ब्लू लाइन मेट्रो में थर्ड रेल बदलने का काम हुआ शुरू
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 14 Jun 2024 1:58 AM
मेट्रो रेलवे अपनी सभी स्टील से बनी करंट कंडक्टिंग थर्ड रेल (जहां से करंट प्रवाहित होती है) को बदल कर एल्युमीनियम का थर्ड रेल बनाने जा रहा है.
संवाददाता, कोलकाता
मेट्रो रेलवे अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए आये दिन विश्व स्तरीय नयी तकनीक प्रयोग कर रहा है. इसी क्रम में अब मेट्रो रेलवे अपनी सभी स्टील से बनी करंट कंडक्टिंग थर्ड रेल (जहां से करंट प्रवाहित होती है) को बदल कर एल्युमीनियम का थर्ड रेल बनाने जा रहा है. एल्युमीनियम युक्त थर्ड रेल से बिजली की खपत लगभग 84 प्रतिशत कम हो जायेगी. साथ ही हानिकारक कार्बन का उत्पादन भी बहुत कम होगा. मेट्रो का दावा है कि एल्युमीनियम की थर्ड रेल से प्रति किलोमीटर प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये बिजली की खपत में बचत होगी. 38 वर्ष पुरानी ब्लू लाइन (दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष) की स्टील से बनी करंट कंडक्टिंग थर्ड रेल को एल्युमीनियम थर्ड रेल में बदलने का काम गुरुवार को नोवापाड़ा से शुरू किया गया. मेट्रो रेलवे के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सिंगापुर, लंदन, मॉस्को, बर्लिन और म्यूनिख मेट्रो में एल्युमीनियम की थर्ड रेल लाइन का इस्तेमाल हुआ है. विश्व के उन्नत शहरों में चलने वाली मेट्रो में एल्युमीनियम के बने थर्ड रेल का इस्तेमाल हो रहा है. कोलकाता मेट्रो रेलवे के दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष तक मेट्रो लाइन में यह कार्य 2 साल में पूरा होने की उम्मीद है.
मेट्रो अधिकारियों को उम्मीद है कि दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष मेट्रो रेल लाइन की करंट कंडक्टिंग थर्ड रेल में स्टील की जगह एल्युमीनियम का उपयोग से कोलकाता मेट्रो सिंगापुर और लंदन जैसे बड़े शहरों के समान सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगी. दक्षिणेश्वर से कवि सुभाष तक के ब्लू लाइन में लगे करंट कंडक्टिंग थर्ड रेल को बदलने का काम एक जर्मन कंपनी को दिया गया है. जर्मनी को जो कंपनी इस कार्य को कर रही है वह दुनिया के 20 प्रमुख शहरों में मेट्रो लाइन बिछाने का काम कर चुकी है. मेट्रो के मुताबिक ईस्ट-वेस्ट ग्रीन लाइन और जोका-ताराताला पर्पल लाइन एल्यूमीनियम के थर्ड रेल का उपयोग किया गया है.
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