जमुई में सब-इंस्पेक्टर प्रभात रंजन हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट के फैसले से बालू माफियाओं में हड़कंप
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 28 May 2026 8:56 AM
व्यवहार न्यायालय
Jamui News: जमुई के बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर प्रभात रंजन हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शहीद हुए पुलिस अधिकारी के मामले में तीन मुख्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है.
जमुई से अर्जुन अरनव के इनपुट के साथ रिपोर्ट.
Jamui News: कर्तव्य निभाने के दौरान अवैध बालू माफियाओं के हमले में शहीद हुए पुलिस अवर निरीक्षक प्रभात रंजन हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय, जमुई की अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों कृष्णा दास, मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को दोषी करार देते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इस फैसले के बाद जमुई पुलिस ने इसे पुलिस अनुसंधान और न्याय व्यवस्था की बड़ी सफलता बताया है.
अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई बनी थी मौत की वजह
यह मामला गरही थाना कांड संख्या-100/2023 से जुड़ा है. 14 नवंबर 2023 को पुलिस टीम अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची थी. इसी दौरान बालू माफियाओं ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया. आरोपियों ने पुलिस अवर निरीक्षक प्रभात रंजन को ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी थी. इस हमले में होमगार्ड जवान राजेश कुमार साह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. घटना के बाद पूरे जिले में आक्रोश फैल गया था.
वैज्ञानिक जांच से मजबूत हुआ केस
घटना के बाद जमुई पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से जांच शुरू की. पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण, सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया. कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत कई अहम सबूत जुटाए गए. जांच में यह साफ हुआ कि पुलिस टीम पर सुनियोजित हमला किया गया था.
दिनों में दाखिल हुआ मजबूत आरोपपत्र
जमुई पुलिस की अनुसंधान टीम ने महज 77 दिनों के भीतर मजबूत और तथ्यपरक आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया था. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की. अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तीन मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.
अन्य आरोपियों को भी हुई सजा
इस मामले में दशरथ दास, भूलिया देवी और चिंता देवी को सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और हिंसा करने का दोषी पाया गया. अदालत ने तीनों को दो-दो वर्ष की सजा सुनाई है. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला अवैध खनन और संगठित अपराध के खिलाफ सख्त संदेश है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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