इस तरह तो शहर के तालाबों का वजूद ही खत्म हो जायेगा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 May 2019 4:57 AM

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रांची : सबसे पहले बात करते हैं रांची की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़ा तालाब यानी रांची झील की. शहरीकरण के कारण इस तालाब की प्राकृतिक सुंदरता लगभग नष्ट हो चुकी है. बारिश के समय में तालाब का पानी सड़क से ऊपर आ जाया करता था. आज स्थिति ठीक दूसरी है. फिलहाल तालाब के […]

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रांची : सबसे पहले बात करते हैं रांची की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़ा तालाब यानी रांची झील की. शहरीकरण के कारण इस तालाब की प्राकृतिक सुंदरता लगभग नष्ट हो चुकी है. बारिश के समय में तालाब का पानी सड़क से ऊपर आ जाया करता था. आज स्थिति ठीक दूसरी है.

फिलहाल तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य चल रहा है. जानकारों का कहना है कि साैंदर्यीकरण अच्छी बात है, लेकिन भविष्य में बड़ा तालाब के अस्तित्व पर इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा. संभवत: यह सौंदर्यीकरण ही इस तालाब के सूूखने का कारण भी बनेगा.
बड़ा तालाब के चारों तरफ से कंक्रीट की चहारदीवारी के निर्माण से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. सड़क की सतह से तीन से चार फीट ऊंची कंक्रीट की दीवार बनाकर उस पर ग्रिल लगाया जा रहा है. चहारिदवारी के साथ-साथ पक्का पाथ-वे भी बनाया जा रहा है. पक्की चहारदीवारी के निर्माण से तालाब का जो प्राकृतिक स्रोत है, वह नष्ट हो जाने की आशंका है.
बारिश का पानी तालाब के अंदर जाने का कोई रास्ता चहारदीवारी निर्माण में नहीं छोड़ा जा रहा है. जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब बारिश का पानी अंदर जायेगा ही नहीं, तो उसमें जल का जमाव कहां से होगा? बारिश के पानी से ही तालाब भरते हैं, बारिश का पानी रुकेगा, तो बड़ा तालाब कभी भर नहीं पायेगा.
चहारदीवारी से सटा कर नाली का निर्माण भी शुरू किया गया है, ताकि अपर बाजार व पुरानी रांची की विभिन्न गलियों से निकलनेवाला गंदा व प्रदूषित पानी तालाब के अंदर नहीं जा सकेगा. नाली का गंदा पानी तालाब में जाने से ही तालाब का पानी प्रदूषित हो गया है.
भूमिगत जलस्तर बनाये रखने में सहायक है रांची झील
रांची झील भूमिगत जल स्तर को बनाये रखने का सबसे सशक्त माध्यम है. आजादी के पहले भी पुरानी रांची में जल संकट की समस्या नहीं थी. आज भी तालाब के आसपास के इलाके में भूमिगत जल स्तर बरकरार है.
तालाब में पानी कम हो जाने व पानी के प्रदूषित हो जाने के कारण अब यहां भी भूमिगत जल स्तर में कमी आने की शिकायत मिलने लगी है. कहा जाता है कि बड़ा तालाब में जल जमाव पर्याप्त है, तो आसपास के इलाकों में भूमिगत जल स्तर नहीं गिरेगा.
क्या-क्या होना है काम
रांची नगर निगम ने बड़ा तालाब के साैंदर्यीकरण का निर्णय लिया. तालाब के बीचोबीच स्वामी विवेकानंद की 33 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा स्थापित की गयी है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 12 जनवरी 2019 को प्रतिमा का अनावरण भी कर दिया है.
स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के पास रंग-बिरंगे फव्वारा व लाइटिंग लगाया जाना है. प्रतिमा के चारों अोर पार्क बनाया जायेगा. 153 मीटर लंबे ब्रीज में अशोका लाइट व एंटिक पोल लगाया जायेगा. तालाब के चारों अोर चहारदीवारी व पाथ-वे का निर्माण किया जाना है.
तालाब में गिरनेवाले गंदे नालों को तालाब की पहुंच से दूर करना है. तालाब में जमी गंदगी को बाहर निकाला जाना है. गंदगी बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया गया है. हालांकि, साैंदर्यीकरण का कार्य अधूरा है. कोई भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है. कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है.
हरा हो चुका है बड़ा तालाब का पानी
पहले 50 एकड़ से अधिक एरिया में बड़ा तालाब का विस्तार था. धीरे-धीरे बड़ा तालाब सिकुड़ता गया. तालाब की जमीन का अतिक्रमण कर कंक्रीट का जंगल तैयार किया गया. मिट्टी भर कर सड़क बना दी गयी. अभी भी बड़ा तालाब 25 एकड़ से अधिक एरिया में फैला हुआ है.
अपर बाजार सेवा सदन व पुरानी रांची की अोर से आनेवाली नालियों का गंदा जल सीधे तालाब में जाता है. इसके चलते तालाब का अधिकांश पानी का रंग हरा हो चुका है. कहीं-कहीं पानी का रंग पूरी तरह से काला दिखता है.
13 करोड़ का बजट बना था, बाद में 2.5 करोड़ और बढ़ गये
बड़ा तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य पर 15.5 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं. पूर्व में इसके लिए कुल 13 करोड़ रुपये का एस्टिमेट बनाया गया था. हालांकि, काम करनेवाली कंपनी उर्मिला कंस्ट्रक्शन की धीमी गति के कारण उसे बचा हुआ काम पूरा करने से रोका गया.
इसके बाद विभाग ने शापोरजी पालोनजी को नामांकन के आधार पर कार्य सौंपा. शापोरजी पालोनजी के विशेषज्ञों की सलाह पर बचा हुआ काम पूरा करने के लिए विभाग ने पूर्व के एस्टिमेट में 2.5 करोड़ रुपये की वृद्धि की. इसमें 95 लाख रुपये का एक नया पुल भी शामिल किया गया है.
81 में से 78 तालाबों की स्थिति दयनीय
आरआरडीए द्वारा किये गये सर्वे के मुताबिक रांची और आसपास के 40 गांवों में स्थित 81 में से 78 तालाबों की स्थिति दयनीय है. शहरी क्षेत्र में लगभग डेढ़ दर्जन तालाब तो गायब हो गये हैं. इन तालाबों को जमीन दलालों ने भर कर बेच दिया है. जहां तालाब होते थे, वहां अब इमारतें बना दी गयी हैं.
केवल चार तालाबों की स्थिति अच्छी
रांची लेक (बड़ा तालाब), छोटा टैंक, मधुकम बस्ती टैंक, लाइन टैंक, कमला टैंक, हटिया टैंक चुटिया, मिसिरगोंदा बस्ती टैंक, हातमा बस्ती टैंक, सुकुरहुटू टैंक, दिव्यायन के नजदीक स्थित मोरहाबादी टैंक, करमटोली टैंक, एफसीआइ कडरू स्थित तालाब, पुंदाग स्थित टैंक, अरगोड़ा बस्ती स्थित तालाब, ललगुटवा बस्ती टैंक, जेपी मार्केट धुर्वा स्थित टैंक, बटम तालाब, डोरंडा माजार स्थित तालाब, चुटिया पावर हाउस के समीप स्थित तालाब.
शहर के तालाब, जो गायब हो गये
जेल तालाब, रांची गोशाला तालाब, गोरखनाथ भवन के निकट स्थित तालाब, गुटुवा स्कूल के निकट तालाब, भुतहा तालाब, कर्बला चौक के निकट स्थित तालाब, गंगा मोटर तालाब, हेसल बस्ती का तालाब, गोपाल कॉम्प्लेक्स के पीछे स्थित तालाब, बार्गेन बाजार के पीछे स्थित बसुंधरा तालाब, एसटी-एससी पुलिस स्टेशन के निकट स्थित तालाब, जेलर कैंपस स्थित तालाब समेत अन्य.
बना दी चहारदीवारी सूख रहे तालाबों के हलक
राजधानी के तालाबों के सौंदर्यीकरण पर रांची नगर निगम करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है. लेकिन, तालाबों के चारों ओर लंबी चहारदीवारी खड़ी करने से इनमें पानी के जाने का रास्ता रोक दिया गया है. कई तालाब तो सूखने के कगार पर हैं. वहीं, आसपास के इलाकों का जलस्तर भी नीचे चला गया है.
जिन तालाबों को चहारदीवारी से घेरा गया है, उनमें मधुकम तालाब, धमुसा टोली तालाब, रिम्स तालाब, बनस तालाब, करमटोली तालाब, दिव्यायन तालाब, तेतर टोली तालाब समेत कई अन्य तालाब शामिल हैं.
हाइकोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान, कहा था, तालाबों की पक्की चहारदीवारी ठीक नहीं
रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने जल स्रोतों के अतिक्रमण, रखरखाव व साफ-सफाई के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में सरकार को कई बार जल संरक्षण के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है. भूमिगत जल स्तर बरकरार रखने के उद्देश्य से सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने को कहा था.
चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस एचसी मिश्र की खंडपीठ ने तीन मई को मामले की सुनवाई करते हुए माैखिक रूप से कहा कि तालाबों के किनारे जो पक्की चहारदीवारी बनायी जा रही है, वह उचित नहीं है.
पक्की चहारदीवारी खड़ा करना तालाब के लिए ठीक नहीं है. चहारदीवारी बारिश का पानी तालाब के अंदर जाने के प्राकृतिक स्रोत पर असर डालती है. वर्ष 2011 में प्रभात खबर में जल स्रोतों के अतिक्रमण व साफ-सफाई से संबंधित प्रकाशित खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.
कोर्ट की टिप्पणी
चहारदीवारी बारिश का पानी तालाब के अंदर जाने के प्राकृतिक स्रोत पर असर डालती है
रांची के तालाबों के किनारे पक्की चहारदीवारी से पानी का तालाबों में जाना बाधित हुआ
तालाबों की स्थिति पर सरकार गंभीर : सचिव
नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार तालाबों की स्थिति को लेकर गंभीर है. सभी निकायों के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारियों, कार्यपालक पदाधिकारियों और विशेष पदाधिकारियों को शहरी क्षेत्रों में स्थित तालाबों को दुरुस्त करने के लिए पत्र लिखा गया है. उनसे कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में स्थित तालाबों की साफ-सफाई नहीं होने के कारण उनमें कचरा भरा रहता है. अधिकतर तालाबों में स्थानीय नागरिकों द्वारा कचरा फेंका जाता है.
मल-मूत्र भी त्यागा जाता है. जलकुंभी और तत्सम वनस्पतियों के कारण भी जल दूषित होता है. श्री सिंह ने बताया कि तालाबों को संरक्षित करने के लिए छह तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों के सहयोग से अभियान चलाकर साफ करने, तालाब के किनारों को पार्क या पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने और जिला प्रशासन का सहयोग लेकर तालाबों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है.
प्राकृतिक स्वरूप से खिलवाड़ नहीं हो
बारिश का पानी बड़ा तालाब में नहीं जायेगा, तो एक दिन यह सूख जायेगा. सौंदर्यीकरण का कार्य करने वाली एजेंसी को चहारदीवारी में कुछ अंतराल पर खाली जगह होनी चाहिए थी, ताकि बरसात के समय बाहर का पानी (नाली का नहीं) उस खाली जगह से तालाब में जा सके. आज रांची का विस्तार हो गया है, लेकिन जब पुरानी रांची थी, तो कभी जल संकट पैदा नहीं होता था.
आसपास के इलाकों का जल स्तर बरकरार रखने में बड़ा तालाब मददगार रहा है. आज भी जल स्तर बनाये हुए है. हालांकि, तालाब में पानी कम रहेगा, तो जल स्तर गिरेगा ही. किसी भी हाल में बड़ा तालाब के प्राकृतिक स्वरूप से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
डॉ आफताब जमील, व्याख्याता मारवाड़ी कॉलेज, रांची
अब भी गलती सुधार सकता है नगर निगम
नगर निगम द्वारा भूल से ही अगर चहारदीवारी करा दी गयी है, तो अब उसमें बदलाव कर तालाबों को बचाया जा सकता है. नाला के गंदे पानी को साफ कर तालाब में छोड़ा जा सकता है. इसके लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाये. तालाब की चहारदीवारी के निचले हिस्सा को तोड़कर जाली लगाने का कार्य किया जा सकता है, जिससे बरसात का पानी तालाब में जा सके.
इसके अलावा गंदे तालाब को साफ करने के लिए उसमें पानी साफ करने वाले बैक्टीरिया डाले जा सकते हैं. 15 साल बड़ा तालाब का पानी ओवर फ्लो होकर सड़क पर आ जाता था, अब वैसा नहीं होता है. शहर में ड्रेन को भी पक्का बना दिया गया है, जिससे पानी का वाटर लेबल नीचे जा रहा है.
आरपी साही, झारखंड सिविल सोसाइटी
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