आगरा: मनकामेश्वर मंदिर डकैती मामले में 10 साल बाद आया फैसला, बरी हुए रामलीला कमेटी के पदाधिकारी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Jun 2023 4:09 PM
आगरा में प्रमुख रामलीला कमेटी और मनकामेश्वर मंदिर प्रबंधन के बीच चल रहे डकैती के मुकदमे में बृहस्पतिवार को फैसला आ गया. अतिरिक्त जिला जज (एकादश) नीरज कुमार बख्शी ने सभी को बरी करने के आदेश किए.
Agra : जिले की प्रमुख रामलीला कमेटी और मनकामेश्वर मंदिर प्रबंधन के बीच चल रहे डकैती के मुकदमे में बृहस्पतिवार को फैसला आ गया. अतिरिक्त जिला जज (एकादश) नीरज कुमार बख्शी ने सभी को बरी करने के आदेश किए. इस मुकदमे में वांछित आठ आरोपियों में से पांच की पहले ही मौत हो चुकी है और तीन वर्तमान में जीवित हैं. कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले के बाद से तीनों लोगों में काफी खुशी है. उनका कहना है कि यह असत्य पर सत्य की विजय है.
आगरा की इस बहुचर्चित मामले में मनकामेश्वर मंदिर के प्रबंधक हरिहर पुरी ने रामलीला कमेटी के तत्कालीन अध्यक्ष और विधायक जगन प्रसाद गर्ग समेत 8 लोगों को आरोपी बनाते हुए मंदिर में दिनदहाड़े डकैती डालने और लाखों रुपए के स्वर्ण आभूषण नगदी लूट कर ले जाने का मुकदमा दिखाया था. वर्ष 2013 में लिखाए गए इस मुकदमे में रामलीला कमेटी के तत्कालीन मंत्री राम प्रकाश अग्रवाल, उप मंत्री व पत्रकार संजय तिवारी, ब्राह्मण सभा के राम सुरेश शर्मा, राम मित्र शर्मा, निखिल शर्मा, राम आशीष शर्मा और बसंतकांत शर्मा को आरोपी बनाया था.
करीब 10 साल तक चले इस लंबे मुकदमे में स्वास्थ्य कारणों से विधायक जगन प्रसाद गर्ग, राम प्रकाश अग्रवाल, राम सुरेश शर्मा, राम मित्र शर्मा और निखिल शर्मा का देहांत हो गया था. वहीं वर्तमान में संजय तिवारी, राम आशीष शर्मा और बसंतकांत शर्मा इस मुकदमे में शामिल अभियुक्त बचे थे और अभियुक्तों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर हरिदास शर्मा इस मामले की पैरवी कर रहे थे.
जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2013 में रामलीला कमेटी ने मनकामेश्वर मंदिर के निकट स्थित बारहदरी में सभा करते हुए. हरिहर पुरी पर अवैध कब्जा करने और बारादरी के हाल में अवैध दरवाजे निकालने का आरोप लगाया था. इसका विरोध करते हुए रामलीला कमेटी ने हरिहरपुरी द्वारा बनवाए गए दरवाजा पर ताला लगा दिया था और उसे समय दोनों पक्षों में विवाद निपटान की बात भी तय हो गई थी. लेकिन हरिहर पुरी ने दो महाबाद इस मामले में पुलिस में और कोर्ट में शिकायत कर दी पुलिस ने इस मामले में जल्द ही एफआर लगा दी.
हरिहर पुरी ने पुलिस की इस एफआर पर आपत्ति दाखिल की जिसको न्यायालय ने वाद पत्र के रूप में स्वीकार किया और हरिहर पुरी व उसके गवाहों के साक्ष्य लेने के उपरांत अभियुक्त को धारा 395, 427 और 452 में तलब किया और इन्हीं धाराओं में चार्ज लगाकर विचारण किया. कई साल की लंबी बहस के बाद 2018 में पहली बार मुकदमे में निर्णय की स्थिति बनी. लेकिन किन्हीं कारणों से यह फैसला टल गया. आज इस मामले में फैसला आ गया है.
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने इसे असत्य पर सत्य की जीत बताया है. उन्होंने कहा है की रामलीला कमेटी से शहर के प्रबुद्ध और श्रद्धालु जन जुड़े हुए हैं. वह मंदिर में डकैती जैसा पाप नहीं कर सकते. कोर्ट के साथ ईश्वर ने भी न्याय किया है. कमेटी के मंत्री राजीव अग्रवाल ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं. मंदिर प्रबंधन के पिछले आरोपों की भांति यह आरोप झूठा साबित हुआ.
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