Bangladesh Violence : बांग्लादेश में निशाने पर हिंदू, भय का माहौल, मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Edited by Amitabh Kumar
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Bangladesh Hindu | PTI

Bangladesh Violence : शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. इसके बाद मोदी सरकार की ओर से एक बड़ा फैसला लिया गया है.

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Bangladesh Violence : शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है. इसके बाद भी वहां अराजक स्थिति बनी हुई है. लूटपाट और डकैती की घटना के बीच हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदुओं और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर अत्याचार की खबरें लगातार आ रहीं हैं. कुछ वीडियो भी सोशज मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. अल्पसंख्यक समुदाय के घरों में लूटपाट और तोड़फोड़ की जा रही है, जिससे हिंदुओं में भय का माहौल है.

बांग्लादेश में डर के साये में जी रहे हिंदू पलायन करने को मजबूर हैं जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है. पिछले दो-तीन दिनों से भारत की सीमा पर सैकड़ों बांग्लादेशी पहुंच रहे हैं, वे उम्मीद की नजर से भारत की ओर देख रहे हैं. वह भारत में पनाह पाने की आस में हैं, लेकिन बीएफएफ की सतर्कता की वजह से उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है.

मोदी सरकार हुई एक्टिव

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी नीत सरकार ने बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी के लिए एक हाई लेवल समिति का गठन किया है. समिति बांग्लादेश में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ संपर्क करेगी. ऐसा इसलिए ताकि वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों, हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इस समिति की अध्यक्षता एडीजी (अतिरिक्त महानिदेशक), बीएसएफ, पूर्वी कमान को सौंपी गई है. बीएसएफ एडीजी के अलावा समिति के चार अन्य सदस्यों में दक्षिण बंगाल सीमांत के लिए बीएसएफ के आइजीपी भी शामिल हैं. इनके अलावा समिति में त्रिपुरा सीमांत के लिए आइजीपी, भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण के सदस्य (योजना एवं विकास) और एलपीएआइ के सचिव को रखा गया है.

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आरएसएस ने हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का किया आग्रह

इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है. संघ ने मोदी सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करने का आग्रह किया.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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