अवैध तरीके से चल रहे अनाथ आश्रम में छापामारी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jul 2016 7:30 AM

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी के चयनपाड़ा में वर्षों से अवैध तरीके से चलाये जा रहे उत्तर बंग अनाथ आश्रम में अचानक जलपाईगुड़ी जिले की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों की छापामारी से इलाके में हड़कंप मच गया. कमेटी के अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर भक्तिनगर थाना के आसीघर पुलिस चौकी व एनजीओ चाइल्ड इन […]

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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी के चयनपाड़ा में वर्षों से अवैध तरीके से चलाये जा रहे उत्तर बंग अनाथ आश्रम में अचानक जलपाईगुड़ी जिले की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों की छापामारी से इलाके में हड़कंप मच गया. कमेटी के अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर भक्तिनगर थाना के आसीघर पुलिस चौकी व एनजीओ चाइल्ड इन नीड इंस्टिच्यूट (सिनी) के सहयोग से मुहिम चलाकर आश्रम से कुल 17 असहाय लड़कियों को बरामद किया. 16-17 वर्ष की एक किशोरी अधिकारियों व पुलिस को चकमा देकर मौके से फरार हो गयी.
पुलिस ने आश्रम में रह रही दो महिलाओं को बाहर कर दिया और आश्रम में ताला जड़ दिया. बरामद बच्चियों को सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में मेडिकल टेस्ट करवाया गया. कमेटी के अधिकारी आसीघर चौकी में आवश्यक खानापूर्ति करने के बाद सभी बच्चियों को अपने साथ जलपाईगुड़ी ले गये. वहां सभी को कोरक होम में रखा गया. रविवार को सभी बच्चियों को जलपाईगुड़ी जिले के जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया जायेगा.
कमेटी के बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट का दावा
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के बेंच ऑफ मजिस्ट्रेट डॉ मन्ना मुखर्जी का ने दावा करते हुए कहा कि आश्रम में अनाथ व असहाय मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. आश्रम से दो मासूम बच्चियां बुखार से बुरी तरह पीड़ित पायी गयीं. दोनों का इलाज शुरू करा दिया गया है.
आश्रम की तहकीकात करने पर अनाथ बच्चों के रख-रखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो भी मापदंड है उसमें आश्रम प्रबंधन खरा नहीं उतरा. आश्रम से जरूरी दस्तावेज नदारद थे. आश्रम में ढांचागत सुविधाओं का भी अभाव देखा गया.
तीन मंजिले पक्के मकान की हालत पूरी तरह खंडहर जैसी थी. जो कभी भी ढह सकती है और बड़ी अनहोनी घटित हो सकती है. मकान को चारदिवारी से भी नहीं घेरा गया है. मासूमों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है.
सीढ़ियों में रेलिंग नहीं है. एक पालतू कुत्ता है जो मासूमों को कभी भी काट सकता है. साथ ही मुहिम के दौरान आश्रम की सचिव उमा मल्लिक मौके पर मौजूद नहीं थी. वह कूचबिहार गयी हुई हैं. उनकी अनुपस्थिति में मासूमों के देखभाल करनेवाली प्रशिक्षित कोई भी महिला कर्मचारी मौजूद नहीं थी और न ही आया मौजूद थी. जो दो-तीन महिला मौजूद थी उनमें एक खाना बनाने का काम करती है तो अन्य दो महिला अब इतनी अधेड़ हो चुकी हैं कि वह बच्चियों का क्या देखभाल करेंगी.
उमा से उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने अधिकारियों के सवालों का जवाब भी तोड़-मरोड़ कर दी. उनके एक भी जवाबों का मेल आश्रम की मौजूदा स्थिति से नहीं मिला. साथ ही आश्रम से जुड़ी कानूनी दस्तावेज भी उन्होंने कहा रखी है उन्हें इसकी सटीक जानकारी नहीं है.
डॉ मुखर्जी ने बताया कि इलाकेवासियों ने भी आश्रम में चल रहे अवैध धंधे और उमा मल्लिक के विरुद्ध कई लिखित शिकायत की है. उनको मंगलवार तक जलपाईगुड़ी स्थित दफ्तर में सभी दस्तावेजों के साथ जवाब-तलब के लिए समय दिया गया है. अगर वह मंगलवार तक नहीं आती है और सही जानकारी चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को नहीं देता है तो उनके विरूद्ध सख्त कार्रवायी की जायेगी.
आश्रम की आड़ में अवैध धंधे का आरोप: आश्रम में अनाथ मासूमों के रखने के आड़ में अवैध धंधों का खुलासा पड़ोसियों ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों के सामने की. पड़ोसियों ने आश्रम की संचालिका व सचिव उमा मल्लिक पर आरोपों की झड़ियां लगा दी.
इलाकेवासियों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षर कर अधिकारियों को लिखित शिकायत की. लोगों का आरोप है कि संचालिका आश्रम के नाम पर 11-12 वर्ष से 16-17 वर्ष की किशोरियों से जिस्मफरोशी करवाती है. जिस आश्रम मे लड़कियों को रखा जाता है वहां लड़कों का क्या काम? शाम ढलने के बाद ही हमेशा आश्रम में अज्ञात लड़कों को आते-जाते देखा जाता है.
इससे पहले कई बार आश्रम से लड़कियों के भागने और उनके साथ शारीरिक संबंध बनने जैसे विवादों से आश्रम का नाता जुड़ा रहा है. अवैध धंधों का विरोध करने पर उल्टा उमा मल्लिक उन्हें झूठे मामलों मे फंसा कर जेल भिजवा देती है या फिर उनकी हत्या तक करवा देती है.
आश्रम के पड़ोस में ही रहनेवाला एक युवक अवैध धंधों का विरोध करने पर दूसरे दिन से ही लापता है. इस बात को काफी अरसा हो गया है. वह जिंदा है या फिर उसकी हत्या करवा दी गयी, कोई नहीं जानता. उसकी बूढ़ी विधवा मां आजतक उसकी आस में किसी तरह जिंदगी काट रही है.
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल : आश्रम में चलायी गयी मुहिम के दौरान पुलिस की भूमिका को लेकर इलाकावासियों ने सवाल उठाया है. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारी के बार-बार फोन करने के बावजूद आसीघर चौकी से सादे वर्दी में एक एएसआइ, दो-तीन कांस्टेबल व मात्र एक महिला पुलिस को लेकर करीब एक पौन घंटे की देरी से मौके पर पहुंचे. इस वजह से बच्चियों को बचाने के दौरान वेलफेयर कमेटी और पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी.
बाद में भक्तिनगर थाना और आसीघर चौकी से और पुलिसकर्मी व महिला पुलिस को बुलाया गया. इस बीच 16-17 वर्ष की एक किशोरी मौके का फायदा उठाकर सबों को चकमा देने में सफल हो गयी और मौके से फरार हो गयी. इलाकेवासियों ने इसके लिए पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है. साथ ही आक्रोशित लोगों ने कहाकि एएसआइ जब से मौके पर आये हैं तभी से उनका मोबाइल केवल कान पर ही लगा है.
संचालिका उमा मल्लिक करेंगी मानहानि का दावा : आश्रम की संचालिका वसचिव उमा मल्लिक ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा करने और अधिकारियों को कोर्ट में घसीटने का दावा किया है. उन्होंने प्रभात खबर के प्रतिनिधि को मोबाइल पर अपनी सफाई पेश की और कहा कि उनकी अनुपस्थिति में उनकी बच्चियों को कोई कैसे ले जा सकता है.
साथ ही आश्रम से एक किशोरी उनके आतंक के कारण भाग गयी. अगर उसके साथ कुछ अनहोनी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी क्या कमेटी लेगी? वह कमेटी अधिकारियों के विरुद्ध एफआइआर भी करेंगी. उन्होंने अपने ऊपर लगाये गये सभी आरोपों मिथ्या और बदनाम करने की साजिश करार दिया.
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