कार्बन डाइ ऑक्साइड खतरनाक स्तर पर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2013 1:36 PM
पहली बार गैस का उत्सजर्न 400 पार्ट्स प्रति दस लाख पर पहुंचावाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के नेताओं को चेतावनी दी है कि वायुमंडल में बढ़ते कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर के देखते हुए इसपर नियंत्रण करने के लिए तुरंत कदम उठायें. हवाई में मौजूद अमेरिकी प्रयोगशाला में रोजाना होनेवाले कार्बन डाइ ऑक्साइड (सीओ […]
पहली बार गैस का उत्सजर्न 400 पार्ट्स प्रति दस लाख पर पहुंचा
वाशिंगटन : वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के नेताओं को चेतावनी दी है कि वायुमंडल में बढ़ते कार्बन डाइ ऑक्साइड के स्तर के देखते हुए इसपर नियंत्रण करने के लिए तुरंत कदम उठायें.
हवाई में मौजूद अमेरिकी प्रयोगशाला में रोजाना होनेवाले कार्बन डाइ ऑक्साइड (सीओ 2) के उत्सर्जन की माप से अंदाजा मिला है कि पहली बार इस गैस का उत्सर्जन 400 पार्ट्स प्रति 10 लाख के स्तर पर पहुंच गया है.
ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी के मौसम परिवर्तन विभाग के प्रमुख ब्रायन हिस्कंस का कहना है कि सीओ2 के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि दुनिया की सरकारों को इसके लिए उचित कदम उठाना चाहिए. साल 1958 से लेकर अब तक माउना लोआ ज्वालामुखी पर मौजूद गैस मापक स्टेशन में दर्ज किये जानेवाले आंकड़े दर्शाते हैं कि इस गैस की मात्र लगातार बढ़ रही है.
मानव अस्तित्व से पहले थी गैस : दिलचस्प है कि मानव जीवन के अस्तित्व से करीब 30 से 50 लाख साल पहले नियमित तौर पर कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्र 400 पीपीएम से ऊपर थी. वैज्ञानिकों का कहना है कि उस वक्त का मौसम आज के मुकाबले काफी गर्म हुआ करता था.
कार्बन डाइ ऑक्साइड को सबसे प्रमुख मानव जनित ग्रीन हाउस गैस माना जाता है और उसे पिछले कुछ दशकों से धरती के तापमान को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार माना जाता है. जीवाश्म ईंधन मसलन कोयला, तेल और गैस के जलने से खासकर कार्बन का उत्सर्जन होता है.
क्या है रुझान : ज्वालामुखी के आसपास आमतौर पर यह रु झान देखा जाता है कि सीओ 2 की मात्र ठंड के मौसम में बढ़ती है लेकिन उत्तरी गोलार्ध में मौसम बदलने के साथ ही इसकी मात्र कम हो जाती है. वैसे जंगलों, दूसरे पौधों और वनस्पतियों की वजह से वातावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गैस की मात्र कम होती है. माउना लोआ में नेशनल ओसनिक ऐंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) से जुड़े अर्थ सिस्टम रिसर्च लैबोरेटरी को स्थापित करने में जेम्स बटलर का मुख्य योगदान है.
यहां सीओ 2 की औसत दैनिक सांद्रता का आंकड़ा 400.03 था. डॉ बटलर ने कहा, ‘सीओ 2 में घंटे, दैनिक और साप्ताहिक आधार पर परिवर्तनशीलता का रु झान देखा जाता है इसलिए हम इसका कोई एक आंकड़ा बताने में सहज नहीं हैं. सबसे कम आंकड़ा रोजाना औसत आधार पर तय होता है जिसे इस मामले में भी देखा जा रहा है.’ ‘ऐसा पहली बार है कि माउना लोआ में भी सीओ 2 की दैनिक औसत मात्र ने 400 पीपीएम के स्तर को पार कर लिया है.’
उन्होंने अपनी खोज में यह पाया कि ज्वालामुखी के शीर्ष पर सीओ 2 की सघनता करीब 315 पीपीएम है. स्क्रि प्स, एनओएए के साथ-साथ पहाड़ों की चोटी पर इसकी की मात्र मापने की कोशिश में जुटा है.
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