क्या ऑपरेशन सिंदूर के बाद की बौखलाहट है दिल्ली ब्लास्ट ? पद और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर थे डाॅक्टर आतंकी!

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 11 Nov 2025 2:31 PM

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दिल्ली ब्लास्ट

Delhi Bomb Blast : देश की राजधानी दिल्ली जब सोमवार शाम को अचानक दहली, तो 9 लोगों की सांसें थम गईं. बेकसूर लोग इस ब्लास्ट के शिकार बन गए. जिस अंदाज में और जिस जगह पर यह विस्फोट हुआ, उससे अंदेशा होता है कि यह आतंकवादी हरकत ही है. सरकार की ओर से यह कहा गया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, बैठकों का दौर जारी है और नए-नए खुलासे हो रहे हैं. इस बार की घटना में जो बात नई दिख रही है वो ये है कि साजिशकर्ता डाॅक्टरी पेशे से हैं, जिन्हें धरती पर का भगवान कहा जाता है. जांच में यह बात सामने आ रही है कि इन्होंने अपनी शिक्षा और नेटवर्क के जरिए अपने साजिशों को सफल बनाने की कोशिश की, ताकि उनपर शक कम किया जाए.

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Delhi Bomb Blast : दिल्ली के लाल किला इलाके में सोमवार की शाम एक कार में विस्फोट हुआ और इस दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई है. इस दुर्घटना ने दिल्ली को तो दहलाया ही, कई सवाल भी खड़े किए हैं? विस्फोट जिस तरीके से हुआ है, उसको देखते हुए इसे सामान्य विस्फोट की घटना तो नहीं कहा जा सकता है. हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या विस्फोट में आतंकवादियों का हाथ है? दरअसल ऑपरेशन सिंदूर में जिन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई हुई, उससे वे बौखलाए हुए हैं और संभव है कि इसी बौखलाहट में दिल्ली ब्लास्ट को अंजाम दिया गया. दिल्ली ब्लास्ट के क्रोनोलॉजी पर अगर ध्यान दें, तो कई बातें स्पष्ट होती हैं.

फरीदाबाद में हुई छापेमारी से दिल्ली ब्लास्ट का क्या है कनेक्शन?

सुरक्षा एजेंसियां अभी दिल्ली ब्लास्ट के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है, लेकिन अबतक जो जानकारियां सामने आईं हैं, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि फरीदाबाद में हुई छापेमारी और 2,900 किग्रा विस्फोटक की बरामदगी से दिल्ली ब्लास्ट का कनेक्शन है. दरअसल दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार एक डॉक्टर उमर नबी की है, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है. यह डॉक्टर फरीदाबाद छापेमारी में पकड़े गए मॉड्यूल से जुड़ा है. इस छापेमारी में जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से है. हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि दिल्ली ब्लास्ट और फरीदाबाद छापेमारी में सीधा कनेक्शन है,लेकिन सुरक्षा एजेंसियां विभिन्न एंगल से जांच कर रही है.

ब्लास्ट में क्या है अलफलाह मेडिकल काॅलेज की भूमिका?

Delhi-Blast
दिल्ली ब्लास्ट : घटना स्थल पहुंचे गृहमंत्री अमित शाह

दिल्ली ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इस दुर्घटना की जांच शुरू की, तो अलफलाह मेडिकल काॅलेज के 3 डाॅक्टर को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें से एक महिला डाॅक्टर भी शामिल हैं. काॅलेज के प्रोफेसर डॉ मुजम्मिल शकील को पुलिस ने 9 नवंबर को गिरफ्तार किया था. उसकी निशानदेही पर एक घर से लगभग 2,900 किलो औसत अमोनियम नाइट्रेट व विस्फोटक बनाने वाली सामग्रियां जब्त की गई हैं. एक महिला डाॅक्टर की भी गिरफ्तारी हुई है, जिसका नाम डाॅ शाहीन शाहिद है. महिला डाॅक्टर की गाड़ी से असॉल्ट राइफल एवं गोलियां बरामद होने की सूचना है. दिल्ली ब्लास्ट की जांच कर रही टीम लगातार अलफलाह मेडिकल काॅलेज में सर्च ऑपरेशन चला रही है और जरूरी सूचनाएं एकत्रित कर रही है, जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि दिल्ली ब्लास्ट में अलफलाह मेडिकल काॅलेज की भूमिका है.

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सीसीटीवी फुटेज में जिस डाॅक्टर का चेहरा दिखा वो कौन है?

द इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार दो डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद तीसरा संदिग्ध डाॅक्टर उमर नबी लापता था, लेकिन पुलिस ने जो सूचना दी है उसके अनुसार उमर नबरी दिल्ली ब्लास्ट का संभावित हमलावर है और सीसीटीवी फुटेज में वह हुंडई i20 के साथ कैद हुआ है. उमर नबी ही वह व्यक्ति है, जो विस्फोट के वक्त कार चला रहा था और संभवत: विस्फोट में उसकी मौत हो गई है. सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच के लिए उसके गांव जम्मू-कश्मीर पहुंच चुकी है और उसके कई रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ हो रही है.

क्या कुछ बड़ा करने की साजिश में शामिल थे डाॅक्टर आतंकी?

दिल्ली ब्लास्ट की तार अभी तक जिनसे भी जुड़ी है, वो पढ़े-लिखे वर्ग से आते हैं. गिरफ्तार होने वाले तीन लोग अलफलाह मेडिकल काॅलेज के डाॅक्टर हैं. जिस व्यक्ति की तस्वीर सीसीटीवी फुटेज में सामने आई है, वो भी एक डाॅक्टर है. इनके आधार पर यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आतंकवादी संगठनों के सहयोगी ये डाॅक्टर आतंकी कुछ बड़ा करने की साजिश में थे. यह भी आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान से संचालित होने वाले ये आतंकी संगठन, ऑपरेशन सिंदूर के बाद से बौखलाए हुए हैं और भारत में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे हैं. इन्होंने अपनी शिक्षा और नेटवर्क का प्रयोग फंडिंग, भर्ती, लॉजिस्टिक और विस्फोटक निर्माण में किया. चूंकि ये लोग समाज के प्रतिष्ठित लोग हैं, इसलिए इनपर शक की सुई भी जल्दी नहीं घूमती है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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