सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के नये प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य राजनीतिक टकराव के बीच फंसा हुआ है. विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने 2012 में ही निगम के तत्कालीन तृणमूल बोर्ड को नये भवन निर्माण के लिए पहले चरण में दो करोड़ रुपये मुहैया कराये थे. लेकिन चार साल बाद भी नये भवन की नींव नहीं रखी जा सकी है.
तृणमूल नेताओं ने निगम के वर्तमान वाम बोर्ड पर भवन निर्माण के रुपये सूद पर लगाने का दावा किया है. हालांकि वाम बोर्ड ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. तृणमूल नेतओं का कहना है कि राज्य सरकार से आर्थिक सहयोग मिलने के बावजूद निगम का वाम बोर्ड सिलीगुड़ी शहर का विकास करने और सेवाएं देने में विफल है. वाम बोर्ड की उदासीनता की वजह से ही सत्ता में रहते हुए 14 महीने होने के बावजूद आज तक नये भवन का काम शुरू नहीं हो सका है.
तृणमूल नेता कृष्णचंद्र पाल ने खड़ा किया सवाल : तृणमूल कांग्रेस की जिला कमिटी के सचिव व 23 नंबर वार्ड के पार्षद कृष्णचंद्र पाल ने वाम बोर्ड पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि भवन निर्माण का रुपया कहां है, कौन सूद का मुनाफा कमा रहा है, कोई नहीं जानता. श्री पाल का कहना है दो साल पहले जब निगम में तृणमूल का बोर्ड था तभी नये भवन के निर्माण के लिए प्लान इस्टीमेट आदि जरूरी काम कर लिये गये थे. नये भवन की आधारशिला भी रखी गयी थी. लेकिन बोर्ड पर वाम का दखल होने के बाद से ही काम में कोई गति नहीं आयी. विकास परियोजनाओं के लिए निगम को मिल रहा फंड कहां जा रहा है, किसका पॉकेट गरम हो रहा है, किसका बैंक बैलेंस बढ़ रहा है, कोई नहीं जानता. कहीं कोई हिसाब-किताब नहीं है.
मेयर ने तृणमूल पर ही फोड़ा ठीकरा : निगम में वाम बोर्ड के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने भवन निर्माण न होने का ठीकरा तृणमूल के माथे पर ही फोड़ा है. उन्होंने करारा जवाब देते हुए कहा कि फंड चार पहले 2012 में आया था. तब राज्य की सत्ता और सिलीगुड़ी नगर निगम की सत्ता में तृणमूल का ही दखल था. फंड मिलने के तीन साल बाद, यानी 2015 तक निगम की कमान प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से तृणमूल ने ही संभाल कर रखी. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि भवन निर्माण के लिए तृणमूल बोर्ड ने केवल परिकल्पना की थी और आधारशिला रखी थी, इसके अलावा और कुछ नहीं किया. वाम बोर्ड को निगम में अभी केवल एक वर्ष हुआ है. इस बीच हमने डीपीआर तैयार करके और टेंडर करके निर्माण कार्य को गति दी गयी थी. लेकिन इसी दौरान विधानसभा चुनाव शुरू हो गया. श्री भट्टाचार्य का कहना है कि निगम का राज्य सरकार के पास जो बकाया पड़ा है, वह नहीं मिल रहा. अगर वाम बोर्ड भवन निर्माण का काम शुरू करता है, तो बाकी रुपये राज्य सरकार से मिलेंगे या नहीं, इस पर भी संशय है. उन्होंने रुपये के हेर-फेर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तृणमूल के बोर्ड के समय जिस तरह रुपये निगम के बैंक खाते में जमा थे, आज भी उसी तरह खाते में पड़े हैं. निगम के वर्तमान बोर्ड के पास पाई-पाई का हिसाब है.