Budget 2023 expectations : रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत बनेगा दुनिया का लीडर, उठाये जायेंगे ये कदम

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Budget 2023 expectations : रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत बनेगा दुनिया का लीडर, उठाये जायेंगे ये कदम

राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार पर्यावरण को संरक्षित करना चाहती है यही वजह है कि उनकी सरकार ने पिछले आठ वर्ष में सौर ऊर्जा की क्षमता को करीब 20 गुना बढ��ाया है, जिसकी वजह से रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत चौथे स्थान पर आ गया है.

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संसद के बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में कहा कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि प्रगति और प्रकृति दोनों एक साथ चल सकते हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकर का फोकस हरित विकास पर है. राष्ट्रपति के अभिभाषण की ये पंक्तियां बहुत खास है क्योंकि कल यानी एक फरवरी को देश का बजट पेश होना है और राष्ट्रपति ने एक तरह से संकेत दे दिया है कि केंद्र सरकार पर्यावरण को लेकर गंभीर है और वह क्लामेंट चेंज की चुनौतियों से निपटने के लिए योजनाएं लेकर आयेगी.

ग्रीन ग्रोथ पर है सरकार का फोकस

द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार का फोकस ग्रीन ग्रोथ पर है, इसके लिए सरकार पूरे विश्व को मिशन लाइफ से जोड़ने की योजना पर जोर दे रही है ताकि पर्यावरण को संरक्षित किया जा सके. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सरकार ने कुछ दिन पहले लाइफ मिशन की शुरुआत की थी. इस मिशन के तहत लोगों को पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाने के लिए तैयार किया जायेगा.

सौर ऊर्जा की क्षमता 20 गुना बढ़ायी गयी

राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार पर्यावरण को संरक्षित करना चाहती है यही वजह है कि उनकी सरकार ने पिछले आठ वर्ष में सौर ऊर्जा की क्षमता को करीब 20 गुना बढ़ाया है, जिसकी वजह से रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत चौथे स्थान पर आ गया है. भारत आज अपने बिजली उत्पादन का 40 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी के जरिये प्राप्त कर रहा है और यह एक बड़ी उपलब्धि है. राष्ट्रपति ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के संकल्प को एक बार फिर दोहराया है. द्रौपदी मुर्मू ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनाॅल के मिश्रण सहित हाइड्रोजन मिशन की बातों का जिक्र भी अपने अभिभाषण में किया.

लक्ष्य साधने की जरूरत

बेशक ये तमाम बातें हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां हैं. लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि सरकारें हरित विकास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन जो कार्य सामने आते हैं उन्हें देखकर यह महसूस होता है कि अभी बहुत कुछ किया जाना है. भारत सरकार ने यह तय किया था कि वह 2022 के अंत तक 175 गीगावाट हरित ऊर्जा का उत्पादन करेगी लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और हरित ऊर्जा का उत्पादन 55 गीगावाट पर ही थम गया. यही वजह है कि इस बार के केंद्रीय बजट से लोगों की कई अपेक्षाएं हैं.

ग्रीन एनर्जी के भंडारण की व्यवस्था जरूरी

केंद्रीय बजट 2023-24 में इस बात की व्यवस्था की जायेगी कि ग्रीन एनर्जी का भंडारण किया जाये और बिजली का उचित वितरण किया जाये. केंद्रीय बजट से यह उम्मीद इसलिए की जा रही है क्योंकि आने वाले वर्षों में क्लामेंट चेंज की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत दुनिया को राह दिखाने वाला है. ऐसे में भारत को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में ऐसे कार्य करने होंगे जो उदाहरण हों. बिजली मंत्रालय ने योजना के लिए चालू वित्त वर्ष में 7566 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये का अधिक आवंटन मांगा है. ऐसे में भारत के 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस बार के बजट में कई नयी और क्रांतिकारी योजनाओं की उम्मीद की जा रही है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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