देश के लिए कुरबान दिनेश की शहादत पर पूरे परिवार को गर्व
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Jun 2016 1:51 AM
सिलीगुड़ी: देश के लिए कुरबान बीएसएफ के जवान दिनेश गिरि (40) की शहादत पर पूरे परिवार को गर्व है. दिनेश बीएसएफ में हवलदार के पद पर जम्मू-कश्मीर में कार्यरत थे. तीन जून यानी शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से 50 किमी दूर अनंतनाग जिला अंतर्गत गोरीवान इलाके के बिजबेहरा बाजार के निकट आतंकी मुठभेड़ में […]
पांच जून यानी रविवार को सिलीगुड़ी में उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया. यहां श्मशान रामघाट में बड़े लड़के ने पिता को मुखाग्नि दी. घटना के छह दिन बीत जाने के बावजूद सिलीगुड़ी के 40 नंबर वार्ड के दुर्गा नगर स्थित दिनेश के घर में मातम छाया हुआ है और पूरे इलाके में शोक है. वहीं, मां-बाप और पत्नी की आंखों गर्व के आंसू से भरे हैं. मां उर्मिला देवी, पिता राम इकबार गिरि और पत्नी सरिता को दिनेश का अब इस दुनिया में न होने का जितना अफसोस है उतना ही गर्व भी है.
दिनेश के न होने की बात पर राम इकबाल के 65 वर्षीय बूढ़ी आंखों से आंसू जरूर छलक पड़ते हैं वहीं, देश की रक्षा के लिए बेटे के शहादत की बात सोचकर सीना गर्व से चौड़ा हो उठता है. उनका कहना है कि भारत मां की रक्षा के लिए मेरे बहादुर लड़के ने लड़ते-लड़ते कुरबानी दी, यह मेरे लिए गर्व की बात है. लेकिन, अफसोस है कि वह मेरा ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए मुख्य सहारा भी था. राम इकबाल के पांच बेटे-बेटियों में दिनेश सबसे बड़ा लड़का, उससे बड़ी एक बेटी निर्मला, छोटे लड़कों में विनोद, कमलेश व संतोष है. दिनेश के अलावा उसके छोटे तीनों भाई सिलीगुड़ी में ही प्राइवेट फर्म में नौकरी करते हैं.
अबतक कोई मंत्री या नेता भी शहीद के घर नहीं पहुंचा है. दिनेश की शहादत पर जहां पूरा देश सलाम ठोंक रहा है वहीं बंगाल के मंत्रियों, सिलीगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य, जिला अधिकारी (डीएम), एसडीओ जैसे स्थानीय प्रशासन की बेरुखी से भी पूरा परिवार खफा है. दिनेश के पिता राम इकबाल, साला नवनीत कुमार का कहना है कि आतंकी मुठभेड़ में दिनेश के अलावा बीएसएफ के और दो जवान शहीद हुए. एक बिहार के ही पटना और दूसरा उत्तर प्रदेश का रहनेवाला था. दोनों को जब उनके पैतृक गांवों में दाह संस्कार किया जा रहा था, उस दौरान उन राज्यों के मुख्यमंत्री, अन्य मंत्री के अलावा आलाधिकारी भी बड़ी संख्या में शहीद जवान के परिवार के साथ खड़े थे. लेकिन यहां दिनेश के दाह-संस्कार में बीएसएफ के आलाधिकारी के अलावा न तो कोई मंत्री आया और न न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी. यहां तक की अभी तक कोई मुलाकात करने या सांत्वना देने भी भी कोई नहीं आया.
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