सपने को कंट्रोल करने के लिए आप ऐसा हरगिज न करें, जैसा इस रूसी शख्स ने किया; पढ़ें पूरी खबर

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 26 Jul 2023 10:12 PM

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do not drill your brain to install dream controller microchip - माइकल रेडुगा नाम के व्यक्ति के पास न्यूरोसर्जरी की कोई योग्यता नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने खुद ही सर्जरी करके अपने दिमाग में एक चिप लगायी है, ताकि वह एक दिन अपने सपनों को नियंत्रित कर सके.

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man drill his brain to install dream controller microchip : रूस में एक शख्स ने अपने सपनों को नियंत्रित करने के लिए अपनी खोपड़ी में ड्रिल करके उसमें माइक्रोचिप डालने की कोशिश की. ऐसा करते हुए वह लगभग मौत के मुंह में पहुंच गया. इस रूसी शख्स की पहचान माइकल रेडुगा के रूप हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस शख्स ने अपने सपने को कंट्रोल करने के लिए घर में उपयोग होने वाले ड्रिल मशीन की मदद से खोपड़ी में छेद कर उसमें माइक्रोचिप डालने की कोशिश की. इस प्रक्रिया में वह खुद चोटिल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.

10 घंटे लगे, काफी खून भी बहा

रिपोर्ट्स की मानें, ताे माइकल रेडुगा नाम के व्यक्ति के पास न्यूरोसर्जरी की कोई योग्यता नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने खुद ही सर्जरी करके अपने दिमाग में एक चिप लगायी है, ताकि वह एक दिन अपने सपनों को नियंत्रित कर सके. माइकल ने यह सर्जरी पिछले महीने अपने घर पर ही की, जिसमें उन्हें करीब 10 घंटे लगे थे और उस दौरान उनका काफी खून भी बह गया था. हालांकि, ऐसा करने से उसने ऐसा करने से पहले, उसने यूट्यूब पर न्यूरोसर्जन के काम करने का वीडियो देखा था. इस घटना का पता तब लगा, जब पिछले दिनों टेलीग्राम चैनल मैश साइबेरिया पर रूसी शहर नोवोसिबिर्स्क के रहने वाले इस व्यक्ति की तस्वीरें पोस्ट की गईं.

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खतरनाक सर्जरी करके खुश हैं माइकल

माइकल खुद से खुद पर इतनी खतरनाक सर्जरी करके खुश हैं. उनका मानना है कि यह प्रक्रिया एक दिन बहुत उपयोगी साबित हो सकती है, जो लोगों को उनके सपनों में प्रवेश करने की अनुमति दे सकती है. उन्होंने कहा कि अगर कोई लकवाग्रस्त व्यक्ति के साथ यह प्रक्रिया की जाए तो वह अपने सपने में जाकर कुछ भी कर सकता है. माइकल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, मेरे पास न्यूरोसर्जरी की कोई योग्यता नहीं है और मैंने हार्डवेयर स्टोर में मिली एक ड्रिल की मदद से अपने सिर में छेद किया और त्वचा के कुछ हिस्सों को पेपर क्लिप की मदद से पकड़कर चिप को इम्प्लांट कर दिया.

न्यूरोसर्जन ने इस प्रक्रिया को बताया खतरनाक

खुद के ऊपर ऐसी सर्जरी का खतरा मोल लेने वाले माइकल रडुगा ने कहा, शुरू में मुझे डर लग रहा था क्योंकि ऐसा करने में मेरा करीब 1 लीटर खून बह गया था और मुझे लग रहा था कि कहीं मैं बेहोश न हो जाऊं. खबरों की मानें, तो माइकल ने सर्जरी के 5 हफ्ते बाद चिप को हटा दिया क्योंकि इस प्रक्रिया की वजह से उन्हें लंबे समय तक चलने वाले नुकसान का खतरा हो सकता है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन एलेक्स ग्रीन बताते हैं कि इस प्रक्रिया को घर पर बिल्कुल नहीं आजमाना चाहिए क्योंकि यह बेहद खतरनाक काम है. उन्होंने कहा कि न्यूरोसर्जरी का अभ्यास केवल अनुभवी और योग्य नयूरोसर्जन द्वारा ही किया जाना चाहिए. मालूम हो कि रेडुगा फेज रिसर्च सेंटर संगठन के संस्थापक और एक लेखक हैं. संगठन की वेबसाइट के अनुसार, वह स्पष्ट स्वप्न, सूक्ष्म प्रक्षेपण और शरीर के बाहर के अनुभवों पर शोध और अध्ययन कर चुके हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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