कलकत्ता हाईकोर्ट में जबर्दस्त हंगामा, ममता बनर्जी को देख वकीलों ने लगाये ‘चोर-चोर’ के नारे, मुश्किल से बाहर निकलीं दीदी

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 14 May 2026 9:05 PM

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ममता बनर्जी को कोर्ट से बाहर निकालने के लिए टीएमसी समर्थक वकीलों ने बनाया सुरक्षा घेरा.

Mamata Banerjee in Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ वकीलों ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाये. चुनाव बाद हिंसा मामले की सुनवाई के बाद बाहर निकलते समय भारी हंगामा हुआ. टीएमसी ने बीजेपी समर्थक वकीलों पर लगाया हमले का आरोप.

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Mamata Banerjee in Calcutta High Court: कलकत्ता हाईकोर्ट परिसर में बृहस्पतिवार को उस समय अभूतपूर्व अफरा-तफरी मच गयी, जब पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में खुद पैरवी करने पहुंचीं ममता बनर्जी जब सुनवाई के बाद अदालत से बाहर निकल रहीं थीं, तभी वकीलों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने शुरू कर दिये. अचानक हुए इस घटनाक्रम से कोर्ट परिसर में तनाव फैल गया. तृणमूल की कानूनी टीम को ममता बनर्जी को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी.

कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही शुरू हुई नारेबाजी

ममता बनर्जी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रही कथित हिंसा और पार्टी दफ्तरों पर हमलों के मामले में मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने पेश हुईं थीं. जैसे ही सुनवाई खत्म हुई और वे गलियारे में आयीं. वकीलों के एक गुट ने उन्हें देखते ही नारेबाजी शुरू कर दी. नारेबाजी इतनी तेज थी कि सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गये.

कल्याण बनर्जी का आरोप और सुरक्षा में चूक

टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जतायी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा से प्रभावित वकीलों ने पूर्व मुख्यमंत्री को जान-बूझकर परेशान किया. कल्याण बनर्जी ने कहा- अदालत किसी को सार्वजनिक रूप से चोर या डाकू कहने की जगह नहीं है. हमें उन्हें वहां से निकालने में बहुत मुश्किल हुई.

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क्यों कोर्ट पहुंचीं थीं ममता बनर्जी?

यह पूरा मामला टीएमसी की ओर से अधिवक्ता शिरशन्या बंद्योपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है. टीएमसी का दावा है कि उनके कई कार्यालयों पर हमले किये गये हैं, जिसकी सुनवाई के लिए ममता बनर्जी खुद वकील के तौर पर दलीलें देने पहुंची थीं.

Mamata Banerjee in Calcutta High Court: हाई कोर्ट परिसर में भारी तनाव

इस घटना के बाद हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. टीएमसी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया है. विरोधी खेमे के वकीलों का कहना है कि यह जनता का गुस्सा है, जो बाहर आ रहा है. ममता बनर्जी के साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य भी थीं. नारेबाजी के दौरान माहौल इतना बिगड़ गया था कि पुलिस को बीच-बचाव कर रास्ता बनाना पड़ा.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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