तेभागा एक्सप्रेस में लगाया कबाड़ हो चुका एसी कोच

Updated at :05 May 2017 11:32 PM
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तेभागा एक्सप्रेस में लगाया कबाड़ हो चुका एसी कोच

रेल यात्री कल्याण समिति ने जताया क्षोभ रेल अधिकारियों व मंत्री को लिखी चिट्ठी जल्द से जल्द कोच बदलने की मांग बालूरघाट : तेभागा एक्सप्रेस में सन 1992 में ही रद्द हो चुका टूटा-फूटा एसी कोच लगाया गया है. रेलवे की इस भूमिका पर बालूरघाट रेल यात्री कल्याण एवं समाज विकास समिति ने क्षोभ जताया […]

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रेल यात्री कल्याण समिति ने जताया क्षोभ
रेल अधिकारियों व मंत्री को लिखी चिट्ठी
जल्द से जल्द कोच बदलने की मांग
बालूरघाट : तेभागा एक्सप्रेस में सन 1992 में ही रद्द हो चुका टूटा-फूटा एसी कोच लगाया गया है. रेलवे की इस भूमिका पर बालूरघाट रेल यात्री कल्याण एवं समाज विकास समिति ने क्षोभ जताया है. इसका विरोध करते हुए कोच को बदलने की मांग की गयी है. इस संबंध में एक चिट्ठी रेलवे को भेजी गयी है. समिति का कहना है कि रेल मंत्रालय द्वारा जिले के साथ सौतेल व्यवहार कभी स्वीकार नहीं किया जायेगा.
उल्लेखनीय है कि गत मार्च महीने में यह खबर आयी थी कि बालूरघाट से कोलकाता जाने वाली तेभागा एक्सप्रेस में अब एसी कोच भी लगेगा. चेयरकार वाली इस ट्रेन में अभी तक एसी की व्यवस्था नहीं थी. आखिरकार आम लोगों की मांग को देखते हुए इसी मई महीने के आरंभ में एसी डिब्बा लगाने की व्यवस्था की गयी. आठ बोगियों वाली तेभागा एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन बालूरघाट से कोलकाता आती-जाती है. ट्रेन सुबह 5.05 बजे बालूरघाट स्टेशन से खुलती है और दिन के 3.00 बजे कोलकाता के चितपुर स्टेशन पहुंचती है. अब इसमें एक एक एसी कोच भी बढ़ गया है.
दिन-दिन में ही कोलकाता पहुंचाने के कारण इस ट्रेन में यात्रियों की काफी भीड़ होती है. एक समय इस ट्रेन में 14 बोगियां थी, जो अधीर चौधरी के रेल मंत्री रहते हुए कम कर दी गयीं. इसे लेकर आम लोगों में अब भी नाराजगी है. लोगों की मांग है कि ट्रेन में डिब्बों की संख्या बढ़ायी जाये. एसी कोच मिलने से लोग खुश हुए, लेकिन कोच का हाल देख उन्हें निराश होना पड़ा. एसी कोच का किराया 505 रुपये रखा गया है. लेकिन सीटें टूटी अवस्था में हैं. एसी भी ठीक से काम नहीं करता.
बालूरघाट रेल यात्री कल्याण एवं समाज विकास समिति के चेयरमैन स्मृतिश्वर राय ने कहा कि उनकी मांग पर ही तेभागा एक्सप्रेस में एसी कोच लगाया गया है. लेकिन जब उन्होंने ट्रेन का मुआयना किया, तो कोच बदहाल मिला. पता चला कि यह कोच 1992 में ही कंडम कर दिया गया था. इसके अलावा किराया 505 रुपये बोला गया था, जबकि 560 रुपये लिये जा रहे हैं. इसका प्रतिवाद करते हुए रेल अधिकारियों से लेकर रेल मंत्री तक चिट्ठी भेजी गयी है.
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