नोट बंदी के 30 दिन पूरे, बैंकों में अभी भी लोगों की भीड़

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Dec 2016 1:33 AM

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सिलीगुड़ी: नोटबंदी के 30 दिन में उत्तर बंगाल में लोगों की आर्थिक स्थिति कैसे रही, इसे मुद्दे को लेकर प्रभात खबर ने आम से खास तक की स्थिति का जायजा लिया. जायजा लिये जाने पर जो रिपोर्ट सामने आयी है उसमें केवल आम लोग ही परेशान नहीं हो रहे बल्कि बैंककर्मी भी हलकान हो रहे […]

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सिलीगुड़ी: नोटबंदी के 30 दिन में उत्तर बंगाल में लोगों की आर्थिक स्थिति कैसे रही, इसे मुद्दे को लेकर प्रभात खबर ने आम से खास तक की स्थिति का जायजा लिया. जायजा लिये जाने पर जो रिपोर्ट सामने आयी है उसमें केवल आम लोग ही परेशान नहीं हो रहे बल्कि बैंककर्मी भी हलकान हो रहे हैं. मोदी सरकार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) द्वारा नोटबंदी को लेकर हर रोज नियम-कानून में फेरबदल करने का खामियाजा सबसे अधिक बैंक अधिकारी और कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है.

इसके मद्देनजर बैंक कर्मियों के संगठन बंगीय प्रादेशिक बैंक कर्मचारी समिति ने पूरे सिस्टम पर ही सवाल उठाया है. यह सवाल समिति के दार्जिलिंग जिला इकाई के सचिव लक्ष्मी महतो ने उठाया है. उनका कहना है कि कालाधन, भ्रष्टाचार और अन्य गोरखधंधों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच सौ और हजार के पुराने नोटों को रद्द करना जल्दबाजी में लिया गया फैसला है. साथ ही आर्थिक सलाहकारों व विशेषज्ञों से बगैर सलाह लिये ही मोदी ने गलत फैसला लिया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी को लेकर पीएम, वित्त मंत्री और आरबीआइ के गवर्नर के बीच तालमेल ही नहीं है. नोटबंदी के एलान के बाद मोदी, वित्त मंत्री और गवर्नर के बयानों में कभी भी समानता नहीं देखी गयी. केंद्र सरकार कभी कुछ निर्देश जारी करती है तो गवर्नर कुछ और. इस वजह से बैंक प्रबंधन को अपने ग्राहकों को सही सेवा देने में कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. श्री महतो का कहना है कि नोटबंदी के 30 दिन हो गये, स्थिति में जरा भी सुधार नहीं है.

बैंक कर्मचारी हर रोज देर रात तक ड्यूटी करने के बाद दूसरे दिन भी ग्राहकों को सेवा देने के लिए बैंक में मौजूद रहते हैं. इसके बावजूद केंद्र सरकार के गलत फैसले का ग्राहक अपना गुस्सा बैंक कर्मियों पर निकाल रहे हैं. बैंक कर्मचारियों को पीटने और बैंकों में बंधक बनाने के कई मामले भी सामने आया है. श्री महतो ने कहा कि इस 30 दिनों में मानसिक दबाव की वजह से पूरे देश में कई बैंक कर्मियों की मौत हो चुकी है. वहीं पश्चिम बंगाल में 50 से भी अधिक बैंक कर्मी अस्वस्थ हुए हैं. उत्तर बंगाल में ही अब-तक दर्जन भर बैंक कर्मचारी बीमार पड़ चुके हैं.

श्री महतो का कहना है कि नोट बंद करने से पहले सरकार को नये नोट बड़े पैमाने पर निकालना जरूरी था. आरबीआइ दो हजार, पांच सौ के नये नोट के अलावा खुदरा रूपये बैंकों को देने में भी राजनीति कर रही है. मेट्रो सिटी के बैंकों व एटीएम में बड़े पैमाने पर नोट आपूर्ति कर रही है. लेकिन उत्तर बंगाल के बैंकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. नये नोट केवल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया या कुछ निजी बैंकों को ही अधिक आपूर्ति दिये जा रहे हैं. श्री महतो ने बताया कि पूरे उत्तर बंगाल में 1150 सरकारी व गैर सरकारी बैंक और तीन हजार से अधिक एटीएम हैं.

बैंक कर्मचारी करेंगे हड़ताल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने उनके नोटबंदी के गलत फैसले के विरूद्ध हड़ताल करने की धमकी दी है. बंगीय प्रादेशिक बैंक कर्मचारी समिति के दार्जिलिंग जिला सचिव लक्ष्मी महतो ने कहा कि अगर चार-पांच दिनों के अंदर अगर सरकार अपना फैसला नहीं बदलती है या फिर स्थिति में सुधार नहीं होती है तो सात-आठ दिनों में पूरे देश में बैंक कर्मचारी एक दिन का हड़ताल करेंगे. इसके मद्देनजर संगठन की केंद्रीय कमेटी ने पीएम, वित्त मंत्री और आरबीआइ को भी अपने फैसले से अवगत करा दिया है. हड़ताल की तारीख जल्द की केंद्रीय कमेटी एलान करेगी. श्री महतो ने बताया कि हड़ताल से पहले 12 दिसंबर को संगठन के बैनरतले दोपहर के समय आरबीआइ के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया जायेगा.
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