डॉक्टर कर रहे थे इलाज, एंबुलेंस ड्राइवर ने छूते ही कहा ये तो मृत

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Mar 2020 7:06 AM

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एशियन जालान अस्पताल में हरिनारायण सिंह कॉलोनी (बरमसिया) निवासी 62 वर्षीय रवींद्र प्रसाद सिंह की मौत के बाद रविवार की शाम परिजनों ने जमकर हंगामा किया. उनका आरोप था कि मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी. लेकिन इसे बताया नहीं गया और बिल वसूली के लिए इलाज का नाटक किया गया

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धनबाद : एशियन जालान अस्पताल में हरिनारायण सिंह कॉलोनी (बरमसिया) निवासी 62 वर्षीय रवींद्र प्रसाद सिंह की मौत के बाद रविवार की शाम परिजनों ने जमकर हंगामा किया. उनका आरोप था कि मरीज की मौत पहले ही हो चुकी थी. लेकिन इसे बताया नहीं गया और बिल वसूली के लिए इलाज का नाटक किया गया. जब वे मरीज को दूसरे अस्पताल ले जा रहे थे तो एंबुलेंस ड्राइवर ने छूते ही बोल दिया कि ये तो मृत हैं. बाद में डॉक्टर ने इसे स्वीकार किया.

दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. हंगामे के कारण मरीज का इलाज करने वाले डॉ कुणाल किशोर वहां से चले गये. स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रबंधन ने सदर थाना की पुलिस को बुला लिया. थाना प्रभारी संजीव तिवारी दल-बल के साथ पहुंचे और दोनों पक्षों में समझौता करा दिया. अस्पताल प्रबंधन बिल वापस करने पर राजी हो गया. कुल एक लाख 20 हजार रुपये का बिल हुआ था. तत्काल 75 हजार वापस कर दिया गया. शेष 45 हजार जल्द वापस करने का आश्वासन दिया गया. परिजनों के अनुसार इसमें दवा का खर्च शामिल नहीं है.

बाहर के अस्पताल भी नहीं ले जाने दे रहे थे : राकेश कुमार सिंह के अनुसार जब भी वह डॉ से अपने पिता को बाहर ले जाने की बात करते तो वह मना कर देते. दस दिन से कोई सुधार नहीं होने पर रविवार को वे लोग एंबुलेंस बुलाकर अपने पिता को बाहर ले जा रहे थे. एंबुलेंस चालक ने जब उन्हें छुआ तो कहा कि इनकी तो मौत हो चुकी है. बाहर ले जाने से कोई फायदा नहीं है. राकेश ने जब डॉक्टर से पूछताछ की तो उन्होंने मौत की बात कबूल ली. इसके बाद मामला भड़क गया. राकेश का मानना है कि उनके पिता की मौत पहले हो गयी थी. मगर पैसे बनाने के चक्कर में जानबूझ कर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया.

जालान अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा, पहुंची पुलिस

बिल बनाने के लिए वेंटिलेटर पर रख इलाज के नाटक का आरोप

गंभीर अवस्था में मरीज को अस्पताल लाया गया था. इसकी जानकारी परिजन को दे दी गयी थी. इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गयी. अस्पताल का खर्च लौटाया जा रहा है.

अस्पताल प्रबंधन ने रकम लौटायी 10 दिनों से चल रहा था जालान में इलाज

रवींद्र किसी निजी कंपनी में काम करते थे. गत छह मार्च को हाउसिंग कॉलोनी में वह गिर पड़े. उनके पुत्र राकेश कुमार सिंह ने बताया कि यह ब्रेन हेमरेज था. उन्होंने फौरन अपने पिता को जालान अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल में भर्ती करवाते ही डॉ कुणाल किशोर ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखवा दिया. उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी. मगर डॉक्टर का कहना था कि वह अभी जिंदा हैं और उन्हें बचा लिया जाएगा. इलाज के नाम पर लगातार उनसे पैसे लिया जा रहे थे. दवाइयों में भी बहुत खर्चा कराया जा रहा था. वेंटिलेटर पर रखने के दौरान उनकी सांस चलती रहती थी. मगर वेंटिलेटर से हटाने के बाद उनकी सांस नहीं चलती थी.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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