Anthropic के ग्लोबल सर्वे ने बताया- AI से क्या चाहते हैं लोग और डरते किस बात से हैं?

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 24 Mar 2026 1:35 PM

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AI पर लोगों की उम्मीदें और चिंताएं / सिंबॉलिक ai इमेज

Anthropic ने 159 देशों के 81,000 पार्टिसिपेंट्स पर आधारित एक वैश्विक अध्ययन जारी किया है. इसमें सामने आया कि लोग AI से समय बचाने और दक्षता बढ़ाने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन भरोसे की कमी और नौकरी पर असर को लेकर चिंतित हैं. भारत और ब्राजील जैसे देशों में AI को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण दिखा.

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AI को लेकर दुनिया भर में लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. Anthropic, जो Claude AI के पीछे काम करनेवाली कंपनी है, ने हाल ही में एक वैश्विक अध्ययन जारी किया है. इसमें बताया गया है कि लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से क्या चाहते हैं और उन्हें किन बातों की सबसे ज्यादा चिंता है. इस सर्वे में 159 देशों के 81,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और अपनी राय साझा की.

लोग AI से क्या चाहते हैं

सर्वे में सबसे ज्यादा प्रतिभागियों ने AI से समय बचाने और दक्षता बढ़ाने की उम्मीद जतायी. लगभग 18.8% लोगों ने प्रोफेशनल एक्सीलेंस को अपनी प्राथमिकता बताया, जबकि 13.7% ने पर्सनल ट्रांसफॉर्मेशन को अहम माना. कई लोगों ने कहा कि वे AI का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों को संभालने के लिए करते हैं ताकि वे रणनीतिक और जटिल कार्यों पर ध्यान दे सकें.

दूसरे इंस्पिरेशंस की बात करें, तो उनमें लाइफ मैनेजमेंट, टाइम फ्रीडम, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, समाज में बदलाव, उद्यमिता और सीखने-समझने का अवसर शामिल रहे. दिलचस्प बात यह रही कि केवल 5.6% प्रतिभागियों ने क्रिएटिव एक्सप्रेशन को प्राथमिकता दी, जो सबसे कम लोकप्रिय उपयोग मामला रहा.

सबसे बड़ी चिंता किस बात की

AI को लेकर सबसे बड़ी चिंता अनरिलायबिलिटी (26.7%)रही. इसके बाद नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर असर (22.3%) और ऑटोनॉमी और कंट्रोल (21.9%) को लेकर चिंताएं सामने आईं. अन्य मुद्दों में कॉग्निटिव डिक्लाइन, गवर्नेंस चुनौतियां, गलत जानकारी, निगरानी और प्राइवेसी रिस्क, दुरुपयोग और क्रिएटिविटी पर असर शामिल रहे. सबसे कम चिंता ओवर-रिस्ट्रिक्शन को लेकर रही.

इस अध्ययन में 159 देशों के प्रतिभागी शामिल थे (छवि स्रोत: Anthropic)
इस अध्ययन में 159 देशों के प्रतिभागी शामिल थे. (छवि स्रोत: anthropic)

क्षेत्रीय अंतर भी दिखे

अध्ययन ने यह भी दिखाया कि अलग-अलग देशों में AI को लेकर दृष्टिकोण अलग है. भारत, ब्राजील और इजराइल के प्रतिभागियों ने AI को लेकर सकारात्मक नजरिया दिखाया. वहीं फ्रांस, जापान और अमेरिका में मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिलीं. जर्मनी, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के लोग AI को लेकर अपेक्षाकृत ज्यादा संदेहपूर्ण रहे.

निष्कर्ष क्या निकला

यह अध्ययन बताता है कि लोग AI को अपनी प्रोडक्टिविटी और लाइफ मैनेजमेंट का अहम साधन मानते हैं, लेकिन भरोसे और नौकरी सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी उतनी ही गहरी हैं. Anthropic का यह सर्वे AI के भविष्य पर वैश्विक दृष्टिकोण को समझने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होता है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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