सावधान! धरती की ओर बढ़ रहा कुतुब मीनार से चार गुना बड़ा उल्कापिंड, आज का दिन बेहद अहम

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Jun 2020 9:32 AM

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Asteroid news,NASA: कोरोना संकट के इस दौर में 'अम्फान' और 'निसर्ग' जैसे चक्रवाती तूफान के बाद एक और आफत धरती पर आ रही है. ये आफत आसमान से आने वाली है जिसके लिए आज का दिन बेहद अहम है. दरअसल, नासा ने खबर दी है कि एक बड़ उल्कापिंड तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है.

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Asteroid news,NASA: कोरोना संकट के इस दौर में ‘अम्फान’ और ‘निसर्ग’ जैसे चक्रवाती तूफान के बाद एक और आफत धरती पर आ रही है. ये आफत आसमान से आने वाली है जिसके लिए आज का दिन बेहद अहम है. दरअसल, नासा ने खबर दी है कि एक बड़ उल्कापिंड तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है. यह 24 जून को धरती के करीब आएगा और यह दिन काफी अहम होने वाला है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अनुमान है कि यह धरती से करीब 37 लाख किलोमीटर दूर से निकलेगा. लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में इस दूरी को ज्यादा नहीं माना जाता. हालांकि, धरती को इस उल्कापिंड से कोई खतरा नहीं है. बता दें कि जून में धरती के बगल से गुजरने वाला ये तीसरा उल्कापिंड है.

इसके पहले 6 और 8 जून को धरती के बगल से उल्कापिंड गुजरे थे. जो उल्कापींड पृथ्वी की ओर आ रहा है वो नासा के अनुमान के अनुसार, 1017 फीट लंबा और 310 मीटर व्यास वाला है. यह विशालकाय उल्कापिंड 24 जून की दोपहर 12.15 बजे धरती के करीब से गुजरने वाला है. इसका नाम ‘2010एनवाई65’ दिया गया है.

…तो मच सकती है भारी तबाही

डेलीस्टार में छपी खबर के मुताबिक, नासा के हवाले से लिखा गया है कि उल्कापींड 46,500 किमी प्रतिघंटे ((13 किलोमीटर प्रति सेकेंड)) की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. यह उल्कापिंड 2013 में रूस में गिरे उल्कापिंड से 15 गुना बड़ा बताया जा रहा है. साथ ही एफिल टावर और कुतुब मिनार से कई गुना बड़ा है. आपको बता दें कि स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी 310 फीट और कुतुबमीनार 240 फीट लंबा है. ऐसे में अगर यह उल्कापिंड किसी कारण अपनी चाल बदलता है और पृथ्वी की तरफ बढ़ता है तो यह भारी तबाही मचा सकता है.

क्या होता है उल्कापिंड

सूर्य का चक्कर लगाने वाले छोटे खगोलीय पिंड ‘क्षुद्रग्रह’या उल्कापिंड कहलाते हैं. ये मुख्यत: मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद ‘एस्टेरॉयड बेल्ट’ में पाए जाते हैं. हालांकि, कई बार पृथ्वी के करीब से गुजरने के कारण इनसे अच्छा खासा नुकसान भी संभव है. आकाश में कभी-कभी एक ओर से दूसरी ओर अत्यंत वेग से जाते हुए अथवा पृथ्वी पर गिरते हुए जो पिंड दिखाई देते हैं उन्हें उल्का और साधारण बोलचाल में ‘लूका’ (टूटते हुए तारे )कहते हैं. वहीं उल्काओं का जो अंश वायुमंडल में जलने से बचकर पृथ्वी तक पहुंचता है उसे उल्कापिंड कहते हैं.

Posted By: Utpal kant

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