भारत को इग्नोर करना अमेरिका के लिए मुश्किल, ट्रेड डील की गरमाहट से घट सकता है ट्रंप टैरिफ का रेट
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 12 Sep 2025 11:15 PM
पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति
India US Trade Deal : भारत और अमेरिका के रिश्तों में आई तल्खी 10 सितंबर से थोड़ी कम हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों की दुहाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अपना खास मित्र और भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को मजबूत बताया. जवाब में पीएम मोदी ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. अब वहां के नामित राजदूत सर्जिया गोर ने ट्रेड डील को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल को भारत आने न्यौता भी दिया है. इसे दोनों देशों के रिश्तों में नई गरमाहट और ट्रेड डील को लेकर एक नई शुरुआत माना जा सकता है.
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India US Trade Deal : ट्रंप टैरिफ के बाद भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में जो खटास आई और जो डैमेज कंट्रोल हुआ है, उन सबके बाद अब अगले सप्ताह दोनों देशों के प्रतिनिधि वांशिगटन में मिल सकते हैं. ट्रंप के करीबी और भारत में अमेरिका के नामित राजदूत सर्जिया गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच जो विवाद हैं, वो जल्दी ही सुलझ जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत खास हैं और इन्हें बिगड़ने नहीं दिया जाएगा.
डील में अमेरिका की प्राथमिकताएं और सीमाएं
अमेरिका यह चाहता है कि भारत अपने बाजारों को उसके उत्पाद के लिए खोल दें. खासकर उसकी चाहत कृषि और डेयरी क्षेत्र को लेकर है. इसके अलावा वह यह चाहता है कि भारत डिजिटल बिजनेस और डेटा फ्लो के नियमों में बदलाव लाकर उसे अमेरिका के लिए उपयुक्त बनाए. हालांकि भारत अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने का जरा भी पक्षधर नहीं है. वहीं अमेरिका पर दबाव यह है कि अमेरिका के राज नेता और आम आदमी भी यह चाहते हैं कि भारत के साथ बिजनेस जारी रहे, उसे भारी टैरिफ की वजह से नुकसान ना हो. रक्षा और तकनीकी सहयोग के कारण अमेरिका भारत के साथ रिश्तों को खराब नहीं करना चाहता है. अब देखना यह होगा कि जब अगले हफ्ते दोनों देशों के प्रतिनिधि मिलते हैं, तो वे किस हद तक जाकर रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश करते हैं.
क्या चाहता है भारत
ट्रंप टैरिफ से भारत के निर्यात पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है. यही वजह है कि भारत किसी भी तरह के डील से पहले यह चाहता है कि अमेरिका अपने उच्च टैरिफ में कटौती करे, अन्यथा बातचीत का कोई फायदा नहीं होगा. साथ ही भारत अमेरिका से अन्य छूट भी चाहता है. जिसमें आईटी कंपनियों के लिए सुविधा और वीजा नियम में छूट भी शामिल है. साथ ही भारत रूस से तेल खरीदना भी बंद नहीं करेगा, क्योंकि भारत के लिए यह बहुत ही जरूरी कदम है. ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए भारत यह कतई नहीं करेगा.
अभी किसी ठोस कदम की संभावना सीमित
भारत और अमेरिका के बीच जिस तरह की तनातनी पिछले दिनों देखने को मिली है, उसमें यह उम्मीद लगाना कि दोनों देश अप्रत्याशित रूप से अभी साथ आ जाएंगे और सबकुछ सामान्य हो जाएगा इसकी उम्मीद काफी कम है. ट्रंप टैरिफ को अगर दरकिनार करके भी देखें, तो ट्रेड डील के रास्ते में कई तरह की बाधाएं हैं. हां , यह जरूर है कि नवंबर में ट्रेड डील को लेकर जो निर्णायक बैठक होनी है, उससे पहले अगर भारत का प्रतिनिधिमंडल अगर अमेरिका जाएगा, तो कुछ सकारात्मक होगा. एससीओ समिट के दौरान जिस तरह दोनों देशों के बीच दूरियां बढ़ीं ट्रंप ने भारत को खो देने तक की बात कही, उसमें कुछ बदलाव संभव है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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