‘कोलोकोल’ (घंटी) कोडनेम से जाना जाता था. अदालत में पढ़े गए अपने बयान में उन्होंने कहा था कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि केजीबी ने उनकी सूचनाओं के बदले कृतज्ञता स्वरूप उनके लिए 20 लाख डॉलर अलग रखे थे. कुल मिलाकर नौ वर्षों में उन्होंने लगभग 25 लाख डॉलर हासिल किए. इस पैसे से एमेस ने ऐशो-आराम भरी जिंदगी जी, जैगुआर कार खरीदी, विदेश यात्राएं कीं और 5.40 लाख डॉलर का घर लिया, जबकि उनकी सालाना तनख्वाह कभी 70,000 डॉलर से अधिक नहीं रही.

एमेस की जासूसी गतिविधियां एफबीआई एजेंट रॉबर्ट हैंसन के साथ भी मेल खाती हैं, जिन्हें 2001 में गिरफ्तार किया गया था. हैंसन पर मॉस्को को गोपनीय जानकारियां बेचने के बदले 14 लाख डॉलर और हीरे लेने का आरोप था. उनकी भी 2023 में जेल में मौत हो गई थी. वहीं एमेस की पत्नी रोसारियो ने भी उनकी जासूसी में मदद करने के आरोप स्वीकार किए थे और उन्हें 63 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी. अभियोजन एजेंसियों के साथ सहयोग के तहत एमेस ने उनके लिए नरम सजा सुनिश्चित की थी. रोसारियो ने माना था कि उन्हें पैसों और सोवियत एजेंटों से एमेस की मुलाकातों की जानकारी थी. उन्हें पांच साल बाद रिहा कर दिया गया.

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Anant Narayan Shukla
Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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