बंगाल में फीकी रहेगी दुर्गा पूजा की चमक? आर्थिक तंगी और कॉरपोरेट की दूरी से बढ़ी आयोजकों की टेंशन

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 04 Jun 2026 8:40 AM

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कोलकाता के कुम्हारटोली में मूर्ति बनाने में व्यस्त एक मूर्तिकार.

Durga Puja Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा 2026 पर आर्थिक संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कॉरपोरेट फंडिंग में कमी और आरजी कर घटना के बाद बदले बाजार सेंटिमेंट ने पूजा कमेटियों की चिंता बढ़ा दी है. पढ़ें कैसे प्रभावित हो रही है बंगाल की सबसे बड़ी विरासत.

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Durga Puja Crisis in Bengal: पश्चिम बंगाल की पहचान और दुनिया भर में मशहूर दुर्गा पूजा इस साल एक अभूतपूर्व संकट के मुहाने पर है. ‘सिटी ऑफ जॉय’ में महालया की गूंज सुनाई देने में अब कुछ ही समय शेष है, लेकिन पूजा कमेटियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. बंगाल की अर्थव्यवस्था में हजारों करोड़ का योगदान देने वाले इस महापर्व पर बजट की कमी, कॉरपोरेट फंडिंग में गिरावट और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के कारण संकट के काले बादल मंडला रहे हैं. प्रभात खबर की विशेष रिपोर्ट में जानिए, आखिर क्यों इस साल की दुर्गा पूजा पिछले वर्षों की तुलना में अलग और चुनौतीपूर्ण होने वाली है.

बजट में भारी कटौती

कोलकाता की सड़कों पर दिखने वाले आलीशान और थीम आधारित पंडाल इस साल शायद उतने भव्य न हों, क्योंकि आयोजकों को फंडिंग के अभाव, महंगाई की मार और विज्ञापनों की कमी का संकट झेलना पड़ रहा है.

  • फंडिंग का अभाव : छोटे और मंझले पूजा आयोजकों का कहना है कि विज्ञापन और चंदे (सब्स्क्रिप्शन) में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आयी है.
  • महंगाई की मार : बांस, कपड़ा, रंग और श्रम की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. बजट कम होने और लागत बढ़ने से आयोजक अब ‘थीम’ की बजाय सादगी पर जोर दे रहे हैं.
  • विज्ञापनों से दूरी : बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों ने इस साल विज्ञापनों पर खर्च कम कर दिया है, जिसका सीधा असर पूजा बजट पर पड़ा है.

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कॉरपोरेट स्पांसरशिप में बड़ी गिरावट

आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान बड़े-बड़े होर्डिंग्स और गेट्स स्पांसर्स से भरे रहते थे, लेकिन इस बार नजारा कुछ और होने वाला है. कई कॉरपोरेट घरानों ने अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बदली है. वे अब फिजिकल ब्रांडिंग की बजाय डिजिटल विज्ञापन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

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आरजी कर घटना का साया और मंदी की आहट

राज्य में हाल ही में हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड और उसके बाद हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने भी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है. कई ब्रांड्स ने बड़े आयोजनों से फिलहाल दूरी बनाये रखने का फैसला किया है. आर्थिक मंदी की आहट के बीच कंपनियों को डर है कि इस बार खरीदारों की संख्या कम रह सकती है.

कारीगरों और शिल्पकारों की बढ़ी मुसीबत

कुम्हारटोली के मूर्तिकार और पंडाल बनाने वाले कारीगर सबसे ज्यादा प्रभावित होते दिख रहे हैं. कई कमेटियों ने ऐन वक्त पर मूर्तियों के साइज छोटे कर दिये हैं या डेकोरेशन का बजट घटा दिया है. उनका कहना है कि आयोजकों को चंदा नहीं मिल रहा है, जिससे वे कारीगरों को एडवांस देने में असमर्थ हैं. ढाकी (ढोल बजाने वाले) और लाइट डेकोरेटर्स के लिए भी यह साल चुनौतियों भरा रहने वाला है.

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Durga Puja Crisis in Bengal: क्या कहती हैं पूजा कमेटियां?

फोरम फॉर दुर्गोत्सव के सदस्यों के अनुसार, बंगाल की दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, लाखों लोगों की आजीविका का जरिया है. अगर कॉरपोरेट और सरकार की ओर से सहयोग में कमी आती है, तो इसका असर राज्य की जीडीपी (GDP) पर भी पड़ेगा. हालांकि, आयोजकों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे पूजा के दिन नजदीक आयेंगे, भक्तों का उत्साह आर्थिक बाधाओं को पीछे छोड़ देगा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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