नये वैरिएंट से निबटने की तैयारी में जुटी बंगाल सरकार, जिले के अस्पतालों में कर रही खास व्यवस्था
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Dec 2022 2:00 PM
बंगाल के सभी जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में स्थायी कोरोना वार्ड खोले जायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने 307.76 करोड़ रुपये आवंटित कर दिया है. वर्तमान में राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या 10 से नीचे है.
कोविड का नया वैरिएंट बीएफ-7 चीन समेत पांच देशों में फैल चुका है. इसके मद्देनजर भारत सरकार ने भी सतर्कता और बचाव का निर्देश जारी कर दिया है. राज्य सरकार भी अलर्ट मोड पर आ गयी है. नये वैरिएंट से निबटने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने नयी योजना बनायी है. इसके तहत पहले की तरह अब कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए पूरे अस्पताल का अधिग्रहण नहीं किया जायेगा.
नये निर्णय के मुताबिक इस बार राज्य के सभी जिलों के दो सरकारी अस्पतालों में स्थायी कोरोना वार्ड खोले जायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने 307.76 करोड़ रुपये आवंटित कर दिया है. स्वास्थ्य निदेशक सिद्धार्थ नियोगी ने कहा, “ वर्तमान में राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या 10 से नीचे है. इसलिए कोरोना के इलाज के लिए किसी अस्पताल को कोविड हॉस्पिटल बनाने की जरूरत नहीं है. हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. विभाग पूरी तरह तैयार है. सभी आवश्यक कदम उठाये जायेंगे.”
केंद्र सरकार ने राज्यों को कोरोना से निबटने के लिए गाइडलाइंस भेजी है. इसमें ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाये रखने के लिए भी कहा गया है. ज्ञात हो कि कोरोना की पिछली लहरों में ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों की मौत हो गयी थी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राज्य को भेजे गये पत्र में ऑक्सीजन इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर एलएमओ और पीएसए प्लांट के रखरखाव पर जोर दिया गया है. हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि राज्य के पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन है.
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने शनिवार सुबह स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कोरोना की स्थिति को लेकर बैठक की, जिसमें कई निर्णय लिये गये. इसमें से एक यह है कि राज्य सरकार जीनोम सीक्वेंसिंग पर जोर देगी. साथ ही राज्य में बीएफ-7 आया है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए तीन निजी और एक सरकारी अस्पताल से सैंपल लिए जायेंगे.
स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि सभी जिलों में आरटी-पीसीआर, एंटीजन टेस्ट के लिए आधारभूत संरचना अच्छी तरह से बनायी जाये. सरकार ने एक लाख 15 हजार किट खरीदने का निर्णय लिया गया. जिन अस्पतालों में कोरोना का इलाज होगा, उनके इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा की जायेगी. ऑक्सीजन प्लांट्स को भी टेस्ट करने को कहा गया है.
कोलकाता. राज्य में ब्रूसीलोसिस से पहली मौत हुई है. कलकत्ता स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन में रविवार को शरबिंदू घोष (51) नामक मरीज की मौत हो गयी. वह पूर्व बर्दवान के भतार का रहने वाला था. उसे यहां 30 नवंबर को भर्ती कराया गया था. इससे पहले कई अस्पतालों में भी इलाज चला था. हालांकि मृतक के डेथ सर्टिफिकेट पर ब्रुसेलोसिस का जिक्र नहीं है. लेकिन परिजनों का दावा है कि वह ब्रूसीलोसिस से संक्रमित था. इस संबंध में अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुछ नहीं कहा गया है. ब्रूसीलोसिस ब्रुसेला नामक जीवाणु से हो सकता है. यह रोग मुख्य रूप से मवेशियों में होता है. इसके कुछ लक्षण कोरोना जैसे ही होते हैं.
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