Vikrant Rona Movie Review: सलमान खान की कॉपी करते दिखे किच्चा सुदीप, ऐसी है फिल्म की कहानी

Vikrant Rona की कहानी किस कालखंड में सेट की गयी.यह फ़िल्म में सटीक तरह से दर्शाया नहीं गया है, लेकिन पेट्रोल की कीमत 3 रुपये और डीजल 6 रुपये है. इससे मालूम पड़ता है कि कहानी कम से कम 50 साल पुरानी है. एक गांव है,जहां एक के बाद एक बच्चों की हत्या हो रही है.उनकी लाशें पेड़ पर लटकी हुई मिल रही है
फ़िल्म -विक्रांत रोना
निर्देशक-अनूप भंडारी
निर्माता-सलमान खान फिल्म्स
कलाकार-किच्चा सुदीप, जैकलीन फर्नांडीज, नीता अशोक,निरूप भंडारी और अन्य
प्लेटफार्म- सिनेमाघर
रेटिंग-डेढ़
साउथ के सिनेमा बढ़ती बादशाहत के बीच विक्रांत रोना ने आज सिनेमाघरों में दस्तक दी है.यह एक जासूसी एक्शन थ्रिलर जॉनर की फ़िल्म है .जिसमें हॉरर के भी कुछ तत्व है.यह एक थ्री डी फ़िल्म भी है.फ़िल्म से इतने पहलू जुड़े होने के बावजूद यह फ़िल्म एंटरटेन नहीं कर पाती है क्योंकि फ़िल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले बेहद कमजोर है.
इस फ़िल्म की कहानी किस कालखंड में सेट की गयी.यह फ़िल्म में सटीक तरह से दर्शाया नहीं गया है, लेकिन पेट्रोल की कीमत 3 रुपये और डीजल 6 रुपये है. इससे मालूम पड़ता है कि कहानी कम से कम 50 साल पुरानी है. एक गांव है,जहां एक के बाद एक बच्चों की हत्या हो रही है.उनकी लाशें पेड़ पर लटकी हुई मिल रही है और लोग इसके लिए ब्रह्म राक्षस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. इस मामले की तहकीकात कर रहे एक पुलिस वाले की भी हत्या हो जाती है और एक नए ऑफिसर विक्रांत रोना (किच्चा सुदीप) की फ़िल्म में एंट्री होती है.अभी हो रहे इन हत्याओं की वजह 28 साल पुरानी है. जिससे जाति संघर्ष और बदले की कहानी का पहलू जुड़ा है.विक्रांत असली गुनहगारों को कैसे बेनकाब करता है.यही आगे की कहानी है.
फ़िल्म की कहानी के बारे में यही सबसे सटीक लाइन हो सकती है कि यह आपके सब्र का इम्तिहान लेती है. जो कुछ भी परदे पर चल रहा है.वो आपको एंगेज सस्पेंस और थ्रिलर को बढ़ाना है इसका मतलब कुछ भी स्क्रीन पर दिखा देना एक लेखक की कमज़ोरी ही मानी जाएगी.किच्चा को इंटरवल से पहले जैसे गेटअप में दिखाया गया है.वह इसी कमज़ोरी को दर्शाता है. फ़िल्म की कहानी की शुरुआत बच्चों द्वारा सुनायी गयी कहानी से होती है,लेकिन फ़िल्म अपने अंत पर वहां नहीं पहुंचती है.यह बात भी अखरती है.
अभिनय की बात करें तो किच्चा सुदीप को देखते हुए सलमान खान की याद आ जाती है.फ़िल्म के कई दृश्यों में वह दबंग के सलमान खान के हाव-भाव और अंदाज़ को दुहराते दिखे हैं. अभिनेत्री जैकलीन फर्नान्डीज के लिए फ़िल्म में करने को कुछ नहीं था सिवाय एक डांस नंबर के. बाकी के कलाकारों में निरूप भंडारी और नीता अशोक अपनी- अपनी भूमिकाओं में जमें हैं.
डब फिल्मों का बाजार बड़ा बन चुका है,लेकिन इस फ़िल्म के संवाद बेहद कमजोर हैं. डबल मीनिंग के डायलॉग्स की भी भरमार है. फ़िल्म का एकमात्र अच्छा पहलू इसका आर्ट वर्क कहा जा सकता है.जो इस फ़िल्म के थ्री डी लुक को खास बनाता है. फ़िल्म का गीत-संगीत पक्ष औसत है.
कुलमिलाकर इस फ़िल्म से दूर रहने में ही समझदारी है.
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