दुमका: सिस्टम की मार झेल रहे मासूम, 8 माह से खराब स्कूल का चापाकल, पढ़ाई छोड़ पानी ढोने को विवश बच्चे
Published by : Sameer Oraon Updated At : 22 Apr 2026 4:40 PM
चिलचिलाती धूप में पानी ढोने को मजबूर जरूवा स्कूल के बच्चे
Dumka School News: दुमका जिले के मसलिया प्रखंड से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. जरूवा राजकीयकृत मध्य विद्यालय के 75 मासूम छात्र पिछले 8 महीनों से पढ़ाई के बजाय प्यास बुझाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. स्कूल का चापाकल खराब होने के कारण बच्चे बांस की लाठी में बाल्टियां टांगकर 200 मीटर दूर से पानी लाते हैं.
Dumka School News, दुमका : सरकार एक ओर शिक्षा के निजीकरण और सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर दुमका के मसलिया प्रखंड अंतर्गत जरूवा राजकीयकृत मध्य विद्यालय से आती तस्वीरें इन दावों की पोल खोल रही हैं. यहां पिछले आठ महीनों से पेयजल संकट इतना गहरा गया है कि छात्र-छात्राओं को अपनी पढ़ाई छोड़कर पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है. भीषण गर्मी के इस दौर में स्कूल के मासूम बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर जाकर पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
200 मीटर की ‘जल यात्रा’ और बाधित पढ़ाई
विद्यालय में नामांकित करीब 75 बच्चों के लिए प्यास बुझाना किसी चुनौती से कम नहीं है. छोटे-छोटे बच्चे स्कूल ड्रेस में हाथों में बांस की लाठियां और उनमें टंगी बाल्टियां लेकर करीब 200 मीटर दूर स्थित एक सार्वजनिक चापाकल की ओर जाते नजर आते हैं. यह सिलसिला दिन भर चलता रहता है, जिससे न केवल उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि इस तपती धूप में उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
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मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, चापाकल की समस्या नई नहीं है. 22 जुलाई 2025 को जब मरम्मत के लिए मिस्त्री को बुलाया गया था, तब जांच में पता चला कि बोरिंग अंदर से धंस गई है. इसके बाद विभाग की ओर से कोई तकनीकी पहल नहीं की गई और न ही कोई नया बोरिंग कराया गया. पिछले 8 महीनों से फाइलें दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं और बच्चे पानी ढो रहे हैं.
प्रशासनिक अनदेखी की हद
प्रभारी प्रधानाध्यापिका बंदना कुमारी ने इस बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने बताया कि पेयजल की इस विकराल समस्या को लेकर बीआरसी (BRC) और प्रखंड कार्यालय को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई है. इसके बावजूद अब तक प्रशासन की नींद नहीं खुली है. मिड-डे मील बनाने से लेकर शौचालय तक के लिए पानी बाहर से लाना पड़ रहा है, जो स्कूल के प्रबंधन के लिए भी एक बड़ी समस्या बन गया है.
ग्रामीणों में रोष, जल्द समाधान की मांग
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की यह लापरवाही बर्दाश्त से बाहर है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नया चापाकल या पानी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे. बच्चों के भविष्य और उनके मानवाधिकारों से जुड़ा यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है.
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By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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