एंथ्रोपिक एआई का कंप्यूटर कोवर्क उड़ा रहा साॅफ्टवेयर कंपनियों की नींद, ये है खासियत
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 05 Feb 2026 6:04 PM
एंथ्रोपिक एआई का मॉडल क्लॉड
Anthropic AI : एंथ्रोपिक एआई का मॉडल क्लॉड खासकर Computer Use / Cowork माॅडल साॅफ्टवेयर कंपनियों की नींद उड़ा रहा है. भविष्य को लेकर चिंतित इन कंपनियों के शेयर लगातार गिर रहे हैं. अमेरिका के साथ–साथ भारत में भी शेयर बाजार पर इसका असर दिख रहा है.
Anthropic AI : एंथ्रोपिक एआई साॅफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए सदमे की तरह उभरा है. एंथ्रोपिक एआई का प्रभाव इससे समझा जा सकता है कि अमेरिकी शेयर बाजार लगातार गिरा है. एंथ्रोपिक एआई का असर बुधवार को भारतीय बाजारों पर भी दिखा और इसके प्रभाव से शेयर मार्केट में भारी उठा–पटक दिखा. भारतीय कंपनियों के स्टाॅक्स गिरे और भविष्य को लेकर आशंका की वजह से इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो और एचसीएल जैसी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई. आखिर क्या है एंथ्रोपिक एआई, जिसकी धमक से पूरा विश्व हिल गया है, आइए समझते हैं.
क्या है एंथ्रोपिक एआई (Anthropic AI)?
एंथ्रोपिक एआई एक अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी है. यह मूलत: एक रिसर्च बेस कंपनी है, जिसके AI मॉडल क्लॉड (Claude) को काफी सफलता मिली है. यह एक लैंग्वेज मॉडल है. लैंग्वेज मॉडल कहने का अर्थ है एंथ्रोपिक एआई ने अपने भाषा मॉडल Claude 3 को पेश किया. इस माॅडल में जरूरतों के अनुसार तकनीक का विकास किया गया.
क्लॉड 3 क्या है, कैसे करता है काम?
क्लॉड 3 रिसर्च बेस काम करता है. इसे जरूरतों के अनुसार तीन श्रेणी में बांटा गया है. हर कैटगरी में अलग–अलग विकल्प दिए गए हैं, जिसे जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है.
1.क्लॉड हाइकू (Claude Haiku) यह कम खर्च में सबसे तेज काम करने वाला माॅडल है. इसका उपयोग साधारण या यूं कहें कि रोजमर्रा के जीवन की जरूरतों के अनुसार किया जाता है.
- क्लाउड सॉनेट( Claude Sonnet) यह माॅडल बहुत अच्छा है. इसका उपयोग आॅफिस वर्क के लिए खास तौर पर किया जाता है.
- क्लाउड ओपस ( Claude Opus) मॉडल क्लॉड का सबसे बेहतरीन मॉडल है. इसका इस्तेमाल रिसर्च वर्क के लिए किया जाता है. गंभीर और कठिन विषयों का समाधान इस माॅडल के जरिए किया जाता है.
मॉडल क्लॉड की विशेषता यह है कि यह तस्वीरों के जरिये भी सवालों के जवाब दे सकता है. यह गंभीर अध्ययन और विश्लेषण करता है और विषयों को याद भी रखता है.
क्लाउड कोवर्क (Claude Cowork) ला सकता है भयंकर परिवर्तन
क्लाउड कोवर्क एंथ्रोपिक एआई का क्रांतिकारी और बहुत बड़ा बदलाव लाने वाला माॅडल है. यह माॅडल ना सिर्फ कमांड देने वाले से बात करके उसकी समस्याओं का समाधान करता है, बल्कि यह उसके कंप्यूटर पर उसके प्रॉम्प्ट (कमांड) के आधार पर काम करता है. यह कंप्यूटर के माउस को चला सकता है. फोल्डर बना सकता है. कंटेंट को पढ़कर उसे अरेंज कर सकता है. यह क्लाउड एक असिस्टेंट की तरह काम करता है और आप उससे जैसे काम करवाना चाहें कर सकते हैं. किसी आर्टिकल को सुधारना, उसे सुरक्षित रखना जैसे काम प्रमुख है. यह विषयों को समझकर उसे सुरक्षित रखता है.
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एंथ्रोपिक एआई की खासियत क्या है?
एंथ्रोपिक एआई जिस तरह से काम करता है, वह नैतिक मूल्यों पर जोर देता है. इसमें सुरक्षा की भावना पर बहुत ध्यान दिया गया है. एंथ्रोपिक एआई जिस प्रकार विश्लेषण और अध्ययन करता है, वह यह साबित करता है कि इसमें झूठी और गलत जानकारी आने की संभावना बहुत कम है और यह दिए गए कमांड के आधार पर बेहतरीन और सुरक्षित काम करता है.
साॅफ्टवेयर कंपनियां क्यों घबरा रही हैं?
एंथ्रोपिक एआई के Computer Use / Cowork माॅडल से कुछ साॅफ्टवेयर कंपनियां परेशान हैं. इसकी वजह यह है कि यह माॅडल दिए गए प्राम्प्ट के आधार पर फाॅर्म भरने, डेटा इंट्री करने और एडिटिंग का काम बहुत ही सहजता से कर सकता है. यह कंप्यूटर के स्क्रीन को पढ़ता है और आदेश के अनुसार काम करता है. हालांकि यह बिना प्राम्प्ट के कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन कंपनियां इसके अपडेटेड वर्जन से डर रही हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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