अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई भारत के सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की चिंताएं, हीलियम सप्लाई है वजह

Updated at : 27 Mar 2026 1:32 PM (IST)
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helium shortage semiconductors

हीलियम सप्लाई और युद्ध की सांकेतिक फोटो (Photo: AI Generated)

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हीलियम सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इससे भारत के सेमीकंडक्टर प्लान्स पर भी दबाव दिख रहा है. ऊपर से सिरेमिक कमी ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.

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भारत का सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर इस समय एक नए खतरे का सामना कर रहा है. वजह है 19 मार्च को ईरान द्वारा कतर के Ras Laffan LNG हब पर किए गए कथित हमले की खबर. इस घटना ने हीलियम (Helium) की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हीलियम LNG से निकलने वाला एक जरूरी बायप्रोडक्ट है और सेमीकंडक्टर बनाने में बेहद जरूरी होता है. ऐसे समय में जब भारत खुद को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक और चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह खबर थोड़ी चिंता जरूर बढ़ाती है.

हीलियम का महत्व

हीलियम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए किसी रीढ़ की हड्डी से कम नहीं है. इसका इस्तेमाल मशीनों को ठंडा रखने, चिप्स की टेस्टिंग करने और उन्हें बहुत सटीक तरीके से बनाने में किया जाता है. इसका कोई आसान ऑप्शन भी नहीं है. फिलहाल प्रोडक्शन पर सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ी इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं. यही वजह है कि कंपनियां अब पहले से ही प्लानिंग में लग गई हैं ताकि आने वाले समय में सप्लाई चैन पर कोई बड़ा असर न पड़े.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर असर

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर अब साफ दिखने लगा है. खासकर शॉर्ट-टर्म में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, टेस्टिंग फैसिलिटीज और दूसरे प्रिसिजन वाले कामों में रुकावटें आ सकती हैं. हालांकि भारत में PCB असेंबली में हीलियम का इस्तेमाल ज्यादा नहीं होता (क्योंकि यह महंगा है), फिर भी इसका इंडायरेक्ट असर अब महसूस किया जा रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन खिंच रही हैं, नई मशीनों की इंस्टॉलेशन में देरी हो रही है और प्रोक्योरमेंट प्रोसेस (सामान खरीदने की पूरी प्लानिंग) भी स्लो पड़ गया है.

सिरेमिक सप्लाई में भी रुकावट 

इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री इस समय एक नई परेशानी से जूझ रही है. दरअसल, खास तरह के सिरेमिक मटेरियल की कमी होने लगी है. वजह है मोरबी में 550 से ज्यादा सिरेमिक यूनिट्स का बंद होना. इसका सीधा असर उन छोटे लेकिन बेहद जरूरी पार्ट्स पर पड़ा है, जैसे मल्टीलेयर सिरेमिक कैपेसिटर. यही वो कंपोनेंट्स हैं जो स्मार्टफोन, लैपटॉप और यहां तक कि ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स में भी इस्तेमाल होते हैं.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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